डाबर को दिल्ली हाईकोर्ट से अंतरिम राहत, FSSAI के '100%' दावों पर प्रतिबंध आदेश पर रोक
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली हाईकोर्ट ने 7 अगस्त 2026 को डाबर इंडिया लिमिटेड को अंतरिम राहत देते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के उस प्रतिबंध आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी, जिसमें कंपनी को कथित रूप से भ्रामक '100 प्रतिशत' दावों वाले खाद्य उत्पादों की बिक्री तत्काल बंद करने का निर्देश दिया गया था। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया माना कि बिना सुनवाई का अवसर दिए इस प्रकार का आदेश पारित करना उचित नहीं था।
मुख्य न्यायिक आदेश
न्यायमूर्ति अमित महाजन की एकल पीठ ने डाबर इंडिया की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और FSSAI को नोटिस जारी किया। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा, 'याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता की दलीलों को देखते हुए, इस अदालत की प्रथम दृष्टया राय है कि इस तरह का प्रतिबंध आदेश सुनवाई का अवसर दिए बिना पारित नहीं किया जाना चाहिए था। अगली सुनवाई की तारीख तक विवादित आदेश पर रोक लगाई जाती है।' इस मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त को निर्धारित की गई है।
डाबर की दलीलें
डाबर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत में तर्क दिया कि कंपनी दशकों से इन उत्पादों की बिक्री कर रही है और जिस अधिकारी ने प्रतिबंध आदेश जारी किया, उसके पास ऐसा करने का वैधानिक अधिकार नहीं था। यह भी तर्क दिया गया कि आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना और कंपनी को कोई कारण बताओ नोटिस जारी किए बिना पारित किया गया, जो प्रक्रियागत रूप से त्रुटिपूर्ण है।
FSSAI का पक्ष
FSSAI की ओर से केंद्र सरकार के स्थायी अधिवक्ता आशीष दीक्षित ने नियामक की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि प्रतिबंध आदेश जारी करने से पहले डाबर को सुधार संबंधी नोटिस दिया गया था। FSSAI का आरोप था कि डाबर के कुछ उत्पादों पर इस्तेमाल किए गए '100 प्रतिशत प्राकृतिक', '100 प्रतिशत शुद्ध', '100 प्रतिशत ऑर्गेनिक' और '100 प्रतिशत टेंडर नारियल पानी' जैसे दावे अस्पष्ट, सत्यापित न किए जा सकने वाले और उपभोक्ताओं को गुमराह करने की संभावना वाले थे। नियामक के अनुसार यह खाद्य सुरक्षा एवं मानक विज्ञापन तथा दावे विनियम, 2018 का उल्लंघन है।
ऑर्गेनिक लोगो पर भी विवाद
FSSAI ने डाबर हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर और डाबर ऑर्गेनिक हनी पर जैविक भारत लोगो के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई थी। नियामक का आरोप था कि इन उत्पादों के पास वैध FSSAI ऑर्गेनिक अनुमोदन नहीं था, जो खाद्य सुरक्षा एवं मानक जैविक खाद्य विनियम, 2017 का उल्लंघन है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में जैविक उत्पादों की लेबलिंग और प्रमाणन को लेकर नियामकीय कड़ाई बढ़ रही है।
आगे क्या होगा
मामले को शुरुआत में मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ के समक्ष तत्काल सुनवाई के लिए रखा गया था, जिसने इसे अनुमति दी। अब 24 अगस्त की सुनवाई में FSSAI और केंद्र सरकार को अपना जवाब दाखिल करना होगा। इस फैसले का असर उन तमाम एफएमसीजी कंपनियों पर भी पड़ सकता है जो अपने उत्पादों पर इसी तरह के दावे करती हैं।