कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: भारत के 400 मीटर धावकों ने बताया — ग्लासगो एशियन गेम्स से ज़्यादा कड़ा क्यों
सारांश
मुख्य बातें
भारत के शीर्ष 400 मीटर धावकों ने स्पष्ट किया है कि 23 जुलाई 2026 से ग्लासगो में शुरू हो रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का मुकाबला, सितंबर-अक्टूबर में आइची-नागोया में होने वाले एशियन गेम्स से कहीं अधिक कठिन होगा। ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसे मज़बूत प्रतिस्पर्धियों की उपस्थिति इस प्रतियोगिता को विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण बनाती है। भारत इस बार ग्लासगो में 32 सदस्यों की ट्रैक एंड फील्ड टीम उतारेगा।
आँकड़े जो बताते हैं असली फ़र्क
संख्याएँ इस तर्क को पुष्ट करती हैं। एशियन गेम्स 2023 में 400 मीटर का स्वर्ण पदक सऊदी अरब के यूसुफ अशरफी ने 45.55 सेकंड के समय से जीता था। इसके विपरीत, बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में जाम्बिया के मुजला समुकोंगा ने 44.66 सेकंड के समय से स्वर्ण पदक जीतकर अपने देश का राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा था। यह अंतर साफ़ दर्शाता है कि कॉमनवेल्थ मंच पर प्रतिस्पर्धा का स्तर एशियाई प्रतियोगिता से ऊँचा है।
विशाल थेन्नारासु कयालविझी की तैयारी और सोच
22 वर्षीय विशाल थेन्नारासु कयालविझी ग्लासगो में पुरुषों की 400 मीटर और मिक्स्ड 4x400 मीटर रिले दोनों स्पर्धाओं में भाग लेंगे। पोलैंड के स्पला में सरकार-प्रायोजित अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर के लिए रवाना होने से पूर्व उन्होंने कहा, 'कॉमनवेल्थ गेम्स मुश्किल हैं, अगर हम कड़ी मेहनत नहीं करते तो यह मुश्किल है। मैं यह नहीं कहूंगा कि यह नामुमकिन है — अगर हम अच्छी तरह तैयारी करें तो मेडल जीतना मुमकिन है। यह एक समंदर की तरह है और मुझे खुद को साबित करने का मौका चाहिए।'
टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) से जुड़े विशाल ने पिछले महीने रांची में फेडरेशन कप के दौरान 44.98 सेकंड का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था। इसी मई में गैबोरोन, बोत्सवाना में वर्ल्ड रिले में पुरुषों की 4x400 मीटर रिले में उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय 03:00.32 रहा। 4x400 मीटर मिक्स्ड रिले में उनका पर्सनल बेस्ट 03:14.81 सेकंड है, जो उन्होंने पिछले वर्ष चीन में वर्ल्ड रिले के दौरान दर्ज किया था।
जय कुमार का दोहरी चुनौती पर नज़रिया
20 वर्षीय जय कुमार ने भी माना कि दोनों बड़ी प्रतियोगिताओं के बीच कम समय का अंतर होने से दोनों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना कठिन हो जाता है। पिछले महीने फेडरेशन कप में उन्होंने 45.47 सेकंड का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ दर्ज किया। उन्होंने कहा, 'कॉमनवेल्थ गेम्स ज़्यादा मुश्किल हैं क्योंकि 400 मीटर में समय आमतौर पर 43–45 सेकंड के आसपास होता है, जबकि हाल के वर्षों में एशियन गेम्स में यह समय 45 सेकंड से अधिक रहा है।' जय पोलैंड के स्पाला में 45 दिन के प्रशिक्षण शिविर में भाग लेंगे।
धर्मवीर चौधरी की वापसी — एक सेकंड की छलाँग
4x400 मीटर पुरुष रिले में एशियन चैंपियनशिप 2025 के रजत पदक विजेता धर्मवीर चौधरी ने बताया कि साई एनसीओई तिरुवनंतपुरम में जमैकन कोच जेसन डॉसन की देखरेख में प्रशिक्षण ने उनके प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार किया है। धर्मवीर ने कहा, 'पिछले साल मेरी सबसे अच्छी टाइमिंग 46.6 सेकंड थी। अब मेरा पर्सनल बेस्ट 45.6 सेकंड है — पिछले सीज़न से पूरे एक सेकंड का सुधार।' उन्होंने एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) और कोच के प्रति आभार व्यक्त किया कि खराब टाइमिंग के बावजूद उन पर भरोसा बनाए रखा गया।
आगे की राह
भारत का 60 सदस्यीय दल — जिसमें 41 एथलीट, 19 कोच और सहायक स्टाफ शामिल हैं — पोलैंड के स्पला में अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर के लिए रवाना हो चुका है। ग्लासगो में मिलने वाली प्रतिस्पर्धा की कड़ी परीक्षा भारतीय धावकों को एशियन गेम्स के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार करने का काम करेगी — और यही इस दोहरी चुनौती का असली मक़सद है।