10 अगस्त 2026
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ईरान को बैंकिंग और तेल निर्यात की छूट पर अमेरिका में विवाद, सुसान राइस ने बताया 'बड़ी गलती'

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ईरान को बैंकिंग और तेल निर्यात की छूट पर अमेरिका में विवाद, सुसान राइस ने बताया 'बड़ी गलती'

सारांश

अमेरिका-ईरान कूटनीतिक समझौते से पहले ही ईरान को बैंकिंग, संपत्ति और तेल निर्यात की छूट दी जा रही है — जिसे पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सुसान राइस ने 'बहुत बड़ी और बेहद खराब रियायत' बताया है। ईरान के तेल निर्यात के 15 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक पहुँचने की उम्मीद है, जिसका असर भारत सहित वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पर पड़ सकता है।

मुख्य बातें

ट्रंप प्रशासन ने 21 जून को पुष्टि की कि अमेरिका-ईरान समझौते के तहत ईरान अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल बेच सकेगा।
ईरान के तेल निर्यात के 15 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक होने की उम्मीद — हालिया तनाव से पहले के स्तर के करीब।
ईरान को अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग व्यवस्था और रोकी गई संपत्तियों तक पहुँच की अनुमति दी जा रही है।
पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सुसान राइस ने इसे 'बहुत बड़ी और बेहद खराब रियायत' बताया; कहा — अंतिम समझौते के बाद मिलनी चाहिए थी छूट।
होर्मुज़ स्ट्रेट से तेल और गैस की आवाजाही सामान्य होने की पुष्टि; भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर कीमतों का असर संभव।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत अभी जारी; अंतिम समझौते की रूपरेखा तय होनी बाकी।

अमेरिका और ईरान के बीच बन रहे नए कूटनीतिक समझौते के तहत ईरान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाज़ार में अपना तेल बेच सकेगा — और इसके साथ ही उसे अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग व्यवस्था तथा रोकी गई संपत्तियों तक पहुँच की अनुमति भी दी जा रही है। ट्रंप प्रशासन ने रविवार, 21 जून को कहा कि इस घटनाक्रम का असर वैश्विक तेल कीमतों और भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर पड़ सकता है।

ऊर्जा मंत्री राइट का बयान

अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने एबीसी के कार्यक्रम 'दिस वीक' में कहा कि ईरान का ऊर्जा बाज़ार में वापस आना वॉशिंगटन-तेहरान वार्ता के शुरुआती परिणामों में से एक होगा। उन्होंने बताया कि ईरान पिछले करीब 47 वर्षों से तेल बेचता आ रहा है। राइट के अनुसार, पहले ट्रंप कार्यकाल में ईरान के तेल निर्यात में भारी कमी आई थी, जबकि बाइडेन सरकार के दौरान इसमें उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

राइट ने कहा, 'हमने उन्हें दो महीने तक दिखाया कि हम उनका एक बूंद तेल भी बिकने से रोक सकते हैं।' उनके अनुसार, इससे वार्ता में वॉशिंगटन की स्थिति मज़बूत हुई। ईरान के तेल निर्यात के 15 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक के स्तर पर पहुँचने की उम्मीद जताई गई है — जो हालिया तनाव से पहले की मात्रा के करीब है।

होर्मुज़ स्ट्रेट और ऊर्जा बाज़ार पर असर

अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, होर्मुज़ स्ट्रेट के आसपास हुई रुकावटों और खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण ऊर्जा बाज़ारों में जो अनिश्चितता बनी हुई थी, वह अब कम हो रही है। राइट ने कहा कि इस अहम समुद्री मार्ग से तेल और प्राकृतिक गैस की आवाजाही सामान्य हो चुकी है।

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका में बढ़ा हुआ उत्पादन, वेनेजुएला से अतिरिक्त आपूर्ति और बड़े तेल उत्पादक देशों के सहयोग से आने वाले समय में ऊर्जा कीमतें और नीचे आ सकती हैं।

सुसान राइस की आलोचना

पूर्व ओबामा प्रशासन की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सुसान राइस ने इस घटनाक्रम पर कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि किसी अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर से पहले ही ईरान को बड़े आर्थिक लाभ दिए जा रहे हैं। राइस के अनुसार, समझौते पर हस्ताक्षर होते ही — यानी गुरुवार से — ईरान अपने संपूर्ण तेल और तेल उत्पादों को बिना किसी रुकावट के अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में बेच सकेगा।

राइस ने ईरान को अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग व्यवस्था का उपयोग करने और रोकी गई संपत्तियों तक पहुँच देने के फ़ैसले को 'बहुत बड़ी और बेहद खराब रियायत' बताया। आलोचकों का कहना है कि ऐसी छूट अंतिम समझौते के बाद दी जानी चाहिए थी, न कि वार्ता के दौरान।

भारत पर संभावित प्रभाव

यह ऐसे समय में आया है जब भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में शामिल है और ईरानी तेल की वापसी से उसे सस्ती ऊर्जा आपूर्ति का लाभ मिल सकता है। गौरतलब है कि भारत पहले भी ईरानी तेल का एक प्रमुख खरीदार रहा है, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण यह व्यापार बाधित हुआ था। ईरान के तेल निर्यात के फिर से बढ़ने से वैश्विक बाज़ार में आपूर्ति बढ़ेगी, जिससे कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।

आगे क्या होगा

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत अभी जारी है और अंतिम समझौते की रूपरेखा अभी तय होनी बाकी है। राजनीतिक और कूटनीतिक विशेषज्ञों की नज़र इस बात पर है कि क्या वार्ता से पहले दी गई आर्थिक रियायतें अमेरिका की सौदेबाज़ी की ताकत को कमज़ोर करेंगी या इससे समझौते की राह आसान होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब ईरान बिना पूर्ण समझौते के ही 15 लाख बैरल प्रतिदिन की ओर लौट रहा है। असली परीक्षा यह होगी कि परमाणु सत्यापन की शर्तें कितनी पुख्ता हैं — क्योंकि आर्थिक राहत एक बार मिल जाए, तो उसे वापस लेना राजनीतिक और कूटनीतिक दोनों दृष्टियों से बेहद कठिन हो जाता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिका-ईरान समझौते के तहत ईरान को क्या-क्या छूट मिल रही है?
समझौते के तहत ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल और तेल उत्पाद बेचने, अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग व्यवस्था का उपयोग करने और रोकी गई संपत्तियों तक पहुँच की अनुमति दी जा रही है। ये रियायतें अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर से पहले ही प्रभावी होने की बात कही जा रही है।
सुसान राइस ने इस समझौते की आलोचना क्यों की?
पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सुसान राइस का कहना है कि ईरान को इतनी बड़ी आर्थिक रियायतें अंतिम समझौते के बाद मिलनी चाहिए थीं, पहले नहीं। उन्होंने इसे 'बहुत बड़ी और बेहद खराब रियायत' बताया, क्योंकि इससे वार्ता में अमेरिका का उत्तोलन कमज़ोर होता है।
ईरान के तेल निर्यात के फिर शुरू होने से भारत पर क्या असर पड़ेगा?
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में है और ईरानी तेल की वापसी से वैश्विक आपूर्ति बढ़ेगी, जिससे कीमतों पर नीचे का दबाव पड़ सकता है। भारत पहले भी ईरानी तेल का प्रमुख खरीदार रहा है, इसलिए सस्ती ऊर्जा आपूर्ति का सीधा लाभ मिल सकता है।
ईरान का तेल निर्यात कितना होने की उम्मीद है?
अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट के अनुसार, ईरान के तेल निर्यात के 15 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक के स्तर पर पहुँचने की उम्मीद है। यह मात्रा हालिया तनाव और प्रतिबंधों से पहले के स्तर के करीब है।
क्या ईरान का परमाणु समझौता अभी पूरी तरह तय हो गया है?
नहीं, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत अभी जारी है और अंतिम समझौते की रूपरेखा तय होनी बाकी है। आर्थिक रियायतें समझौते के शुरुआती नतीजों के तौर पर दी जा रही हैं, लेकिन परमाणु सत्यापन की शर्तें अभी निर्धारित नहीं हुई हैं।
राष्ट्र प्रेस
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