सलमान खान की 'काला हिरण' फिल्म याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई टली, अगली तारीख 1 जुलाई
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान द्वारा फिल्म 'काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी' की रिलीज पर रोक लगाने की माँग को लेकर दायर याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने 20 जून 2025 को सुनवाई स्थगित कर दी और अगली तारीख 1 जुलाई निर्धारित की। फिल्म निर्माताओं को याचिका की पूरी प्रति न मिलने के कारण यह सुनवाई आगे बढ़ाई गई।
सुनवाई क्यों टली
अदालत में फिल्म निर्माताओं की ओर से तर्क दिया गया कि उन्हें सलमान खान की तरफ से दाखिल याचिका की पूरी प्रति अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई — केवल एक आवेदन की कॉपी दी गई है। इस पर न्यायमूर्ति मधु जैन ने सलमान खान के वकील को निर्देश दिया कि वे सुनिश्चित करें कि विपक्षी पक्ष को याचिका के सभी दस्तावेज़ समय पर उपलब्ध कराए जाएँ।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद उस फिल्म को लेकर है जो कथित तौर पर सलमान खान से जुड़े ब्लैकबक शिकार प्रकरण पर आधारित बताई जा रही है। सलमान खान का आरोप है कि इस फिल्म में उनके नाम, छवि और व्यक्तित्व का बिना अनुमति उपयोग किया गया है, जो उनके पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन है। याचिका में फिल्म की रिलीज, प्रमोशन और डिजिटल स्ट्रीमिंग — तीनों पर रोक की माँग की गई है।
इससे पहले की सुनवाई में अदालत ने फिल्म के निर्माता अमित जानी और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए जवाब माँगा था। सलमान खान ने यह याचिका प्रोड्यूसर अमित जानी, जानी फायरफॉक्स फिल्म्स, निर्देशक भरत श्रीनाटे, अक्षय पांडे और प्रोजेक्ट से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ दायर की है।
फिल्म में क्या है विवादित
फिल्म के फर्स्ट लुक और टीजर में सलमान खान से प्रेरित किरदार का नाम अयान खान रखा गया है, जिसे अभिनेता काशिफ इकबाल खान निभा रहे हैं। दर्शकों के अनुसार किरदार का लुक, चलने का अंदाज़ और हाव-भाव सलमान खान से काफी मेल खाते हैं। कथित तौर पर काशिफ इकबाल खान उसी तरह का ब्रेसलेट पहने नज़र आए जैसा सलमान खान पहनते हैं — जिसे याचिका में उनकी सार्वजनिक पहचान के अनधिकृत उपयोग का प्रमाण बताया गया है।
सोशल मीडिया और जनमत
फिल्म के टीजर के सामने आने के बाद से सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर बहस तेज़ है। एक वर्ग का मानना है कि यह फिल्म सलमान खान की छवि का स्पष्ट दोहन है, जबकि दूसरा वर्ग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला बता रहा है।
आगे क्या होगा
अब इस मामले में 1 जुलाई 2025 को दिल्ली उच्च न्यायालय में अगली सुनवाई होगी। उस तारीख तक फिल्म निर्माताओं को याचिका की पूरी प्रति मिलने के बाद अपना पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। यह मामला भारतीय सिनेमा में पर्सनैलिटी राइट्स की कानूनी सीमाओं को परिभाषित करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।