17 अगस्त 2026
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दिल्ली आबकारी केस: हाई कोर्ट ने केजरीवाल-सिसोदिया को सीबीआई याचिका पर जवाब के लिए दिए 4 हफ्ते

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दिल्ली आबकारी केस: हाई कोर्ट ने केजरीवाल-सिसोदिया को सीबीआई याचिका पर जवाब के लिए दिए 4 हफ्ते

सारांश

दिल्ली हाई कोर्ट ने केजरीवाल और सिसोदिया को CBI की आरोपमुक्ति-विरोधी याचिका पर 4 हफ्ते में जवाब देने का अंतिम मौका दिया। अगली सुनवाई 5-6 अक्टूबर — अदालत ने साफ कहा, अब कोई स्थगन नहीं। आबकारी नीति मामला अब निर्णायक दौर में।

मुख्य बातें

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 17 अगस्त को अरविंद केजरीवाल व मनीष सिसोदिया को CBI याचिका पर जवाब के लिए 4 सप्ताह का अंतिम समय दिया।
अगली सुनवाई 5 और 6 अक्टूबर को; न्यायमूर्ति मनोज जैन ने आगे कोई स्थगन न देने का स्पष्ट निर्देश दिया।
निचली अदालत ने 27 फरवरी को 1,100+ पैराग्राफ के फैसले में सभी आरोपियों को बरी किया था, जिसे CBI ने चुनौती दी है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अधिक समय की माँग को 'बचकाना' बताया; सिसोदिया ने CBI की याचिका को जल्दबाजी में दायर बताया।
अवमानना कार्यवाही की सुनवाई 21 सितंबर को; केजरीवाल, सिसोदिया व संजय सिंह सहित अन्य AAP नेताओं को जवाब के लिए 4 सप्ताह का समय।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार, 17 अगस्त को कथित आबकारी नीति भ्रष्टाचार मामले में एक अहम आदेश सुनाया। अदालत ने आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक एवं दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया तथा अन्य अभियुक्तों को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की उस पुनरीक्षण याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया, जिसमें उन्हें मामले से आरोपमुक्त किए जाने के निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी गई है।

मुख्य घटनाक्रम

न्यायमूर्ति मनोज जैन ने स्पष्ट किया कि यह जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर है। उन्होंने मामले की अगली सुनवाई 5 और 6 अक्टूबर को निर्धारित की और आदेश दिया कि उस दिन सभी पक्षों की दलीलें एक साथ सुनी जाएंगी तथा आगे कोई स्थगन स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह मामला पहले न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ के समक्ष था, जिसे बाद में न्यायमूर्ति जैन के पास स्थानांतरित किया गया।

सीबीआई और बचाव पक्ष की दलीलें

सीबीआई की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने AAP नेताओं की ओर से अधिक समय देने के अनुरोध का कड़ा विरोध किया और इसे 'बचकाना' करार दिया। दूसरी ओर, सिसोदिया ने अपनी याचिका में तर्क दिया कि CBI ने निचली अदालत का फैसला आने के मात्र 4 घंटे के भीतर बिना समुचित विचार के पुनरीक्षण याचिका दायर कर दी। सिसोदिया के अनुसार, याचिका में यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि किस आरोपी के विरुद्ध किस साक्ष्य को नजरअंदाज किया गया।

निचली अदालत का फैसला और सीबीआई के आरोप

गौरतलब है कि 27 फरवरी को निचली अदालत ने 1,100 से अधिक पैराग्राफ के विस्तृत फैसले में CBI द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार मामले में सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया था। अपनी पुनरीक्षण याचिका में CBI ने आरोप लगाया है कि तत्कालीन AAP सरकार द्वारा लागू की गई आबकारी नीति में चुनिंदा शराब व्यापारियों को रिश्वत के बदले अनुचित लाभ पहुँचाने के लिए हेरफेर की गई थी।

अवमानना कार्यवाही का समानांतर मामला

इसी मामले से जुड़ी एक अलग कार्यवाही में 4 अगस्त को दिल्ली उच्च न्यायालय ने न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर दुदेजा की खंडपीठ के माध्यम से केजरीवाल, सिसोदिया, राज्यसभा सांसद संजय सिंह और अन्य AAP नेताओं के विरुद्ध स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की गई आपराधिक अवमानना कार्यवाही की सुनवाई 21 सितंबर तक स्थगित कर दी। यह कार्यवाही न्यायपालिका को कथित रूप से बदनाम करने वाली 'अपमानजनक और मानहानिकारक' सामग्री प्रसारित करने के आरोपों पर आधारित है। खंडपीठ ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि अवमानना संदर्भ का आधार बनने वाली सामग्री सभी प्रतिवादियों को डिजिटल रूप में उपलब्ध कराई जाए। अवमानना के आरोपियों को भी जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है।

आगे क्या होगा

CBI की पुनरीक्षण याचिका पर अगली सुनवाई 5-6 अक्टूबर को होगी, जबकि अवमानना मामले की सुनवाई 21 सितंबर को निर्धारित है। न्यायमूर्ति जैन के कड़े निर्देश यह संकेत देते हैं कि अदालत अब इस मामले को शीघ्र निपटाने के मूड में है। दिल्ली आबकारी नीति मामला — जो वर्षों से राजनीतिक और न्यायिक बहस का केंद्र रहा है — अब एक निर्णायक चरण में प्रवेश कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

100+ पैराग्राफ का विस्तृत फैसला और CBI की महज 4 घंटे में दायर पुनरीक्षण याचिका — यह विरोधाभास ही इस मामले की असली कहानी है। सवाल यह नहीं कि अदालत ने समय दिया या नहीं, बल्कि यह है कि क्या CBI के पास वाकई कोई ठोस नया आधार है जो निचली अदालत के सुविचारित फैसले को पलट सके। दिल्ली आबकारी मामला वर्षों से राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र रहा है, लेकिन अब जब अदालत ने 'अंतिम मौका' और 'कोई स्थगन नहीं' जैसे शब्दों का प्रयोग किया है, तो यह मामला जल्द ही अपने न्यायिक निष्कर्ष की ओर बढ़ सकता है — और उसका नतीजा दोनों पक्षों के लिए निर्णायक होगा।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली हाई कोर्ट ने केजरीवाल और सिसोदिया को 4 हफ्ते का समय क्यों दिया?
दिल्ली उच्च न्यायालय ने CBI की उस पुनरीक्षण याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए यह समय दिया, जिसमें निचली अदालत द्वारा केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य को आबकारी नीति मामले में आरोपमुक्त किए जाने को चुनौती दी गई है। न्यायमूर्ति मनोज जैन ने स्पष्ट किया कि यह अंतिम अवसर है और अगली सुनवाई 5-6 अक्टूबर को होगी।
दिल्ली आबकारी नीति मामले में निचली अदालत का फैसला क्या था?
27 फरवरी को निचली अदालत ने 1,100 से अधिक पैराग्राफ के विस्तृत फैसले में CBI द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार मामले में सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। इसी फैसले को CBI ने दिल्ली उच्च न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका के माध्यम से चुनौती दी है।
CBI ने आबकारी नीति मामले में क्या आरोप लगाए हैं?
CBI का आरोप है कि तत्कालीन AAP सरकार द्वारा लागू की गई आबकारी नीति में चुनिंदा शराब व्यापारियों को रिश्वत के बदले अनुचित लाभ पहुँचाने के लिए हेरफेर की गई थी। सिसोदिया ने जवाब में कहा कि CBI ने फैसले के 4 घंटे के भीतर बिना ठोस आधार स्पष्ट किए याचिका दायर की।
केजरीवाल और सिसोदिया के खिलाफ अवमानना कार्यवाही क्या है?
दिल्ली उच्च न्यायालय ने आबकारी नीति मामले के संदर्भ में न्यायपालिका को कथित रूप से बदनाम करने वाली सामग्री प्रसारित करने के आरोप में केजरीवाल, सिसोदिया, संजय सिंह और अन्य AAP नेताओं के विरुद्ध स्वतः संज्ञान लेकर आपराधिक अवमानना कार्यवाही शुरू की है। इस मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी।
आबकारी नीति मामले में आगे क्या होगा?
CBI की पुनरीक्षण याचिका पर अगली सुनवाई 5-6 अक्टूबर को निर्धारित है, जब सभी पक्षों की दलीलें एक साथ सुनी जाएंगी। न्यायमूर्ति जैन ने स्पष्ट कर दिया है कि आगे कोई स्थगन नहीं दिया जाएगा, जिससे यह मामला अब एक निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है।
राष्ट्र प्रेस
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