4 अगस्त 2026
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दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश: केजरीवाल-सिसोदिया को अवमानना दस्तावेज मिलेंगे, 21 सितंबर को अगली सुनवाई

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दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश: केजरीवाल-सिसोदिया को अवमानना दस्तावेज मिलेंगे, 21 सितंबर को अगली सुनवाई

सारांश

दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य AAP नेताओं को आबकारी नीति से जुड़े अवमानना मामले में दस्तावेज देने का आदेश दिया और अगली सुनवाई 21 सितंबर तक टाल दी। मामला न्यायपालिका को निशाना बनाने के कथित सोशल मीडिया अभियान से जुड़ा है।

मुख्य बातें

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 4 अगस्त को आबकारी नीति अवमानना मामले की सुनवाई 21 सितंबर तक स्थगित की।
रजिस्ट्री को निर्देश — केजरीवाल , सिसोदिया सहित सभी प्रस्तावित अवमाननाकर्ताओं को अवमानना सामग्री की डिजिटल प्रतियाँ उपलब्ध कराई जाएँ।
सभी पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया।
AAP नेता देवेश विश्वकर्मा को अभी तक नोटिस नहीं मिला; SHO के ज़रिये नया नोटिस जारी करने का आदेश।
कार्यवाही न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा के 14 मई के आदेश पर आधारित, जिसमें न्यायपालिका-विरोधी कथित सोशल मीडिया अभियान पर आपत्ति जताई गई थी।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 4 अगस्त को आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक एवं पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, राज्यसभा सांसद संजय सिंह और अन्य AAP नेताओं के विरुद्ध चल रही स्वतः संज्ञान आपराधिक अवमानना कार्यवाही की सुनवाई 21 सितंबर तक स्थगित कर दी। यह कार्यवाही आबकारी नीति मामले से जुड़े कथित समन्वित सोशल मीडिया अभियान को लेकर शुरू की गई थी, जिस पर न्यायपालिका की छवि धूमिल करने का आरोप है।

दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश

न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर दुडेजा की खंडपीठ ने अदालत की रजिस्ट्री को आदेश दिया कि अवमानना संदर्भ का आधार बनने वाली सामग्री की डिजिटल प्रतियाँ संबंधित पक्षों को तत्काल उपलब्ध कराई जाएँ। केजरीवाल एवं अन्य AAP नेताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया था कि उन्हें अब तक संबंधित दस्तावेज प्राप्त नहीं हुए हैं।

खंडपीठ ने प्रस्तावित अवमाननाकर्ताओं को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय भी दिया। अदालत के आदेश में दर्ज किया गया कि केजरीवाल, सिसोदिया, दुर्गेश पाठक, संजय सिंह, विनय मिश्रा और सौरभ भारद्वाज को अवमानना नोटिस भेजा जा चुका है और वे अदालत में उपस्थित भी हो चुके हैं।

देवेश विश्वकर्मा को नया नोटिस

न्यायालय मित्र (एमिकस क्यूरी) और वरिष्ठ अधिवक्ता राजदीपा बेहुरा ने पीठ को सूचित किया कि AAP नेता देवेश विश्वकर्मा को अभी तक अवमानना नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है। इस पर खंडपीठ ने संबंधित थाना प्रभारी (SHO) के माध्यम से उन्हें नया नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।

अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि विश्वकर्मा दिए गए पते पर उपलब्ध न हों, तो SHO उनका वर्तमान पता पता लगाकर अवमानना सामग्री सहित नोटिस की तामील सुनिश्चित करे।

मामले की पृष्ठभूमि

यह आपराधिक अवमानना कार्यवाही न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की एकल पीठ के 14 मई के उस आदेश से उपजी है, जिसमें उन्होंने आबकारी नीति मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग (रिक्यूज़) करने से इनकार करने के बाद न्यायपालिका को निशाना बनाने वाले कथित सोशल मीडिया अभियान पर आपत्ति जताई थी। न्यायमूर्ति शर्मा ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि प्रस्तावित अवमाननाकर्ताओं की गतिविधियाँ अदालत की गरिमा कम करने, न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप करने और न्यायिक कार्यों के स्वतंत्र संचालन को प्रभावित करने के उद्देश्य से की गई प्रतीत होती हैं।

गौरतलब है कि बाद में न्यायमूर्ति शर्मा ने मुख्य आबकारी नीति मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया था। इसके पश्चात अब रद्द की जा चुकी आबकारी नीति से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की पुनरीक्षण याचिका — जो ट्रायल कोर्ट द्वारा केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य को राहत दिए जाने के आदेश को चुनौती देती है — न्यायमूर्ति मनोज जैन को सौंप दी गई।

आगे क्या होगा

इस मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को निर्धारित है। तब तक सभी प्रस्तावित अवमाननाकर्ताओं को दस्तावेज प्राप्त होने के बाद अपना जवाब दाखिल करना होगा। यह मामला ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब AAP के कई शीर्ष नेता आबकारी नीति से जुड़े अलग-अलग कानूनी मोर्चों पर पहले से ही घिरे हुए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह संकेत देता है कि न्यायिक स्वतंत्रता पर दबाव की धारणा कितनी गहरी हो चुकी है। AAP के लिए यह मामला इसलिए भी नाज़ुक है क्योंकि आबकारी नीति के आपराधिक और अवमानना — दोनों पहलू एक साथ अदालत में हैं। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर सुनवाई-तारीखों पर रुक जाती है; असली सवाल यह है कि क्या कथित सोशल मीडिया अभियान और पार्टी नेतृत्व के बीच प्रत्यक्ष कड़ी साबित हो पाएगी — जो अभी तक अदालत में स्थापित नहीं हुई है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली हाईकोर्ट में केजरीवाल और सिसोदिया के खिलाफ अवमानना मामला क्या है?
यह स्वतः संज्ञान आपराधिक अवमानना कार्यवाही है, जो आबकारी नीति मामले की सुनवाई के दौरान न्यायपालिका को निशाना बनाने वाले कथित समन्वित सोशल मीडिया अभियान के आधार पर शुरू की गई है। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा के 14 मई के आदेश के बाद खंडपीठ ने केजरीवाल, सिसोदिया, संजय सिंह और अन्य AAP नेताओं को नोटिस जारी किए थे।
अगली सुनवाई कब होगी और अब तक क्या हुआ?
अगली सुनवाई 21 सितंबर को निर्धारित है। 4 अगस्त को हुई सुनवाई में अदालत ने सभी प्रस्तावित अवमाननाकर्ताओं को अवमानना सामग्री की डिजिटल प्रतियाँ उपलब्ध कराने और जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय देने का आदेश दिया।
किन AAP नेताओं को अवमानना नोटिस मिला है?
अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, दुर्गेश पाठक, विनय मिश्रा और सौरभ भारद्वाज को नोटिस मिल चुका है और वे अदालत में पेश भी हो चुके हैं। AAP नेता देवेश विश्वकर्मा को अभी तक नोटिस नहीं मिला था, जिस पर अदालत ने SHO के माध्यम से नया नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने अवमानना कार्यवाही क्यों शुरू की थी?
न्यायमूर्ति शर्मा ने आबकारी नीति मामले की सुनवाई से रिक्यूज़ल से इनकार करने के बाद न्यायपालिका-विरोधी कथित सोशल मीडिया अभियान पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि संबंधित गतिविधियाँ अदालत की गरिमा कम करने और न्यायिक कार्यों के स्वतंत्र संचालन को प्रभावित करने के उद्देश्य से की गई प्रतीत होती हैं।
आबकारी नीति मामले में CBI की याचिका का क्या हुआ?
CBI की पुनरीक्षण याचिका — जो ट्रायल कोर्ट द्वारा केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य को राहत दिए जाने के आदेश को चुनौती देती है — न्यायमूर्ति मनोज जैन को सौंप दी गई है। यह याचिका अब रद्द की जा चुकी दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े भ्रष्टाचार मामले से संबंधित है।
राष्ट्र प्रेस
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