ईरान-अमेरिका समझौते के बाद आईआरजीसी की चेतावनी: अधिकार कमज़ोर हुए तो हर मोर्चे पर देंगे ऐतिहासिक हार
सारांश
मुख्य बातें
ईरान-अमेरिका शांति समझौते पर हस्ताक्षर के बाद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने 19 जून को एक कड़ा बयान जारी करते हुए चेतावनी दी कि यदि अमेरिका अत्यधिक मांगें रखता है या ईरानी जनता के अधिकारों को कमज़ोर करने की कोशिश करता है, तो ईरान की सशस्त्र शक्तियाँ उसे पहले से भी बड़ी ऐतिहासिक हार देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह बयान तेहरान में उस समय आया जब समझौते को लेकर देश के भीतर और बाहर दोनों जगह तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं।
आईआरजीसी का बयान: क्या कहा गया
आईआरजीसी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि ईरान की सेना जमीन, समुद्र, हवा और हाइब्रिड युद्ध — सभी क्षेत्रों में पहले से कहीं अधिक मज़बूत स्थिति में है। बयान में कहा गया कि एक आदेश मिलते ही ईरान के दुश्मनों को निर्णायक और ऐतिहासिक हार देने की पूरी तैयारी है। आईआरजीसी के योद्धा देश के नेताओं के साथ पूरी दृढ़ता से खड़े हैं।
सर्वोच्च नेता का संदेश और उनकी स्वीकृति
समझौते पर हस्ताक्षर के बाद आयतुल्लाह सैयद मोजतबा खामेनेई ने गुरुवार को एक संदेश जारी किया जिसमें उन्होंने कहा, 'सिद्धांत रूप से मेरी राय अलग थी, लेकिन सम्मानित राष्ट्रपति की ओर से, सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के अध्यक्ष के रूप में, अपनी और अन्य सदस्यों की ओर से मुझे यह भरोसा दिलाया गया कि ईरानी राष्ट्र और रेजिस्टेंस फ्रंट के अधिकारों की रक्षा की जाएगी। इस संबंध में उन्होंने स्पष्ट रूप से जिम्मेदारी भी स्वीकार की। इसी आधार पर मैंने इसकी अनुमति दी।'
आईआरजीसी ने इस संदेश को 'बुद्धिमत्तापूर्ण' बताते हुए कहा कि इसने राष्ट्रीय एकता को और सुदृढ़ किया है तथा जनता व मोर्चों पर लड़ रहे सैनिकों को अपनी कठिन मेहनत से हासिल उपलब्धियों की रक्षा के लिए प्रेरित किया है।
युद्धक्षेत्र की उपलब्धियों का दावा
आईआरजीसी ने अपने बयान में दावा किया कि 'आक्रामक दुश्मन' ईरानी योद्धाओं की उल्लेखनीय उपलब्धियों के सामने युद्ध के मैदान में पहले ही पराजित हो चुका है। इसी आधार पर संगठन ने माँग की कि राजनीतिक क्षेत्र भी उसी 'गौरवशाली मार्ग' पर आगे बढ़े और अंततः ईरानी राष्ट्र के अधिकारों को सुनिश्चित करे।
यह ऐसे समय में आया है जब ईरान-अमेरिका वार्ता की शर्तों और भविष्य के क्रियान्वयन को लेकर ईरान के भीतर विभिन्न राजनीतिक और सैन्य खेमों में मतभेद कथित तौर पर बने हुए हैं।
समझौते की पृष्ठभूमि और संदर्भ
गौरतलब है कि ईरान और अमेरिका के बीच यह समझौता लंबे समय की कूटनीतिक प्रक्रिया के बाद संपन्न हुआ है। आईआरजीसी की यह चेतावनी संकेत देती है कि सैन्य प्रतिष्ठान समझौते की शर्तों पर बारीकी से नज़र रखेगा और किसी भी ऐसे कदम का विरोध करेगा जो ईरान की संप्रभुता या उसके नागरिकों के अधिकारों को प्रभावित करे।
आगे की राह
विश्लेषकों के अनुसार, आईआरजीसी का यह बयान समझौते के बाद की आंतरिक राजनीति का हिस्सा है, जिसमें सैन्य संस्था अपनी प्रासंगिकता और दबाव बनाए रखने की कोशिश कर रही है। आने वाले हफ्तों में समझौते के क्रियान्वयन की दिशा यह तय करेगी कि ईरान-अमेरिका संबंध किस रुख पर आगे बढ़ते हैं।