कफ सिरप अब डॉक्टर पर्ची के बिना नहीं: केंद्र ने औषधि नियम 1945 में किया बड़ा संशोधन
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि नियम, 1945 में संशोधन करते हुए देशभर में कफ सिरप (खांसी की दवा) की बिक्री पर सख्त नियामक नियंत्रण लागू कर दिया है। अब कोई भी उपभोक्ता किसी पंजीकृत चिकित्सक के वैध प्रिस्क्रिप्शन के बिना खांसी की सिरप नहीं खरीद सकेगा। यह संशोधन दिसंबर 2025 में अधिसूचित किया गया था और अब पूरे भारत में प्रभावी माना जाएगा।
क्या है नया नियम
मंत्रालय ने राजपत्र अधिसूचना जीएसआर 927 (ई) के माध्यम से यह बदलाव अधिसूचित किया है। इस अधिसूचना के तहत औषधि नियम, 1945 की अनुसूची 'क' की प्रविष्टि संख्या 13 से 'सिरप' शब्द को हटा दिया गया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि अब खांसी की सिरप को उन दवाओं की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है जिन्हें बिना प्रिस्क्रिप्शन के बेचा जा सकता था।
संशोधन के बाद कफ सिरप की बिक्री और वितरण केवल औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 तथा औषधि नियम, 1945 के अंतर्गत लाइसेंस प्राप्त फार्मेसियों के ज़रिये ही वैध होगी।
ग्रामीण क्षेत्रों पर सबसे बड़ा असर
इससे पहले 1,000 से कम जनसंख्या वाले गाँवों में खांसी की सिरप की खुदरा बिक्री के लिए लाइसेंस की अनिवार्यता से छूट दी गई थी। इस छूट के चलते इन क्षेत्रों में दवाएँ आसानी से और बिना किसी नियामक निगरानी के बिकती थीं। अब यह छूट पूरी तरह समाप्त कर दी गई है। छोटे गाँवों में भी अब बिना लाइसेंस के कफ सिरप बेचना कानूनी अपराध होगा।
यह ऐसे समय में आया है जब देश में कफ सिरप के दुरुपयोग और अवैध बिक्री की शिकायतें, विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों से, लगातार सामने आ रही थीं। गौरतलब है कि भारतीय कफ सिरप की गुणवत्ता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सवाल उठ चुके हैं, जिससे यह नीतिगत कदम और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।
निर्माताओं और विक्रेताओं को सख्त चेतावनी
स्वास्थ्य मंत्रालय ने खांसी की दवाओं के सभी निर्माताओं, वितरकों और खुदरा विक्रेताओं को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे नए नियमों का कड़ाई से पालन करें। मंत्रालय के अनुसार, किसी भी प्रकार की अनदेखी पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह कदम दवाइयों के जिम्मेदार वितरण को बढ़ावा देने और पूरे देश में नियामक मानकों का समान अनुपालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
आम जनता और बच्चों पर असर
उपभोक्ताओं को अब खांसी की कोई भी सिरप खरीदने के लिए पंजीकृत डॉक्टर का वैध प्रिस्क्रिप्शन दिखाना अनिवार्य होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह नियम बच्चों को दी जाने वाली कफ सिरप के संदर्भ में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन दवाओं में कोडीन जैसे घटकों के दुरुपयोग की आशंका रहती है। ग्रामीण क्षेत्रों में दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में यह एक ठोस नीतिगत हस्तक्षेप माना जा रहा है।
आगे क्या होगा
यह संशोधन अब पूरे देश में लागू है और सभी राज्यों की औषधि नियामक एजेंसियों से इसे लागू करवाने की अपेक्षा की जाएगी। फार्मेसी संचालकों को अपने लाइसेंस और रिकॉर्ड अद्यतन रखने होंगे। आने वाले महीनों में नियामक निरीक्षण और प्रवर्तन गतिविधियाँ बढ़ सकती हैं, खासकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में।