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ईरान डील पर सुसान राइस का हमला: 'बेहद खराब आत्मसमर्पण', ट्रंप प्रशासन ने किया खारिज

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ईरान डील पर सुसान राइस का हमला: 'बेहद खराब आत्मसमर्पण', ट्रंप प्रशासन ने किया खारिज

सारांश

ट्रंप का ईरान समझौता वॉशिंगटन में तूफान लेकर आया है। पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सुसान राइस ने इसे 'बेहद खराब आत्मसमर्पण' कहा — परमाणु सामग्री हटाने का कोई वादा नहीं, फिर भी ईरान को तेल बेचने और बैंकिंग पहुँच की छूट मिल गई। ट्रंप प्रशासन इसे सैन्य दबाव की जीत बताता है।

मुख्य बातें

पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सुसान राइस ने ट्रंप के ईरान समझौते को 'हैरान कर देने वाला और बेहद खराब आत्मसमर्पण' करार दिया।
राइस के अनुसार, अंतिम समझौते से पहले ही ईरान को तेल बिक्री, अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग और जमे धन की वापसी की अनुमति मिल गई।
समझौते में परमाणु सामग्री को ईरान से बाहर ले जाने का कोई प्रावधान नहीं।
ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा कि ईरान सैन्य दबाव के कारण कमज़ोर स्थिति में बातचीत के लिए आया।
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस स्विट्जरलैंड में ईरानी अधिकारियों से व्यापक समझौते पर वार्ता करने वाले हैं।

पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सुसान राइस ने रविवार, 21 जून को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान समझौते पर तीखा प्रहार करते हुए इसके ढाँचे को 'हैरान कर देने वाला और बेहद खराब आत्मसमर्पण' करार दिया। यह बयान ओबामा प्रशासन के किसी वरिष्ठ पूर्व अधिकारी की ओर से अब तक की सबसे कड़ी सार्वजनिक आलोचना मानी जा रही है। दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि सैन्य दबाव और कूटनीतिक रणनीति के बल पर ईरान को कमज़ोर स्थिति में बातचीत की मेज पर लाया गया है।

राइस की मुख्य आपत्तियाँ

एबीसी के कार्यक्रम 'दिस वीक' में बोलते हुए राइस ने कहा, 'यह बहुत ही गंभीर और गलत कदम है।' उनका आरोप था कि अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कोई व्यापक और अंतिम समझौता हासिल किए बिना ही उसे बड़ी रियायतें दे दी हैं। उनके अनुसार, अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर होने से पहले ही ईरान को खुलकर तेल बेचने, अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग व्यवस्था तक पहुँच पाने और अपने जमे हुए धन को वापस हासिल करने की दिशा में बढ़ने की अनुमति मिल गई है।

राइस ने कहा, 'जैसा कि मंत्री ने खुद माना, समझौते पर हस्ताक्षर होते ही — यानी गुरुवार से — ईरान अब अपना सारा तेल और तेल उत्पाद बिना किसी रुकावट के वैश्विक बाज़ार में बेच सकता है।' उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इस समझौता ज्ञापन (एमओयू) में ऐसे प्रावधान हैं जिनके तहत भविष्य में प्रतिबंध हट सकते हैं और ईरान के आसपास अमेरिकी सैन्य मौजूदगी कम हो सकती है।

परमाणु कार्यक्रम पर चिंता

राइस ने स्पष्ट किया कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम अभी भी लगभग वैसा ही बना हुआ है। उनके शब्दों में, 'इस समझौते में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि परमाणु सामग्री को ईरान से बाहर ले जाया जाएगा।' उन्होंने यह भी कहा कि 'दशकों से यह साफ था कि इस समस्या का स्थायी समाधान केवल बातचीत और कूटनीति के ज़रिए ही संभव है' — यह इशारा उस रणनीतिक क्रम की ओर था जो उनके अनुसार शुरू से अपनाई जानी चाहिए थी।

ट्रंप प्रशासन का पलटवार

ट्रंप प्रशासन ने इन आलोचनाओं को पूरी तरह खारिज कर दिया। ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने तर्क दिया कि ईरान पहले की तुलना में कहीं ज़्यादा कमज़ोर स्थिति में बातचीत की मेज पर आया है। इसके पीछे होर्मुज स्ट्रेट से जहाज़ों की आवाजाही का फिर से सामान्य होना और सैन्य दबाव की रणनीति को प्रमुख कारण बताया गया। प्रशासन का दावा है कि ईरान की सैन्य क्षमताओं को काफी नुकसान पहुँचा है और यही दबाव ईरानी नेतृत्व को बातचीत के लिए तैयार करने में सहायक रहा।

आगे क्या होगा

यह बहस ऐसे समय में सामने आई है जब उपराष्ट्रपति जेडी वेंस स्विट्जरलैंड में ईरानी अधिकारियों से मुलाकात की तैयारी कर रहे हैं। इन वार्ताओं का उद्देश्य एक व्यापक समझौते की दिशा में बातचीत को आगे बढ़ाना है। इसका नतीजा न केवल मध्य पूर्व में अमेरिका की नीति, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों पर भी गहरा असर डाल सकता है। गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव, होर्मुज स्ट्रेट में बाधाएँ और कूटनीतिक संवाद — तीनों एक साथ देखने को मिले हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो ईरान के पास बाद में रियायत देने की प्रेरणा क्यों बचेगी? ट्रंप प्रशासन का 'कमज़ोर ईरान' वाला तर्क सतह पर आकर्षक लगता है, लेकिन परमाणु सामग्री को ईरान की सीमाओं के भीतर रहने देना वही केंद्रीय कमज़ोरी है जो 2015 के JCPOA पर भी उठाई गई थी। विडंबना यह है कि ट्रंप ने JCPOA को 'सबसे बुरी डील' कहकर छोड़ा था, और आलोचक अब इस नए ढाँचे में वही खामियाँ देख रहे हैं। वेंस की स्विट्जरलैंड यात्रा से पहले यह बहस तय करेगी कि अमेरिकी जनमत और कांग्रेस किस दिशा में झुकते हैं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुसान राइस ने ट्रंप की ईरान डील को 'आत्मसमर्पण' क्यों कहा?
राइस का तर्क है कि अमेरिका ने परमाणु कार्यक्रम पर कोई अंतिम और बाध्यकारी समझौता हासिल किए बिना ही ईरान को तेल बिक्री, अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग पहुँच और जमे धन की वापसी जैसी बड़ी रियायतें दे दी हैं। उनके अनुसार यह अमेरिका की कूटनीतिक स्थिति को कमज़ोर करता है।
ट्रंप के ईरान समझौते में परमाणु कार्यक्रम पर क्या प्रावधान है?
राइस के अनुसार, इस समझौते में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि परमाणु सामग्री को ईरान से बाहर ले जाया जाएगा। यानी ईरान का परमाणु कार्यक्रम अभी भी लगभग वैसा ही बना हुआ है।
ट्रंप प्रशासन इस समझौते को सफलता क्यों मान रहा है?
ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट के अनुसार, सैन्य दबाव और होर्मुज स्ट्रेट से जहाज़ों की आवाजाही सामान्य होने के कारण ईरान पहले की तुलना में कहीं कमज़ोर स्थिति में बातचीत के लिए आया। प्रशासन का दावा है कि ईरान की सैन्य क्षमताओं को काफी नुकसान पहुँचा है।
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की स्विट्जरलैंड यात्रा का क्या उद्देश्य है?
वेंस स्विट्जरलैंड में ईरानी अधिकारियों से मुलाकात की तैयारी में हैं, जिसका मकसद एक व्यापक और अंतिम समझौते की दिशा में वार्ता को आगे बढ़ाना है। इसका असर मध्य पूर्व नीति और वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों दोनों पर पड़ सकता है।
ईरान डील पर यह विवाद अमेरिकी राजनीति में क्यों अहम है?
यह बहस अमेरिका की ईरान नीति पर दोनों पक्षों के गहरे मतभेदों को उजागर करती है — एक तरफ सैन्य दबाव-आधारित रणनीति है, दूसरी तरफ शुरू से कूटनीतिक संवाद की वकालत। यह विवाद ऐसे नाज़ुक समय में उभरा है जब होर्मुज स्ट्रेट में तनाव और परमाणु वार्ताएँ एक साथ चल रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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