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लवलीना बोरगोहेन कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 सेमीफाइनल में, स्वर्ण पदक और एशियन गेम्स गोल्ड पर नज़र

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लवलीना बोरगोहेन कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 सेमीफाइनल में, स्वर्ण पदक और एशियन गेम्स गोल्ड पर नज़र

सारांश

पिछले दो कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक से चूकने वाली लवलीना बोरगोहेन इस बार ग्लासगो में सीधे सेमीफाइनल में पहुँच गई हैं — और उनका निशाना सिर्फ पदक नहीं, स्वर्ण है। बेलफास्ट कैंप, बैक-टू-बैक टूर्नामेंट और कोच सेंटियागो का साथ — यह तैयारी पिछली बार से अलग दिखती है।

मुख्य बातें

लवलीना बोरगोहेन ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सेमीफाइनल में जगह बनाकर पदक पक्का किया।
पिछले दो कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक नहीं जीत पाई थीं; इस बार सीधे सेमीफाइनल में प्रवेश को मेहनत का फल बताया।
बेलफास्ट में 20 देशों के मुक्केबाजों के साथ ट्रेनिंग कैंप के बाद आत्मविश्वास में इज़ाफा।
कोच सेंटियागो (नीवा) की अगुआई में पूरी भारतीय मुक्केबाजी टीम से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद।
एशियन गेम्स में भी स्वर्ण पदक का लक्ष्य; कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स के बीच केवल एक महीने का अंतर।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 उद्घाटन समारोह में दूसरी बार भारत की ध्वजवाहक बनीं।

भारतीय मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सेमीफाइनल में जगह बनाकर कम से कम एक पदक सुनिश्चित कर लिया है। ग्लासगो में 24 जुलाई को मीडिया से बातचीत में लवलीना ने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य अब पदक नहीं, बल्कि स्वर्ण पदक है। इस जीत के साथ वह इस टूर्नामेंट में भारत की सबसे चर्चित मुक्केबाज बन गई हैं।

सेमीफाइनल में पहुँचना 'हैरानी भरा' रहा

लवलीना ने कहा, 'मैंने नहीं सोचा था कि मुझे पहले ही सेमीफाइनल में क्वालीफिकेशन मिल जाएगी। मेरे लिए भी यह हैरानी भरा था।' उन्होंने बताया कि पिछले दो कॉमनवेल्थ गेम्स में वह पदक नहीं जीत सकी थीं। इस बार सीधे सेमीफाइनल में जगह मिलने को वह अपनी कठिन मेहनत का परिणाम मान रही हैं।

पेरिस ओलंपिक के बाद खेल में आया बदलाव

पेरिस ओलंपिक के बाद अपनी तैयारी पर लवलीना ने कहा, 'मेरे खेल में बहुत बदलाव आया है। मैंने कई टूर्नामेंट में हिस्सा लिया — वर्ल्ड चैंपियनशिप भी खेला। बैक-टू-बैक कंपटिशन मिला और हर जगह मेरा प्रदर्शन अच्छा रहा।' गौरतलब है कि यह निरंतर प्रतिस्पर्धा उनके आत्मविश्वास की बड़ी वजह बनी है।

बेलफास्ट ट्रेनिंग कैंप ने बढ़ाया हौसला

लवलीना ने बताया कि ग्लासगो आने से पहले बेलफास्ट में एक ट्रेनिंग कैंप आयोजित हुआ था, जिसमें 20 देशों के मुक्केबाज शामिल थे। उन्होंने कोच सेंटियागो (नीवा) की सराहना करते हुए कहा, 'सेंटियागो सर बहुत ही अच्छे कोच हैं। टोक्यो ओलंपिक में भी वह हमारे साथ गए थे।' इस कैंप ने उनमें स्वर्ण पदक जीतने का आत्मविश्वास और मज़बूत किया।

एशियन गेम्स में भी गोल्ड का इरादा

लवलीना ने कहा कि आगामी एशियन गेम्स उनके लिए बेहद अहम है। पिछली बार उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा था, जब चीन की मुक्केबाज ने उन्हें हराया था — उसी मुक्केबाज ने बाद में ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने कहा, 'इस बार एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने की पूरी कोशिश करूंगी।' यह ध्यान देने योग्य है कि कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स के बीच केवल एक महीने का अंतर है, जो शारीरिक और मानसिक दोनों दृष्टि से एक बड़ी चुनौती है।

फ्लैग बियरर के रूप में दूसरी बार नेतृत्व

लवलीना ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की उद्घाटन समारोह में भारतीय दल की ध्वजवाहक के रूप में नेतृत्व किया। उन्होंने बताया कि यह उनके लिए दूसरा मौका था — इससे पहले वह एशियन गेम्स में भी फ्लैग बियरर रह चुकी हैं। पूरी भारतीय मुक्केबाजी टीम के बेहतर प्रदर्शन का भरोसा जताते हुए लवलीना ने कहा कि इस बार टीम का आत्मविश्वास उच्च स्तर पर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फॉर्म में भी हैं। असली सवाल यह है कि एक महीने के अंतराल में कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स दोनों में स्वर्ण पदक जीतना शारीरिक रूप से कितना संभव होगा — यह परीक्षा उनके करियर की सबसे कठिन हो सकती है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लवलीना बोरगोहेन कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कहाँ तक पहुँची हैं?
लवलीना बोरगोहेन कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के सेमीफाइनल में पहुँच गई हैं, जिससे उनका कम से कम एक पदक सुनिश्चित हो गया है। वह ग्लासगो में भारतीय मुक्केबाजी दल का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।
लवलीना बोरगोहेन का अगला लक्ष्य क्या है?
लवलीना ने स्पष्ट किया है कि उनका लक्ष्य कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीतना है। इसके अलावा वह आगामी एशियन गेम्स में भी गोल्ड जीतने की कोशिश करेंगी।
लवलीना बोरगोहेन ने एशियन गेम्स में पहले कैसा प्रदर्शन किया था?
पिछले एशियन गेम्स में लवलीना को रजत पदक मिला था, जब चीन की मुक्केबाज ने उन्हें हराया था। उसी मुक्केबाज ने बाद में ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता था।
लवलीना बोरगोहेन की कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 से पहले तैयारी कैसी रही?
ग्लासगो आने से पहले लवलीना बेलफास्ट में एक ट्रेनिंग कैंप में शामिल रहीं, जिसमें 20 देशों के मुक्केबाज थे। पेरिस ओलंपिक के बाद उन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप सहित कई बैक-टू-बैक टूर्नामेंट खेले और पदक जीते।
क्या लवलीना बोरगोहेन कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की ध्वजवाहक रही हैं?
हाँ, लवलीना बोरगोहेन ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की उद्घाटन समारोह में भारतीय दल की ध्वजवाहक के रूप में नेतृत्व किया। यह उनके लिए दूसरा मौका था — इससे पहले वह एशियन गेम्स में भी फ्लैग बियरर रह चुकी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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