दिल्ली हाईकोर्ट का 'आप' नेता गोपाल राय और पत्रकार सौरव दास को अवमानना नोटिस, 4 अगस्त को अगली सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली हाईकोर्ट ने 22 मई 2026 को आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता गोपाल राय और खोजी पत्रकार सौरव दास को आपराधिक अवमानना नोटिस जारी किया। आरोप है कि दोनों ने सोशल मीडिया पर न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा के विरुद्ध आपत्तिजनक और अवमाननापूर्ण सामग्री प्रसारित की, जो कथित आबकारी नीति भ्रष्टाचार मामले से जुड़ी बताई जा रही है।
मामले की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ता अशोक चैतन्य ने यह अवमानना याचिका दायर की थी। याचिका में AAP के राष्ट्रीय संयोजक एवं पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पार्टी नेता सौरभ भारद्वाज के विरुद्ध भी अवमानना कार्यवाही शुरू करने की माँग की गई थी। हालाँकि, न्यायमूर्ति नवीन चावला और रविंदर डुडेजा की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि केजरीवाल और भारद्वाज को उच्च न्यायालय पहले ही स्वतः संज्ञान अवमानना कार्यवाही में नोटिस जारी कर चुका है।
मुख्य घटनाक्रम
याचिका में आरोप लगाया गया है कि जब ट्रायल कोर्ट ने आबकारी नीति मामले में केजरीवाल और अन्य आरोपियों को राहत दी, तो केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने दिल्ली हाईकोर्ट में रिवीजन याचिका दायर की, जो न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा की पीठ के सामने सूचीबद्ध हुई। इसके बाद कथित तौर पर सोशल मीडिया पर एक 'समन्वित अभियान' चलाया गया, जिसमें न्यायाधीश पर पक्षपात और हितों के टकराव के गंभीर आरोप लगाए गए तथा उन्हें मामले से हटाने की कोशिश की गई।
अदालत के पूर्व आदेशों में यह दर्ज किया जा चुका है कि न्यायपालिका को बदनाम करने के उद्देश्य से चलाए गए ऐसे अभियान न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप और संस्था की गरिमा को ठेस पहुँचाने का प्रयास हैं — हालाँकि अदालत ने माना है कि आलोचना की एक सीमित सीमा स्वीकार्य है। उल्लेखनीय है कि बाद में न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने स्वयं इस मामले से अलग होने का निर्णय लिया और प्रकरण दूसरी पीठ को सौंप दिया गया।
अदालत के निर्देश
खंडपीठ ने नए और पूर्व दोनों अवमानना मामलों को एक साथ सुनने का आदेश दिया। नए पक्षकारों — गोपाल राय और सौरव दास — को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही, सोशल मीडिया पर मौजूद संबंधित सामग्री को सुरक्षित रखने के आदेश भी जारी किए गए हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता राजदीपा बेहुरा को अमीक्स क्यूरी (न्यायालय सहायक) नियुक्त किया गया है और उन्हें सभी संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
आगे क्या होगा
इस मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को निर्धारित की गई है। यह मामला न्यायपालिका पर सोशल मीडिया के प्रभाव और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमाओं को लेकर एक महत्त्वपूर्ण मिसाल बन सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब आबकारी नीति मामले से जुड़ी कानूनी कार्यवाहियाँ कई मोर्चों पर एक साथ चल रही हैं।