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प्रेगाबालिन अब शेड्यूल एच1 में शामिल: स्वास्थ्य मंत्रालय की अधिसूचना, बिना पर्चे बिक्री पर रोक

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प्रेगाबालिन अब शेड्यूल एच1 में शामिल: स्वास्थ्य मंत्रालय की अधिसूचना, बिना पर्चे बिक्री पर रोक

सारांश

स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रेगाबालिन को शेड्यूल एच1 में शामिल कर दिया है — यानी अब यह दवा बिना पंजीकृत डॉक्टर के पर्चे के नहीं मिलेगी। कई राज्यों में इसकी अवैध बिक्री और दुरुपयोग की रिपोर्टों के बाद यह सख्त नियामकीय कदम उठाया गया है।

मुख्य बातें

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 22 मई 2026 को प्रेगाबालिन को शेड्यूल एच1 में शामिल करने की अधिसूचना जारी की।
अब प्रेगाबालिन केवल पंजीकृत चिकित्सा प्रैक्टिशनर (आरएमपी) के वैध पर्चे पर ही बेची जा सकेगी।
खुदरा विक्रेताओं को पर्चों और बिक्री का विवरण अलग रजिस्टर में दर्ज करना अनिवार्य होगा।
निर्माताओं को पैकेजिंग पर शेड्यूल एच1 ड्रग वार्निंग लेबल प्रमुखता से लगाना होगा।
नियमों के उल्लंघन पर ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत दंडात्मक कार्रवाई होगी।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 22 मई 2026 को प्रेगाबालिन दवा को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स, 1945 की अनुसूची एच1 के अंतर्गत शामिल करने की आधिकारिक अधिसूचना जारी की। यह निर्णय देश के कई राज्यों से सामने आई उन रिपोर्टों के बाद लिया गया है जिनमें इस दवा के कथित दुरुपयोग और अवैध बिक्री की बात उजागर हुई थी। गैजेट ऑफ इंडिया एक्स्ट्राऑर्डिनरी में प्रकाशित यह अधिसूचना तत्काल प्रभाव से लागू मानी जा रही है।

प्रेगाबालिन क्यों बनी चिंता का विषय

प्रेगाबालिन मूलतः पुराने दर्द, न्यूरोपैथी, फाइब्रोमायल्जिया और विशेष न्यूरोलॉजिकल स्थितियों के उपचार में उपयोग की जाने वाली दवा है। हालाँकि, स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इसके नींद लाने वाले, उत्साह उत्पन्न करने वाले और मानसिक प्रभावों के कारण कथित तौर पर इसका गलत इस्तेमाल बढ़ता जा रहा था। देश के कुछ हिस्सों से अवैध रूप से संग्रहीत और बिना अनुमति के बेची जा रही प्रेगाबालिन की हालिया बरामदगी की खबरें भी सामने आई हैं, जिसने नियामकीय कार्रवाई को अपरिहार्य बना दिया।

शेड्यूल एच1 के तहत नए नियम

संशोधित वर्गीकरण के अनुसार, प्रेगाबालिन अब केवल किसी पंजीकृत चिकित्सा प्रैक्टिशनर (आरएमपी) द्वारा जारी वैध पर्चे के आधार पर ही बेची जा सकेगी। शेड्यूल एच1 की 'दवा - सावधानी' चेतावनी स्पष्ट करती है कि इसे डॉक्टर की सलाह के बिना लेना खतरनाक है।

इसके अतिरिक्त, खुदरा विक्रेताओं को पर्चों और बिक्री का विवरण एक अलग रजिस्टर में दर्ज करना अनिवार्य होगा। निर्माताओं को उत्पाद की पैकेजिंग पर निर्धारित शेड्यूल एच1 ड्रग वार्निंग लेबल प्रमुखता से प्रदर्शित करना होगा। यह व्यवस्था पहले की अपेक्षाकृत कम सख्त शेड्यूल एच श्रेणी से एक महत्त्वपूर्ण नियामकीय बदलाव है।

आपूर्ति श्रृंखला पर असर

मंत्रालय ने सभी संबंधित पक्षों — निर्माताओं, वितरकों, थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं और फार्मासिस्टों — को इस अधिसूचना के प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की सलाह दी है। नियमों का उल्लंघन करने पर ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

सरकार का उद्देश्य

मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि इस कदम का उद्देश्य 'पूरी आपूर्ति शृंखला में जवाबदेही को मजबूत करना, बिना अनुमति के पहुँच को रोकना, पर्चों की निगरानी को बेहतर बनाना, अवैध तस्करी पर रोक लगाना और दवाओं के गलत इस्तेमाल व दुरुपयोग से जनस्वास्थ्य की रक्षा करना है।' गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देश में प्रिस्क्रिप्शन दवाओं के दुरुपयोग को लेकर चिंताएँ लगातार बढ़ रही हैं।

आगे क्या होगा

अधिसूचना के गैजेट में प्रकाशित होने के साथ ही यह नियम प्रभावी हो गए हैं। फार्मेसी और दवा वितरण उद्योग को अपनी रिकॉर्ड-कीपिंग प्रणाली और लेबलिंग प्रक्रिया को तत्काल अद्यतन करना होगा। दवा नियामक विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से प्रेगाबालिन की अनियंत्रित बिक्री पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा, बशर्ते राज्य-स्तरीय प्रवर्तन तंत्र भी सक्रिय रहे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा राज्य-स्तरीय प्रवर्तन की होगी — क्योंकि भारत में अन्य नियंत्रित दवाओं जैसे ट्रामाडोल और कोडीन के मामले में भी सख्त नियम कागज़ों पर रहे और ज़मीन पर अवैध बिक्री जारी रही। अधिसूचना में रिकॉर्ड-कीपिंग और लेबलिंग की बाध्यता तो है, लेकिन डिजिटल प्रिस्क्रिप्शन ट्रैकिंग या केंद्रीकृत निगरानी तंत्र का कोई उल्लेख नहीं है। जब तक फार्मेसी-स्तर पर वास्तविक जाँच और दंड का भय नहीं होगा, यह अधिसूचना दुरुपयोग रोकने में सीमित प्रभाव ही दिखा पाएगी।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रेगाबालिन को शेड्यूल एच1 में क्यों शामिल किया गया?
कई राज्यों से मिली रिपोर्टों में प्रेगाबालिन के कथित दुरुपयोग और अवैध बिक्री की बात सामने आई थी। इसके नींद लाने वाले और उत्साह उत्पन्न करने वाले प्रभावों के कारण इसका गलत इस्तेमाल बढ़ रहा था, जिसके बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने सख्त नियामकीय श्रेणी में इसे शामिल करने का निर्णय लिया।
शेड्यूल एच1 और शेड्यूल एच में क्या अंतर है?
शेड्यूल एच1 शेड्यूल एच की तुलना में अधिक सख्त श्रेणी है। इसमें बिक्री के लिए पंजीकृत डॉक्टर का पर्चा अनिवार्य है, खुदरा विक्रेताओं को अलग रजिस्टर रखना होता है, और पैकेजिंग पर विशेष चेतावनी लेबल लगाना जरूरी है।
प्रेगाबालिन किन बीमारियों के इलाज में उपयोग होती है?
प्रेगाबालिन मुख्यतः पुराने दर्द, न्यूरोपैथी, फाइब्रोमायल्जिया और विशेष न्यूरोलॉजिकल स्थितियों के उपचार में दी जाती है। यह एक वैध चिकित्सीय दवा है जिसका उपयोग डॉक्टर की निगरानी में किया जाना चाहिए।
नई अधिसूचना का फार्मासिस्टों और दवा विक्रेताओं पर क्या असर होगा?
अब निर्माताओं, वितरकों, थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं और फार्मासिस्टों सभी को शेड्यूल एच1 के प्रावधानों का पालन करना होगा। उल्लंघन पर ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
क्या अब प्रेगाबालिन बिना पर्चे के मिल सकती है?
नहीं। अधिसूचना के बाद प्रेगाबालिन केवल किसी पंजीकृत चिकित्सा प्रैक्टिशनर के वैध पर्चे पर ही बेची जा सकती है। बिना पर्चे के इसकी खुदरा बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है।
राष्ट्र प्रेस
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