लवलीना बोरगोहेन का जन्मदिन पर गोल्ड: एशियन गेम्स 2026 में चीन को 5-0 से हराया
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय मुक्केबाज़ लवलीना बोरगोहेन ने 2 अक्टूबर 2026 को अपने 29वें जन्मदिन पर एशियन गेम्स 2026 में 75 किग्रा वर्ग के फाइनल में चीन की जियाई बाओ को 5-0 के सर्वसम्मत स्कोर से हराकर स्वर्ण पदक जीता। यह ऐतिहासिक जीत उन्हें मैरी कॉम के बाद एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारत की दूसरी महिला मुक्केबाज़ बनाती है।
मुकाबले का घटनाक्रम
लवलीना ने फाइनल के पहले राउंड में 3-2 के करीबी अंतर से बढ़त हासिल की। इसके बाद उन्होंने दूसरे और तीसरे राउंड में 4-1 के समान अंतर से जीत दर्ज करते हुए मुकाबले पर पूरी तरह दबदबा कायम किया। यह उनका एशियन गेम्स में दूसरा मेडल है — इससे पहले उन्होंने हांगझोऊ एशियाई खेल 2022 में सिल्वर मेडल जीता था।
लवलीना के जज़्बात: 'जीत ही एकमात्र विकल्प था'
स्वर्ण पदक जीतने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए लवलीना ने कहा, 'मैंने सोचा था कि मुझे अपने जन्मदिन पर खुद को गोल्ड मेडल गिफ्ट करना चाहिए। हार के बारे में एक सेकंड के लिए भी नहीं सोचा। यह बहुत मुश्किल फाइट थी, लेकिन मैं हमेशा सोच रही थी कि मुझे जीतना है।'
उन्होंने आखिरी राउंड की चुनौती का ज़िक्र करते हुए कहा, 'आखिरी राउंड बहुत मुश्किल था। विरोधी बहुत मजबूत थी। मैं उसके साथ पहली बार खेल रही थी, इसलिए मुझे कोई अंदाज़ा नहीं था कि वह कैसे खेलेगी। मैं खुद को मोटिवेट कर रही थी कि मुझे जीतना है — चाहे कुछ भी हो जाए।'
जापान से ख़ास रिश्ता: टोक्यो की यादें ताज़ा
लवलीना ने कहा, 'जापान मेरे लिए बहुत लकी है।' यह भावना बेवजह नहीं है — टोक्यो ओलंपिक 2020 में लवलीना ने जापान की धरती पर ही ब्रॉन्ज मेडल जीता था। छह साल बाद, उसी देश में आयोजित एशियन गेम्स में उन्होंने अपने करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल की। उन्होंने कहा, 'यह मेरा जन्मदिन था, और मैंने फाइट जीत ली — यह मुश्किल था, लेकिन मैंने मजबूती से जीत हासिल की।'
संघर्ष और वापसी की कहानी
लवलीना का यह स्वर्ण पदक केवल एक मुकाबले की जीत नहीं, बल्कि कई उतार-चढ़ावों को पार करने की दास्तान है। उन्होंने कहा, 'कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद ऐसा नहीं था। एक एथलीट की ज़िंदगी में बहुत सी चीजें होती हैं — हार और चोटें, जिन्हें हमें संभालना होता है और आगे बढ़ना होता है। यह गोल्ड मेडल मेरे लिए बहुत ज़रूरी था।'
गौरतलब है कि असम की इस मुक्केबाज़ ने राष्ट्रमंडल खेलों में सिल्वर और ओलंपिक में ब्रॉन्ज के बाद पहली बार किसी बड़ी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता है। यह उनके करियर की परिपक्वता और मानसिक दृढ़ता की मिसाल है।
आगे क्या
लवलीना ने जीत के तुरंत बाद कहा, 'मुझे नहीं पता कि मैं अपना गोल्ड कैसे सेलिब्रेट करूं। यह अभी-अभी खत्म हुआ है। मुझे यह मानने के लिए कुछ समय चाहिए कि मैं जीत गई हूं।' एशियन गेम्स गोल्ड के साथ, लवलीना अब 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक की प्रबल दावेदार के रूप में उभरी हैं।