केजरीवाल के खिलाफ अवमानना कार्यवाही पर मनोज तिवारी बोले — 'कोई भी कानून से ऊपर नहीं'

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केजरीवाल के खिलाफ अवमानना कार्यवाही पर मनोज तिवारी बोले — 'कोई भी कानून से ऊपर नहीं'

सारांश

दिल्ली उच्च न्यायालय ने अरविंद केजरीवाल व AAP नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना कार्यवाही का आदेश दिया — आबकारी मामले में न्यायपालिका पर कथित हमलों को लेकर। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने इसे 'जवाबदेही की शुरुआत' बताया।

मुख्य बातें

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 14 मई 2026 को अरविंद केजरीवाल व अन्य AAP नेताओं के विरुद्ध आपराधिक अवमानना कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया।
कार्यवाही का आधार — दिल्ली आबकारी नीति मामले में न्यायपालिका के खिलाफ कथित आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट और सार्वजनिक बयान।
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि ये बयान निष्पक्ष आलोचना और आपराधिक अवमानना के बीच की सीमा पार कर गए।
भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे न्यायपालिका की गरिमा की रक्षा बताया।
तिवारी ने आरोप लगाया कि AAP ने संपादित वीडियो और मानहानिकारक पत्रों के ज़रिये न्यायाधीशों को जान-बूझकर बदनाम करने का अभियान चलाया।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 14 मई 2026 को आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल सहित पार्टी के कई शीर्ष नेताओं के विरुद्ध आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया। यह कदम दिल्ली आबकारी नीति मामले के संदर्भ में न्यायपालिका के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर उठाया गया है। इस फैसले का उत्तर-पूर्वी दिल्ली के भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद मनोज तिवारी ने खुलकर स्वागत किया।

न्यायालय का आदेश: क्या है पूरा मामला

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने अवमानना कार्यवाही का आदेश देते हुए कहा कि मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने से इनकार करने के बाद उनके विरुद्ध सोशल मीडिया पर प्रसारित पोस्ट, वीडियो और सार्वजनिक बयान, निष्पक्ष आलोचना की सीमा को लाँघकर आपराधिक अवमानना की श्रेणी में आ गए हैं। न्यायालय के अनुसार, ये सामग्री न्यायपालिका की गरिमा और स्वतंत्रता को क्षति पहुँचाने वाली थी।

मनोज तिवारी की प्रतिक्रिया

सांसद तिवारी ने कहा कि इस कार्रवाई से एक स्पष्ट संदेश जाता है कि चाहे कोई कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो या खुद को 'आम आदमी' कहता रहे, वह कानून और न्यायपालिका की गरिमा से ऊपर नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि AAP नेताओं ने सम्मानित न्यायाधीशों को निशाना बनाते हुए झूठ, संपादित वीडियो, मानहानिकारक पत्र और सुनियोजित सोशल मीडिया अभियान के ज़रिये न्यायपालिका को डराने और बदनाम करने की कोशिश की।

तिवारी ने कहा, 'यह आलोचना नहीं है — यह न्यायपालिका को जान-बूझकर बदनाम करने का प्रयास है।' उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों ने दिल्ली आबकारी नीति घोटाले में भ्रष्टाचार को बचाने के लिए झूठ फैलाया, उन्हें अब अपने कार्यों के परिणाम भुगतने होंगे।

जवाबदेही और संविधान की रक्षा का दावा

भाजपा सांसद ने कहा कि आपराधिक अवमानना की कार्यवाही महज एक कानूनी औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह उन लोगों के लिए जवाबदेही की शुरुआत है जो राजनीतिक सत्ता की आड़ में न्यायाधीशों को बेदाग बदनाम करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा संविधान की पवित्रता और न्यायपालिका की स्वतंत्रता के पक्ष में खड़ी रही है।

तिवारी ने दिल्ली के नागरिकों से अपील की कि AAP का असली चेहरा अब उजागर हो चुका है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त शासन के लिए प्रतिबद्ध है, जहाँ कानून की नज़र में हर नागरिक बराबर है।

आगे क्या होगा

अब दिल्ली उच्च न्यायालय में आपराधिक अवमानना की औपचारिक सुनवाई होगी, जिसमें केजरीवाल और अन्य नामित AAP नेताओं को अपना पक्ष रखना होगा। यह मामला दिल्ली की राजनीति में न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच संबंधों की दृष्टि से एक महत्त्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो प्रक्रियागत जटिलता को रेखांकित करती है। भाजपा की तत्काल और मुखर प्रतिक्रिया इस मुद्दे के राजनीतिक आयाम को दर्शाती है। असली प्रश्न यह है कि क्या यह कार्यवाही न्यायिक संस्थाओं की रक्षा का ठोस कदम है, या राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का एक और अध्याय — इसका उत्तर सुनवाई की प्रक्रिया और उसकी निष्पक्षता से मिलेगा।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली हाई कोर्ट ने केजरीवाल के खिलाफ अवमानना कार्यवाही क्यों शुरू की?
दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली आबकारी नीति मामले के संदर्भ में न्यायपालिका के खिलाफ कथित आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो और सार्वजनिक बयानों को आधार बनाकर अरविंद केजरीवाल व अन्य AAP नेताओं के विरुद्ध आपराधिक अवमानना कार्यवाही का आदेश दिया। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा के अनुसार, ये सामग्री निष्पक्ष आलोचना की सीमा से आगे जाकर अवमानना की श्रेणी में आती है।
आपराधिक अवमानना कार्यवाही का क्या अर्थ है?
आपराधिक अवमानना तब होती है जब कोई व्यक्ति न्यायालय की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाला कार्य करता है या न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश करता है। इसमें दोषी पाए जाने पर जुर्माना या कारावास का प्रावधान हो सकता है। अब केजरीवाल व अन्य नामित नेताओं को न्यायालय में अपना पक्ष रखना होगा।
मनोज तिवारी ने इस फैसले पर क्या कहा?
भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह जवाबदेही की शुरुआत है और कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है। उन्होंने AAP पर संपादित वीडियो और मानहानिकारक पत्रों के ज़रिये न्यायाधीशों को जान-बूझकर बदनाम करने का आरोप लगाया।
यह मामला दिल्ली आबकारी नीति से कैसे जुड़ा है?
दिल्ली आबकारी नीति घोटाले की जाँच और उससे जुड़ी न्यायिक कार्यवाहियों के दौरान AAP नेताओं पर न्यायाधीशों और न्यायपालिका के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने के आरोप लगे। इसी संदर्भ में अवमानना की कार्यवाही शुरू हुई।
अब आगे इस मामले में क्या होगा?
दिल्ली उच्च न्यायालय में आपराधिक अवमानना की औपचारिक सुनवाई होगी जिसमें केजरीवाल और अन्य नामित AAP नेताओं को अपना पक्ष प्रस्तुत करना होगा। न्यायालय के निर्णय के आधार पर आगे की कानूनी कार्यवाही तय होगी।
राष्ट्र प्रेस
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