ईरान के विदेश मंत्री अराघची की आईएईए से अपील — अमेरिकी प्रस्ताव को बताया राजनीति से प्रेरित
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य देशों को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि वे इस संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था को एक बार फिर अमेरिका के राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल न होने दें। यह पत्र ऐसे समय भेजा गया है जब वियना में आईएईए बोर्ड की जून तिमाही बैठक जारी है और बुधवार को ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा निर्धारित है।
अमेरिकी प्रस्ताव पर ईरान की आपत्ति
इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अराघची ने बोर्ड के सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों को भेजे पत्र में अमेरिका की ओर से तैयार किए गए प्रस्ताव को 'राजनीतिक मकसद से प्रेरित और गलत नीयत वाला' करार दिया। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव हाल की घटनाओं के केवल नतीजों पर ध्यान केंद्रित करता है, जबकि मौजूदा स्थिति की मूल वजहों को जानबूझकर नज़रअंदाज़ करता है।
जून 2025 के हमलों का संदर्भ
अराघची ने जून 2025 में आईएईए बोर्ड द्वारा पारित एक प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए कहा कि उसके पारित होने के 24 घंटे के भीतर ही अमेरिका और इज़रायल ने ईरान की आईएईए निगरानी में मौजूद परमाणु सुविधाओं पर हमले किए थे, जिनमें कई ईरानी नागरिकों की मौत हुई थी। उनके अनुसार, जून 2025 के बाद से इन दोनों देशों ने ईरानी परमाणु सुविधाओं पर बार-बार हमले किए हैं और ईरानी परमाणु वैज्ञानिकों तथा उनके परिवारों की हत्याएँ भी की गई हैं।
अराघची ने कहा कि आईएईए के इतिहास में ऐसी घटनाएँ पहले कभी नहीं हुई हैं।
अंतरराष्ट्रीय कानून और परमाणु अप्रसार पर असर
ईरानी विदेश मंत्री ने चेतावनी दी कि इन कार्रवाइयों का अंतरराष्ट्रीय कानून, वैश्विक शांति और सुरक्षा, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और आईएईए की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या एजेंसी का फिर से इस्तेमाल ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के विरुद्ध आक्रामक कार्रवाई को वैधता देने के लिए किया जा रहा है।
बोर्ड के फैसलों का व्यापक प्रभाव
अराघची ने स्पष्ट किया कि बोर्ड के सदस्य जो निर्णय लेंगे, उनका असर केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा — बल्कि इससे आईएईए की विश्वसनीयता, उसकी स्वतंत्रता और परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के भविष्य पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने बोर्ड के सदस्य देशों से अपील की कि वे संस्था को किसी भी 'गैरकानूनी कार्रवाई को सही ठहराने' के लिए इस्तेमाल न होने दें।
गौरतलब है कि यह पत्र ऐसे समय आया है जब ईरान और पश्चिमी देशों के बीच परमाणु वार्ता को लेकर तनाव चरम पर है और वियना में बैठक के परिणाम पर दुनिया भर की नज़रें टिकी हैं।