7 जुलाई 2026
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दिल्ली हाई कोर्ट ने अभिषेक शर्मा के व्यक्तित्व अधिकार मामले में सुनवाई 9 जुलाई तक टाली, स्क्रीनशॉट दाखिल करने के निर्देश

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दिल्ली हाई कोर्ट ने अभिषेक शर्मा के व्यक्तित्व अधिकार मामले में सुनवाई 9 जुलाई तक टाली, स्क्रीनशॉट दाखिल करने के निर्देश

सारांश

दिल्ली हाई कोर्ट ने क्रिकेटर अभिषेक शर्मा के व्यक्तित्व अधिकार मामले में स्क्रीनशॉट के अभाव में सुनवाई टाली। अदालत ने कहा — मानहानि और व्यक्तित्व अधिकारों के बीच रेखा पतली है। अगली सुनवाई 9 जुलाई को होगी।

मुख्य बातें

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 7 जुलाई को अभिषेक शर्मा के व्यक्तित्व अधिकार मामले की सुनवाई स्थगित की।
न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने उल्लंघनकारी यूआरएल के स्क्रीनशॉट संलग्न न होने के कारण आदेश देने से इनकार किया।
अदालत ने कहा कि मानहानि और व्यक्तित्व अधिकारों के बीच बेहद पतली रेखा है।
मेटा के वकील ने बताया कि प्रस्तुत 8 यूआरएल में से 2 एक्सेस नहीं हो रहे थे।
एक पोस्ट में शर्मा की मैनेजर को उनकी गर्लफ्रेंड बताया गया था; शर्मा के वकील ने एक अपलोड को एआई-निर्मित बताया।
अगली सुनवाई 9 जुलाई को निर्धारित; तब तक अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करना होगा।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारतीय क्रिकेटर अभिषेक शर्मा द्वारा दाखिल व्यक्तित्व अधिकार (पर्सनैलिटी राइट्स) संरक्षण याचिका पर 7 जुलाई को सुनवाई स्थगित कर दी, क्योंकि याचिका के साथ उल्लंघनकारी यूआरएल के स्क्रीनशॉट संलग्न नहीं किए गए थे। अदालत ने अगली सुनवाई 9 जुलाई के लिए निर्धारित की है। यह मामला एआई-निर्मित और कथित तौर पर मानहानिकारक कंटेंट को हटाने की माँग से जुड़ा है।

मुख्य घटनाक्रम

न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने मामले की संक्षिप्त सुनवाई की, लेकिन यह स्पष्ट होने पर कि याचिका में विवादित सामग्री के स्क्रीनशॉट शामिल नहीं हैं, उन्होंने बिना संबंधित सामग्री की जाँच किए कोई आदेश पारित करने से इनकार कर दिया। न्यायालय ने शर्मा के वकील को निर्देश दिया कि वे एक अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करें, जिसमें याचिका में उल्लिखित यूआरएल सूची से मेल खाते स्क्रीनशॉट संलग्न हों।

अदालत की टिप्पणी

न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि मानहानि (डिफेमेशन) और व्यक्तित्व अधिकारों के बीच की रेखा बेहद पतली है। अदालत के अनुसार, मानहानि से संबंधित विषय-वस्तु में व्यक्तित्व अधिकारों का तत्व भी स्वाभाविक रूप से शामिल हो सकता है — यह टिप्पणी भविष्य की कानूनी व्याख्या के लिहाज़ से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

मेटा की दलीलें

मेटा की ओर से पेश वकील वरुण पाठक ने अदालत को बताया कि शर्मा द्वारा प्रस्तुत आठ यूआरएल में से दो तक पहुँचा नहीं जा सका। उन्होंने यह भी कहा कि एक यूआरएल में पैपराजी द्वारा अपलोड की गई सामग्री है, जिसमें व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन नहीं हो सकता। हालाँकि, शर्मा के वकील ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि वह अपलोड एआई-निर्मित था। वकील ने यह भी बताया कि एक पोस्ट में शर्मा की मैनेजर को उनकी गर्लफ्रेंड बताया गया था।

मामले की पृष्ठभूमि

अभिषेक शर्मा ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर अपने व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा और उन्हें गलत ढंग से प्रस्तुत करने वाले कथित मानहानिकारक एवं एआई-जनित कंटेंट को हटाने की माँग की है। गौरतलब है कि शर्मा टी20 विश्व कप 2026 की चैंपियन भारतीय टीम का हिस्सा रहे हैं और इस समय इंग्लैंड में चल रही 5 टी20 मैचों की सीरीज़ में टीम इंडिया के साथ हैं।

क्या होगा आगे

अदालत के निर्देशानुसार, शर्मा के वकील को अगली सुनवाई से पहले विवादित सामग्री के स्क्रीनशॉट के साथ अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करना होगा। 9 जुलाई की सुनवाई में अदालत इन दस्तावेज़ों की जाँच के बाद आगे का आदेश दे सकती है। यह मामला भारत में एआई-जनित कंटेंट और सेलिब्रिटी व्यक्तित्व अधिकारों के विधिक संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

आने वाले फैसलों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। यह प्रक्रियागत देरी — महज स्क्रीनशॉट न होने के कारण — यह भी दर्शाती है कि डिजिटल साक्ष्य प्रस्तुति में भारतीय अदालतों की अपेक्षाएँ अब पहले से कहीं अधिक सटीक हो रही हैं।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिषेक शर्मा ने दिल्ली हाई कोर्ट में क्या याचिका दाखिल की है?
अभिषेक शर्मा ने अपने व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा और उन्हें गलत तरीके से प्रस्तुत करने वाले कथित मानहानिकारक एवं एआई-निर्मित कंटेंट को हटाने की माँग के साथ दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की है। याचिका में मेटा सहित अन्य पक्षों को भी शामिल किया गया है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने 7 जुलाई को सुनवाई क्यों टाली?
अदालत ने पाया कि याचिका के साथ उल्लंघनकारी यूआरएल के स्क्रीनशॉट संलग्न नहीं थे। न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने संबंधित सामग्री की जाँच किए बिना कोई आदेश पारित करने से इनकार कर दिया और अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
मेटा ने अदालत में क्या कहा?
मेटा के वकील वरुण पाठक ने बताया कि शर्मा द्वारा दिए गए आठ यूआरएल में से दो एक्सेस नहीं हो रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि एक यूआरएल में पैपराजी-अपलोडेड कंटेंट है, जिसमें व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन नहीं हो सकता — हालाँकि शर्मा के वकील ने उसे एआई-निर्मित बताया।
अदालत ने मानहानि और व्यक्तित्व अधिकारों पर क्या टिप्पणी की?
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि मानहानि और व्यक्तित्व अधिकारों के बीच बेहद पतली रेखा है, और मानहानि से जुड़ी विषय-वस्तु में व्यक्तित्व अधिकारों का तत्व भी शामिल हो सकता है। यह टिप्पणी इस क्षेत्र में भविष्य की कानूनी व्याख्या के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
अगली सुनवाई 9 जुलाई को निर्धारित है। तब तक शर्मा के वकील को विवादित कंटेंट के स्क्रीनशॉट के साथ अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करना होगा।
राष्ट्र प्रेस
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