27 जुलाई 2026
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ईरान पर पश्चिमी देशों का संयुक्त मोर्चा: IRGC और कुद्स फोर्स पर अस्थिरता फैलाने का आरोप

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ईरान पर पश्चिमी देशों का संयुक्त मोर्चा: IRGC और कुद्स फोर्स पर अस्थिरता फैलाने का आरोप

सारांश

20 से अधिक पश्चिमी देशों ने एकजुट होकर ईरान की IRGC, कुद्स फोर्स और खुफिया मंत्रालय पर विदेशी धरती पर हत्या, अपहरण और आतंक फैलाने के प्रयासों का आरोप लगाया है। वहीं ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने IAEA में अमेरिकी प्रस्ताव को राजनीतिक साजिश बताया — टकराव दो मोर्चों पर एक साथ तेज़ हो रहा है।

मुख्य बातें

अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और 18 से अधिक यूरोपीय देशों ने ईरान की सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त रूप से निंदा की।
IRGC की खुफिया इकाई, कुद्स फोर्स और मंत्रालय ऑफ इंटेलिजेंस एंड सिक्योरिटी पर यूरोप में हमलों का आरोप लगाया गया।
निशाने पर ईरानी असंतुष्ट , पत्रकार , यहूदी और इजरायली समुदाय बताए गए।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने IAEA बोर्ड के सदस्यों को पत्र लिखकर अमेरिकी प्रस्ताव को राजनीतिक बताया।
यह पत्र वियना में IAEA की जून तिमाही बैठक के दौरान भेजा गया।

अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और 18 से अधिक यूरोपीय देशों ने एक संयुक्त बयान में ईरान की सुरक्षा एजेंसियों — इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की खुफिया इकाई, कुद्स फोर्स और मंत्रालय ऑफ इंटेलिजेंस एंड सिक्योरिटी — पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अस्थिरता फैलाने और नागरिकों को निशाना बनाने का गंभीर आरोप लगाया है। यूएस डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट द्वारा जारी इस बयान में इन गतिविधियों की कड़ी निंदा की गई और ऐसे हमलों को तत्काल रोकने की माँग की गई।

किन देशों ने लगाए आरोप

संयुक्त बयान में शामिल देशों की सूची व्यापक है — अल्बानिया, बेल्जियम, बुल्गारिया, चेकिया, डेनमार्क, एस्टोनिया, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, आयरलैंड, लातविया, लिथुआनिया, नीदरलैंड, नॉर्थ मैसेडोनिया, नॉर्वे, पुर्तगाल, स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम इसमें शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में देशों का एकजुट होना इस बयान को कूटनीतिक दृष्टि से असाधारण बनाता है।

किन समुदायों को बताया गया निशाना

बयान के अनुसार, ईरानी सुरक्षा तंत्र द्वारा ईरानी असंतुष्टों, पत्रकारों, यहूदी तथा इजरायली समुदायों और उनसे जुड़े हितों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया। बयान में यूरोप में हाल ही में हुए उन हमलों का भी उल्लेख किया गया, जिन्हें कथित तौर पर 'हरकत अशाब अल-यमीन अल-इस्लामिया' ने अपने सहयोगियों के माध्यम से अंजाम दिया या उन्हें समर्थन दिया।

बयान में स्पष्ट किया गया कि किसी भी देश में नागरिकों को मारने, अगवा करने, परेशान करने, डराने या किसी भी प्रकार से हमला करने की कोशिशें राष्ट्रीय संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन हैं।

ईरान की प्रतिक्रिया

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मौजूदा तनाव के लिए अमेरिका को ज़िम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि अमेरिका की कार्रवाइयाँ उकसावे की नीति का हिस्सा हैं। इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अराघची ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों को एक पत्र भेजकर अपील की है कि वे IAEA को अमेरिका के राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल न होने दें।

यह पत्र उस समय भेजा गया जब IAEA बोर्ड की जून माह की तिमाही बैठक वियना में जारी थी। अराघची ने अमेरिका की ओर से तैयार किए गए प्रस्ताव को राजनीतिक मकसद से प्रेरित और गलत नीयत वाला बताया।

आपराधिक नेटवर्क से संबंध का आरोप

संयुक्त बयान में एक गंभीर आरोप यह भी लगाया गया कि ईरान की सरकार के सुरक्षा तंत्र के अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय आपराधिक समूहों से दीर्घकालिक संबंध रहे हैं। इन समूहों का उपयोग विदेशी धरती पर अभियान चलाने के लिए किया जाना, हस्ताक्षरकर्ता देशों के अनुसार, अत्यंत निंदनीय है।

आगे क्या होगा

हस्ताक्षरकर्ता देशों ने संकेत दिया है कि वे इन गतिविधियों को रोकने के लिए मिलकर और ठोस कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान तनाव एक बार फिर चरम पर है और IAEA बोर्ड में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बहस जारी है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस संयुक्त बयान से ईरान पर कूटनीतिक और आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि क्या यह बयान ठोस कार्रवाई की नींव है या महज़ सामूहिक नाराज़गी का प्रदर्शन। ईरान का IAEA में अमेरिकी प्रस्ताव को 'राजनीतिक हथियार' बताना यह दर्शाता है कि तेहरान अंतरराष्ट्रीय दबाव को वैधता देने से इनकार कर रहा है। गौरतलब है कि ईरान पर ऐसे आरोप नए नहीं हैं — पिछले एक दशक में कई यूरोपीय देशों में ईरान से जुड़े कथित ऑपरेशनों का भंडाफोड़ हो चुका है, फिर भी नीतिगत प्रतिक्रिया सीमित रही है। जब तक संयुक्त बयान के साथ समन्वित प्रतिबंध या कानूनी कार्रवाई नहीं जुड़ती, यह घोषणा भी पिछले बयानों की भाँति प्रभावहीन रह सकती है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किन देशों ने ईरान के खिलाफ संयुक्त बयान जारी किया?
अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूनाइटेड किंगडम और 18 यूरोपीय देशों — जिनमें फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन, नीदरलैंड, नॉर्वे आदि शामिल हैं — ने यह संयुक्त बयान जारी किया। यह बयान यूएस डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट द्वारा प्रकाशित किया गया।
ईरान की किन एजेंसियों पर आरोप लगाए गए हैं?
IRGC की खुफिया इकाई, कुद्स फोर्स और ईरान के मंत्रालय ऑफ इंटेलिजेंस एंड सिक्योरिटी पर विदेशी धरती पर हत्या, अपहरण, उत्पीड़न और अस्थिरता फैलाने की साजिशों का आरोप लगाया गया है। इन एजेंसियों पर अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय आपराधिक समूहों का उपयोग करने का भी आरोप है।
ईरान ने इन आरोपों पर क्या कहा?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मौजूदा तनाव के लिए अमेरिका को ज़िम्मेदार ठहराया है। उन्होंने IAEA बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य देशों को पत्र लिखकर अमेरिकी प्रस्ताव को राजनीतिक मकसद से प्रेरित और गलत नीयत वाला बताया।
IAEA बोर्ड की बैठक और ईरान विवाद का क्या संबंध है?
अराघची ने अपना पत्र उस समय भेजा जब IAEA बोर्ड की जून माह की तिमाही बैठक वियना में चल रही थी। ईरान नहीं चाहता कि IAEA को अमेरिका के दबाव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ इस्तेमाल किया जाए।
इस संयुक्त बयान का आगे क्या असर हो सकता है?
हस्ताक्षरकर्ता देशों ने ईरान की गतिविधियों को रोकने के लिए मिलकर और ठोस कदम उठाने की प्रतिबद्धता जताई है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे ईरान पर कूटनीतिक और संभावित आर्थिक दबाव बढ़ सकता है, विशेषकर IAEA में चल रही बहस के बीच।
राष्ट्र प्रेस
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