22 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

डाबर को दिल्ली हाईकोर्ट से अंतरिम राहत, FSSAI के '100%' दावों पर प्रतिबंध आदेश पर रोक

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
डाबर को दिल्ली हाईकोर्ट से अंतरिम राहत, FSSAI के '100%' दावों पर प्रतिबंध आदेश पर रोक

सारांश

दिल्ली हाईकोर्ट ने FSSAI के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें डाबर को '100%' दावों वाले उत्पादों की बिक्री बंद करने को कहा गया था। न्यायमूर्ति अमित महाजन ने माना कि सुनवाई का अवसर दिए बिना यह आदेश प्रक्रियागत रूप से त्रुटिपूर्ण था। मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त को होगी।

मुख्य बातें

दिल्ली हाईकोर्ट ने 7 अगस्त को FSSAI के प्रतिबंध आदेश के क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगाई।
न्यायमूर्ति अमित महाजन ने माना कि बिना सुनवाई का अवसर दिए आदेश पारित करना प्रथम दृष्टया उचित नहीं था।
FSSAI ने '100 प्रतिशत प्राकृतिक' , '100 प्रतिशत ऑर्गेनिक' समेत कई दावों को उपभोक्ताओं के लिए भ्रामक बताया था।
डाबर हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर और डाबर ऑर्गेनिक हनी पर जैविक भारत लोगो के इस्तेमाल पर भी आपत्ति थी।
केंद्र सरकार और FSSAI को नोटिस; अगली सुनवाई 24 अगस्त को निर्धारित।

दिल्ली हाईकोर्ट ने 7 अगस्त 2026 को डाबर इंडिया लिमिटेड को अंतरिम राहत देते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के उस प्रतिबंध आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी, जिसमें कंपनी को कथित रूप से भ्रामक '100 प्रतिशत' दावों वाले खाद्य उत्पादों की बिक्री तत्काल बंद करने का निर्देश दिया गया था। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया माना कि बिना सुनवाई का अवसर दिए इस प्रकार का आदेश पारित करना उचित नहीं था।

मुख्य न्यायिक आदेश

न्यायमूर्ति अमित महाजन की एकल पीठ ने डाबर इंडिया की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और FSSAI को नोटिस जारी किया। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा, 'याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता की दलीलों को देखते हुए, इस अदालत की प्रथम दृष्टया राय है कि इस तरह का प्रतिबंध आदेश सुनवाई का अवसर दिए बिना पारित नहीं किया जाना चाहिए था। अगली सुनवाई की तारीख तक विवादित आदेश पर रोक लगाई जाती है।' इस मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त को निर्धारित की गई है।

डाबर की दलीलें

डाबर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत में तर्क दिया कि कंपनी दशकों से इन उत्पादों की बिक्री कर रही है और जिस अधिकारी ने प्रतिबंध आदेश जारी किया, उसके पास ऐसा करने का वैधानिक अधिकार नहीं था। यह भी तर्क दिया गया कि आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना और कंपनी को कोई कारण बताओ नोटिस जारी किए बिना पारित किया गया, जो प्रक्रियागत रूप से त्रुटिपूर्ण है।

FSSAI का पक्ष

FSSAI की ओर से केंद्र सरकार के स्थायी अधिवक्ता आशीष दीक्षित ने नियामक की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि प्रतिबंध आदेश जारी करने से पहले डाबर को सुधार संबंधी नोटिस दिया गया था। FSSAI का आरोप था कि डाबर के कुछ उत्पादों पर इस्तेमाल किए गए '100 प्रतिशत प्राकृतिक', '100 प्रतिशत शुद्ध', '100 प्रतिशत ऑर्गेनिक' और '100 प्रतिशत टेंडर नारियल पानी' जैसे दावे अस्पष्ट, सत्यापित न किए जा सकने वाले और उपभोक्ताओं को गुमराह करने की संभावना वाले थे। नियामक के अनुसार यह खाद्य सुरक्षा एवं मानक विज्ञापन तथा दावे विनियम, 2018 का उल्लंघन है।

ऑर्गेनिक लोगो पर भी विवाद

FSSAI ने डाबर हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर और डाबर ऑर्गेनिक हनी पर जैविक भारत लोगो के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई थी। नियामक का आरोप था कि इन उत्पादों के पास वैध FSSAI ऑर्गेनिक अनुमोदन नहीं था, जो खाद्य सुरक्षा एवं मानक जैविक खाद्य विनियम, 2017 का उल्लंघन है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में जैविक उत्पादों की लेबलिंग और प्रमाणन को लेकर नियामकीय कड़ाई बढ़ रही है।

आगे क्या होगा

मामले को शुरुआत में मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ के समक्ष तत्काल सुनवाई के लिए रखा गया था, जिसने इसे अनुमति दी। अब 24 अगस्त की सुनवाई में FSSAI और केंद्र सरकार को अपना जवाब दाखिल करना होगा। इस फैसले का असर उन तमाम एफएमसीजी कंपनियों पर भी पड़ सकता है जो अपने उत्पादों पर इसी तरह के दावे करती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन बिना कारण बताओ नोटिस और सुनवाई के तत्काल बिक्री प्रतिबंध लगाना प्राकृतिक न्याय के बुनियादी सिद्धांतों से टकराता है। गौरतलब है कि '100%' जैसे दावों की अस्पष्टता की समस्या केवल डाबर तक सीमित नहीं — देश की दर्जनों एफएमसीजी कंपनियाँ इसी तरह की भाषा इस्तेमाल करती हैं। 24 अगस्त की सुनवाई तय करेगी कि FSSAI के पास ऐसे एकतरफा आदेश जारी करने का वैधानिक आधार है या नहीं — और इसका जवाब पूरे उद्योग की लेबलिंग नीति को प्रभावित करेगा।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली हाईकोर्ट ने FSSAI के आदेश पर रोक क्यों लगाई?
न्यायमूर्ति अमित महाजन ने प्रथम दृष्टया माना कि FSSAI ने डाबर को सुनवाई का अवसर दिए बिना और कारण बताओ नोटिस जारी किए बिना प्रतिबंध आदेश पारित किया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है। इसी आधार पर अगली सुनवाई तक आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाई गई।
FSSAI ने डाबर के किन उत्पादों पर आपत्ति जताई थी?
FSSAI ने उन उत्पादों पर आपत्ति जताई जिन पर '100 प्रतिशत प्राकृतिक', '100 प्रतिशत शुद्ध', '100 प्रतिशत ऑर्गेनिक' और '100 प्रतिशत टेंडर नारियल पानी' जैसे दावे किए गए थे। इसके अलावा डाबर हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर और डाबर ऑर्गेनिक हनी पर जैविक भारत लोगो के इस्तेमाल पर भी आपत्ति थी।
FSSAI ने इन दावों को भ्रामक क्यों माना?
FSSAI के अनुसार ये दावे अस्पष्ट और सत्यापित न किए जा सकने वाले थे, जो खाद्य सुरक्षा एवं मानक विज्ञापन तथा दावे विनियम, 2018 का उल्लंघन करते हैं। नियामक का यह भी कहना था कि संबंधित उत्पादों के पास वैध FSSAI ऑर्गेनिक अनुमोदन नहीं था।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त को निर्धारित की है। तब तक FSSAI और केंद्र सरकार को नोटिस के जवाब में अपना पक्ष दाखिल करना होगा।
इस फैसले का अन्य एफएमसीजी कंपनियों पर क्या असर पड़ सकता है?
यह मामला एक मिसाल बन सकता है क्योंकि देश की कई एफएमसीजी कंपनियाँ अपने उत्पादों पर इसी तरह के '100%' दावे करती हैं। 24 अगस्त की सुनवाई में यदि FSSAI की कार्रवाई की वैधानिक सीमाएँ तय होती हैं, तो उसका असर पूरे उद्योग की लेबलिंग और विज्ञापन नीति पर पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले