ईरान के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई का दावा: देश की सैन्य क्षमताएं क्षेत्रीय शांति की रक्षक, आत्मरक्षा पर कोई समझौता नहीं
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने 26 जून 2026 को क्षेत्रीय सुरक्षा और आत्मरक्षा के मुद्दे पर तेहरान का आधिकारिक रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि ईरान की सैन्य क्षमताएं न केवल देश की रक्षा के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए अनिवार्य हैं। उन्होंने पड़ोसी देशों की नीतियों और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती हथियारों की होड़ पर कड़े सवाल उठाए।
एक्स पर बाघेई का बयान
बाघेई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'इसमें कोई शक नहीं है कि क्षेत्र की सामूहिक सुरक्षा के लिए ईरान किसी भी दूसरे पक्ष से ज़्यादा प्रतिबद्ध है।' उन्होंने खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि परिषद यह मानती है कि सुरक्षा का समाधान उस देश से माँगने में है जो खुद सबसे बड़ा खतरा पैदा करता है, तो यह 'अपने असली लक्ष्य से भटकने और हाल के बुरे अनुभवों से सबक न सीखने का निराशाजनक संकेत है।'
दक्षिणी पड़ोसियों पर सवाल
बाघेई ने अपने दक्षिणी पड़ोसी देशों से कई तीखे सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि इन देशों ने अपने मुस्लिम पड़ोसी के खिलाफ आक्रामक कदम क्यों उठाए और अच्छे पड़ोसी के संबंधों के सिद्धांत तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के बुनियादी नियमों का उल्लंघन क्यों किया। उन्होंने यह भी पूछा कि इन देशों ने अपनी ज़मीन का उपयोग ईरान के विरुद्ध मिसाइल हमलों के लिए क्यों होने दिया।
प्रवक्ता ने आगे सवाल उठाया कि ये देश सैकड़ों अरब डॉलर के आधुनिक हथियार क्यों खरीदते और जमा करते हैं, जबकि उनके लिए कोई स्पष्ट रक्षात्मक ज़रूरत दिखाई नहीं देती। उन्होंने इसे विनाशकारी हथियारों की होड़ को बढ़ावा देने के रूप में वर्णित किया।
इज़रायल के परमाणु हथियारों पर दोहरे मानदंड का आरोप
बाघेई ने आरोप लगाया कि खाड़ी देश फिलिस्तीनी, लेबनानी और सीरियाई क्षेत्रों पर इज़रायली कब्जे सहित क्षेत्र के देशों के खिलाफ इज़रायली कार्रवाई को अनदेखा करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इज़रायल के परमाणु हथियारों के भंडार पर, जो किसी भी अंतरराष्ट्रीय निगरानी के दायरे में नहीं है, चुप्पी साधी जाती है। इसके विपरीत, ईरान की 'सामान्य रक्षा क्षमताओं' को 'खतरा' बताया जाता है, जबकि ईरान बार-बार धमकियों और हमलों का सामना कर चुका है।
ईरान का आधिकारिक रुख
बाघेई ने स्पष्ट किया कि ईरान की सैन्य क्षमताएं ईरानी नागरिकों के उस स्वाभाविक अधिकार की रक्षा करती हैं, जिसके तहत वे हमलों और अपराधों के विरुद्ध अपनी सुरक्षा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा और सम्मान ऐसे मुद्दे हैं जिन पर कोई समझौता या शर्त स्वीकार नहीं की जा सकती। उनके अनुसार, 'जिस तरह आत्मरक्षा का बुनियादी अधिकार बहस का विषय नहीं हो सकता, उसी तरह इस रक्षा के साधनों को भी किसी के साथ सौदेबाजी के लिए नहीं रखा जा सकता।'
क्षेत्रीय संदर्भ और आगे की राह
यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है और ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता अनिश्चितता के दौर से गुज़र रही है। गौरतलब है कि GCC देश अमेरिका के साथ रक्षा साझेदारी को मज़बूत करने में जुटे हैं, जिसे तेहरान क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा मानता है। बाघेई का यह बयान ईरान की उस दीर्घकालिक नीति की पुनरावृत्ति है जिसमें वह अपनी सैन्य शक्ति को वार्ता की मेज़ पर रखने से इनकार करता रहा है।