दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश: केजरीवाल-सिसोदिया को अवमानना दस्तावेज मिलेंगे, 21 सितंबर को अगली सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 4 अगस्त को आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक एवं पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, राज्यसभा सांसद संजय सिंह और अन्य AAP नेताओं के विरुद्ध चल रही स्वतः संज्ञान आपराधिक अवमानना कार्यवाही की सुनवाई 21 सितंबर तक स्थगित कर दी। यह कार्यवाही आबकारी नीति मामले से जुड़े कथित समन्वित सोशल मीडिया अभियान को लेकर शुरू की गई थी, जिस पर न्यायपालिका की छवि धूमिल करने का आरोप है।
दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश
न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर दुडेजा की खंडपीठ ने अदालत की रजिस्ट्री को आदेश दिया कि अवमानना संदर्भ का आधार बनने वाली सामग्री की डिजिटल प्रतियाँ संबंधित पक्षों को तत्काल उपलब्ध कराई जाएँ। केजरीवाल एवं अन्य AAP नेताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया था कि उन्हें अब तक संबंधित दस्तावेज प्राप्त नहीं हुए हैं।
खंडपीठ ने प्रस्तावित अवमाननाकर्ताओं को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय भी दिया। अदालत के आदेश में दर्ज किया गया कि केजरीवाल, सिसोदिया, दुर्गेश पाठक, संजय सिंह, विनय मिश्रा और सौरभ भारद्वाज को अवमानना नोटिस भेजा जा चुका है और वे अदालत में उपस्थित भी हो चुके हैं।
देवेश विश्वकर्मा को नया नोटिस
न्यायालय मित्र (एमिकस क्यूरी) और वरिष्ठ अधिवक्ता राजदीपा बेहुरा ने पीठ को सूचित किया कि AAP नेता देवेश विश्वकर्मा को अभी तक अवमानना नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है। इस पर खंडपीठ ने संबंधित थाना प्रभारी (SHO) के माध्यम से उन्हें नया नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि विश्वकर्मा दिए गए पते पर उपलब्ध न हों, तो SHO उनका वर्तमान पता पता लगाकर अवमानना सामग्री सहित नोटिस की तामील सुनिश्चित करे।
मामले की पृष्ठभूमि
यह आपराधिक अवमानना कार्यवाही न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की एकल पीठ के 14 मई के उस आदेश से उपजी है, जिसमें उन्होंने आबकारी नीति मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग (रिक्यूज़) करने से इनकार करने के बाद न्यायपालिका को निशाना बनाने वाले कथित सोशल मीडिया अभियान पर आपत्ति जताई थी। न्यायमूर्ति शर्मा ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि प्रस्तावित अवमाननाकर्ताओं की गतिविधियाँ अदालत की गरिमा कम करने, न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप करने और न्यायिक कार्यों के स्वतंत्र संचालन को प्रभावित करने के उद्देश्य से की गई प्रतीत होती हैं।
गौरतलब है कि बाद में न्यायमूर्ति शर्मा ने मुख्य आबकारी नीति मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया था। इसके पश्चात अब रद्द की जा चुकी आबकारी नीति से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की पुनरीक्षण याचिका — जो ट्रायल कोर्ट द्वारा केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य को राहत दिए जाने के आदेश को चुनौती देती है — न्यायमूर्ति मनोज जैन को सौंप दी गई।
आगे क्या होगा
इस मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को निर्धारित है। तब तक सभी प्रस्तावित अवमाननाकर्ताओं को दस्तावेज प्राप्त होने के बाद अपना जवाब दाखिल करना होगा। यह मामला ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब AAP के कई शीर्ष नेता आबकारी नीति से जुड़े अलग-अलग कानूनी मोर्चों पर पहले से ही घिरे हुए हैं।