कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: संतोष तमिलरासन का लक्ष्य — 49.06 सेकंड के पर्सनल बेस्ट के साथ देश को गर्व दिलाना
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय 400 मीटर हर्डलर संतोष कुमार तमिलरासन ने कहा है कि निरंतरता और आत्मविश्वास ने उन्हें ग्लासगो में आयोजित हो रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए भारतीय दल में जगह दिलाई है। 28 वर्षीय तमिलनाडु के इस एथलीट का इस सीजन का सफर उल्लेखनीय रहा है — और अब उनकी नज़रें ट्रैक पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देकर देश को गर्वान्वित करने पर टिकी हैं।
शानदार सीजन से बनी पहचान
संतोष तमिलरासन ने 2026 के सीजन में अपना पर्सनल बेस्ट 49.06 सेकंड तक सुधारा और तिरुवनंतपुरम में इंडियन एथलेटिक्स सीरीज जीतकर साल की शुरुआत की। इसके बाद एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 400 मीटर हर्डल में कांस्य पदक और मिक्स्ड 4x400 मीटर रिले में स्वर्ण पदक जीता। गौरतलब है कि वे पेरिस 2024 ओलंपिक में भारत की 4x400 मीटर रिले टीम के सदस्य भी रह चुके हैं, जिससे उनका अंतरराष्ट्रीय अनुभव और पुख्ता हुआ है।
एथलीट की मानसिकता: प्रक्रिया पर भरोसा
संतोष ने अपने हालिया सफर पर कहा, 'एक एथलीट के तौर पर पिछले दो साल मेरे लिए बहुत ज़रूरी रहे हैं। ओलंपिक में हिस्सा लेने और फिर एशियन चैंपियनशिप में अच्छा प्रदर्शन करने से मुझे बहुत आत्मविश्वास मिला है। हर चैंपियनशिप एक नई शुरुआत होती है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि परिणाम से ज़्यादा वे अपनी रेस पर ध्यान देना चाहते हैं — 'अगर मैं अपनी रेस को तैयारी के मुताबिक कर पाया तो अपने प्रदर्शन से खुश होऊंगा।'
लगातार सुधार को लेकर उन्होंने कहा, 'हर सीजन आपको कुछ नया सिखाता है। इस साल मैं अपनी टाइमिंग में सुधार कर पाया हूं और लगातार अच्छा प्रदर्शन कर पाया हूं। रेस खत्म होने के बाद मैं पर्सनल बेस्ट के बारे में ज़्यादा नहीं सोचता — लक्ष्य हमेशा सुधार करते रहना है।'
इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट की भूमिका
संतोष ने अपनी तैयारियों में इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट के योगदान को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, 'इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट में समय बिताने से मुझे हर एरिया में सुधार करने में मदद मिली है — चाहे वह तकनीकी काम हो, स्ट्रेंथ या कंडीशनिंग हो, रिकवरी हो या स्पोर्ट्स साइंस हो।' उनके अनुसार, इस स्तर पर छोटे-छोटे सुधार ही सबसे बड़ा फर्क लाते हैं और हाई-परफॉर्मेंस सेंटर के कोच व सपोर्ट स्टाफ का निरंतर मार्गदर्शन उन्हें प्रतियोगिता के लिए पूरी तरह तैयार रखता है।
देश के लिए दौड़ने का जज़्बा
संतोष ने राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व के भाव को शब्दों में पिरोते हुए कहा, 'भारत का प्रतिनिधित्व करना किसी भी एथलीट के लिए हमेशा गर्व की बात होती है। हर बार जब मैं इंडियन कलर पहनकर ट्रैक पर उतरता हूं, तो मुझे पता होता है कि मैं खुद से कहीं बड़ी चीज़ के लिए मुकाबला कर रहा हूं।' उन्होंने अपने परिवार, कोच और सहयोगियों का आभार जताते हुए कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स में उनका एकमात्र मकसद ट्रैक पर अपना सब कुछ देना और देश को गर्व महसूस कराना है।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय एथलेटिक्स अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी उपस्थिति मज़बूत कर रहा है। ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में संतोष तमिलरासन का प्रदर्शन न केवल उनके व्यक्तिगत करियर की दिशा तय करेगा, बल्कि भारतीय 400 मीटर हर्डल स्पर्धा के भविष्य का भी संकेत देगा।