14 जुलाई 2026
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आईआरजीसी को आतंकी घोषित करने पर ईरान का ब्रिटेन को कड़ा जवाब, जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

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आईआरजीसी को आतंकी घोषित करने पर ईरान का ब्रिटेन को कड़ा जवाब, जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

सारांश

ब्रिटेन ने आईआरजीसी को राष्ट्रीय सुरक्षा खतरा घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की तो ईरान ने तीखा जवाब दिया — जवाबी कार्रवाई की चेतावनी के साथ। यह कदम पश्चिम एशिया में पहले से गहराते तनाव के बीच ब्रिटेन-ईरान संबंधों में नए टकराव का संकेत है।

मुख्य बातें

ईरान के विदेश मंत्रालय ने 14 जुलाई 2025 को ब्रिटेन के आईआरजीसी को आतंकी घोषित करने के कदम की कड़ी निंदा की।
ईरान ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जवाबी कार्रवाई का अधिकार जताया।
ब्रिटिश सरकार आईआरजीसी और दो अन्य संगठनों को राष्ट्रीय सुरक्षा खतरा घोषित करने की प्रक्रिया में है; दोषी पाए जाने पर अधिकतम सजा उम्रकैद ।
यह कदम टेररिज्म एक्ट 2000 के तहत है और पहले से लागू प्रतिबंधों से अलग एक नई कानूनी श्रेणी है।
ईरान ने ब्रिटेन पर पश्चिम एशिया में हस्तक्षेप और अमेरिका-इजरायल की कार्रवाइयों में मिलीभगत का आरोप लगाया।

ईरान के विदेश मंत्रालय ने 14 जुलाई 2025 को ब्रिटेन के उस फैसले की तीखी निंदा की, जिसमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। तेहरान ने स्पष्ट किया कि वह इस कदम के जवाब में समान कार्रवाई करने का अधिकार रखता है, और इस फैसले के राजनीतिक, कानूनी एवं कूटनीतिक परिणामों की संपूर्ण जिम्मेदारी ब्रिटिश सरकार की होगी।

ईरान का आधिकारिक बयान

ईरान के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, 'ईरान इंग्लैंड के उस कदम की निंदा करता है, जिसमें उसने ईरान के इस्लाम के रक्षकों को आतंकवादी करार दिया है। ईरान के खिलाफ इस विरोधी फैसले का आधार बेबुनियाद सुरक्षा दावे बनाए गए हैं। इंग्लैंड खुद आतंकवादी और हिंसक नेटवर्कों और समूहों को शरण और समर्थन देता है।' मंत्रालय ने इस कदम को 'दुश्मनी भरा, गलत और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन' बताया।

आईआरजीसी की भूमिका पर ईरान का पक्ष

ईरान के विदेश मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि आईआरजीसी ईरान के आधिकारिक सशस्त्र बलों का अभिन्न हिस्सा है, जो नियमित सेना के साथ मिलकर देश की सीमाओं, राष्ट्रीय संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा करता है। मंत्रालय ने विशेष रूप से दाएश (आईएसआईएस) जैसे संगठनों के विरुद्ध आईआरजीसी की लड़ाई का हवाला दिया और कहा कि क्षेत्रीय शांति एवं सुरक्षा में उसकी भूमिका सर्वविदित है।

ब्रिटेन पर ईरान के आरोप

ईरान ने कहा कि ब्रिटेन को दूसरे देशों पर आरोप लगाने का नैतिक अधिकार नहीं है, क्योंकि उसका पश्चिम एशिया सहित दुनिया के कई देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का लंबा इतिहास रहा है। साथ ही, ईरान ने कथित तौर पर आरोप लगाया कि हाल ही में अमेरिका और इजरायल की ईरान-विरोधी कार्रवाइयों में भी ब्रिटेन की मिलीभगत रही है। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला देते हुए जवाबी कदम उठाने का अधिकार जताया।

ब्रिटेन का फैसला और उसके निहितार्थ

ब्रिटिश सरकार ने सोमवार को घोषणा की कि वह आईआरजीसी और दो अन्य संगठनों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा घोषित करने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर रही है। यह कदम टेररिज्म एक्ट 2000 के तहत किसी संगठन को आतंकवादी घोषित करने की मौजूदा व्यवस्था से अलग है — हालाँकि ब्रिटेन पहले ही पूरे आईआरजीसी पर प्रतिबंध लगा चुका है। यदि यह फैसला लागू हो जाता है, तो इन संगठनों की ब्रिटेन से जुड़ी गतिविधियों में सहयोग, समर्थन या जानबूझकर आर्थिक लाभ लेना अपराध माना जाएगा, जिसमें कुछ मामलों में अधिकतम सजा उम्रकैद तक हो सकती है। तीनों संगठनों की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

आगे की स्थिति

यह टकराव ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव पहले से ही चरम पर है। गौरतलब है कि यूरोपीय देश लंबे समय से आईआरजीसी को आतंकी सूची में डालने के अमेरिकी दबाव में रहे हैं। ब्रिटेन का यह कदम उस दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि तेहरान किस रूप में अपनी 'जवाबी कार्रवाई' को अंजाम देता है — कूटनीतिक, कानूनी या किसी और स्तर पर।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सोची-समझी कानूनी बढ़त है — आईआरजीसी को पहले से प्रतिबंधित सूची से उठाकर 'आतंकी संगठन' की श्रेणी में लाना, जिससे उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान जुड़ जाता है। सवाल यह है कि क्या यह वास्तव में सुरक्षा नीति है या अमेरिका और इजरायल के साथ कूटनीतिक तालमेल का हिस्सा — जैसा ईरान आरोप लगाता है। ईरान की 'जवाबी कार्रवाई' की धमकी अस्पष्ट जरूर है, लेकिन तेहरान के पास ब्रिटिश हितों को प्रभावित करने के कई कूटनीतिक और क्षेत्रीय उपकरण हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है, वह यह है कि यूरोपीय संघ ने अब तक आईआरजीसी को आतंकी सूची में नहीं डाला है — ब्रिटेन का एकतरफा कदम ब्रेक्जिट के बाद की विदेश नीति की स्वतंत्र दिशा को भी रेखांकित करता है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिटेन ने आईआरजीसी के बारे में क्या फैसला किया है?
ब्रिटिश सरकार ने आईआरजीसी और दो अन्य संगठनों को टेररिज्म एक्ट 2000 के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की है। यह पहले से लागू प्रतिबंधों से अलग एक नई कानूनी श्रेणी है, जिसमें दोषी पाए जाने पर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।
ईरान ने ब्रिटेन के इस फैसले पर क्या प्रतिक्रिया दी?
ईरान के विदेश मंत्रालय ने इस कदम को 'दुश्मनी भरा, गलत और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन' बताते हुए कड़ी निंदा की। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत जवाबी कार्रवाई का अधिकार जताया और कहा कि इस फैसले के परिणामों की जिम्मेदारी ब्रिटिश सरकार की होगी।
आईआरजीसी क्या है और ईरान इसे क्यों महत्वपूर्ण मानता है?
आईआरजीसी (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स) ईरान के आधिकारिक सशस्त्र बलों का एक प्रमुख हिस्सा है। ईरान के अनुसार यह संगठन नियमित सेना के साथ मिलकर देश की सीमाओं, संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा करता है, और दाएश (आईएसआईएस) जैसे समूहों के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुका है।
ब्रिटेन के इस फैसले के क्या व्यावहारिक परिणाम होंगे?
यदि यह फैसला लागू होता है, तो आईआरजीसी की ब्रिटेन से जुड़ी गतिविधियों में सहयोग, समर्थन या आर्थिक लाभ लेना अपराध माना जाएगा। कुछ मामलों में अधिकतम सजा उम्रकैद तक हो सकती है।
क्या ब्रिटेन ने पहले भी आईआरजीसी पर कोई कार्रवाई की है?
हाँ, ब्रिटेन पहले ही पूरे आईआरजीसी पर प्रतिबंध लगा चुका है। लेकिन नया कदम टेररिज्म एक्ट 2000 के तहत 'आतंकी संगठन' घोषित करने की अलग और अधिक कठोर कानूनी प्रक्रिया है, जो पहले के प्रतिबंधों से अधिक गंभीर दंडात्मक प्रावधान रखती है।
राष्ट्र प्रेस
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