10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

16 एफडीसी दवाओं पर केंद्र सरकार की तत्काल रोक, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुई कार्रवाई

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
16 एफडीसी दवाओं पर केंद्र सरकार की तत्काल रोक, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुई कार्रवाई

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर गठित डीटीएबी की विशेषज्ञ समिति की सिफारिश के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 16 एफडीसी दवाओं पर देशभर में तत्काल रोक लगा दी है। इनमें त्वचा, दर्द निवारक और एंटीबायोटिक-आधारित संयोजन दवाएं शामिल हैं जिन्हें अवैज्ञानिक या जोखिमपूर्ण पाया गया।

मुख्य बातें

केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय ने 20 जून 2026 को 16 एफडीसी दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण पर तत्काल रोक लगाई।
रोक औषधि व सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 की धारा 26ए के तहत जारी अधिसूचना के माध्यम से लागू हुई।
यह कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर डीटीएबी की विशेषज्ञ समिति की सिफारिश के आधार पर की गई।
प्रतिबंधित दवाओं में त्वचा संबंधी , दर्द निवारक व ऐंठनरोधी और एंटीबायोटिक-आधारित संयोजन दवाएं शामिल हैं।
सभी राज्य ड्रग कंट्रोलर और प्रवर्तन एजेंसियों को सख्त अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय ने 20 जून 2026 को 16 फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (एफडीसी) दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण पर देशभर में तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह कदम औषधि व सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 की धारा 26ए के तहत जारी अधिसूचना के माध्यम से उठाया गया है। मंत्रालय के अनुसार, इन दवाओं का कोई चिकित्सीय औचित्य नहीं पाया गया और इनका निरंतर उपयोग मानव स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण माना गया।

प्रतिबंध की पृष्ठभूमि

यह निर्णय सर्वोच्च न्यायालय के उन निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है, जिनमें देश में उपलब्ध एफडीसी दवाओं की व्यापक समीक्षा का आदेश दिया गया था। निर्देशों के पालन में ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (डीटीएबी) ने एक विशेषज्ञ समिति गठित की, जिसका कार्य उन एफडीसी दवाओं की पहचान करना था जो अवैज्ञानिक, चिकित्सकीय रूप से अनुचित या स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती हैं।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने इस प्रकार की कार्रवाई की हो — इससे पहले भी विस्तृत वैज्ञानिक समीक्षा के बाद कई एफडीसी दवाओं पर प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं।

कौन-सी दवाएं प्रतिबंधित हुईं

प्रतिबंधित 16 एफडीसी दवाएं विभिन्न चिकित्सीय श्रेणियों से संबंधित हैं। इनमें त्वचा संबंधी दवाएं, दर्द निवारक और ऐंठनरोधी दवाएं तथा एंटीबायोटिक-आधारित संयोजन दवाएं शामिल हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक मूल्यांकन और विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर इन दवाओं के विरुद्ध कार्रवाई की गई है।

प्रवर्तन एजेंसियों को सख्त निर्देश

मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि सभी राज्य ड्रग कंट्रोलर, रेगुलेटरी अथॉरिटी और प्रवर्तन एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वे इन अधिसूचनाओं का सख्ती से पालन और कार्यान्वयन सुनिश्चित करें। इसके साथ ही दवा निर्माताओं, आयातकों, वितरकों और अन्य हितधारकों को भी कानून के प्रावधानों का अनुपालन करने के लिए आवश्यक सुधारात्मक उपाय करने की सलाह दी गई है।

सरकार की दीर्घकालिक नीति

मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई सरकार के उन निरंतर प्रयासों का हिस्सा है, जिनके तहत आम जनता को केवल सुरक्षित, प्रभावी और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित दवाएं ही उपलब्ध कराई जाती हैं। यह कदम मरीजों की सुरक्षा और साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य सेवा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को और मज़बूत करता है।

आगे क्या होगा

प्रतिबंध के तत्काल प्रभाव से लागू होने के बाद अब दवा निर्माताओं और वितरकों को अपने स्टॉक और आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव करने होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की नियामक कार्रवाइयाँ दीर्घकालिक रूप से भारत के दवा बाज़ार को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने में सहायक सिद्ध होती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ये दवाएं वर्षों तक बाज़ार में कैसे बनी रहीं। भारत में एफडीसी नियमन की कमज़ोरी कोई नई बात नहीं — 2016 में भी सरकार ने 344 एफडीसी पर प्रतिबंध लगाया था, जिसे अदालतों में चुनौती दी गई और क्रियान्वयन वर्षों तक अटका रहा। इस बार सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में हुई कार्रवाई अधिक प्रभावी हो सकती है, बशर्ते प्रवर्तन एजेंसियाँ ज़मीनी स्तर पर सख्ती बरतें। जब तक प्रतिबंधित दवाओं की पूरी सूची सार्वजनिक नहीं होती, मरीज़ों और डॉक्टरों के लिए यह जानना मुश्किल रहेगा कि वे कौन-सी दवाएं हैं जिनसे बचना है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केंद्र सरकार ने किन 16 दवाओं पर रोक लगाई है?
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 16 फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (एफडीसी) दवाओं पर प्रतिबंध लगाया है, जिनमें त्वचा संबंधी, दर्द निवारक व ऐंठनरोधी और एंटीबायोटिक-आधारित संयोजन दवाएं शामिल हैं। मंत्रालय ने अभी तक इन सभी दवाओं के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं।
एफडीसी दवाओं पर यह प्रतिबंध क्यों लगाया गया?
डीटीएबी की विशेषज्ञ समिति के वैज्ञानिक मूल्यांकन में इन दवाओं का कोई चिकित्सीय औचित्य नहीं पाया गया और इनका निरंतर उपयोग मानव स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण माना गया। यह कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय के उस निर्देश के अनुपालन में की गई है जिसमें एफडीसी दवाओं की व्यापक समीक्षा का आदेश दिया गया था।
यह प्रतिबंध कब से लागू हुआ और इसका कानूनी आधार क्या है?
यह प्रतिबंध 20 जून 2026 से तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। मंत्रालय ने इसे औषधि व सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 की धारा 26ए के तहत जारी अधिसूचना के माध्यम से लागू किया है।
दवा निर्माताओं और वितरकों पर इस प्रतिबंध का क्या असर होगा?
दवा निर्माताओं, आयातकों और वितरकों को इन 16 एफडीसी दवाओं का निर्माण, बिक्री, वितरण और आपूर्ति तत्काल बंद करनी होगी। मंत्रालय ने उन्हें कानून के प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सुधारात्मक उपाय करने की सलाह दी है।
क्या पहले भी भारत में एफडीसी दवाओं पर प्रतिबंध लगाया गया है?
हाँ, इससे पहले भी विस्तृत वैज्ञानिक समीक्षा के बाद कई एफडीसी दवाओं पर प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं। मंत्रालय के अनुसार, यह कार्रवाई मरीजों की सुरक्षा और साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य सेवा के प्रति सरकार की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 दिन पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले