ईरान परमाणु डील से होर्मुज स्ट्रेट खुलेगा, तेल सस्ता होगा — ट्रंप का बड़ा दावा
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 12 जून 2025 को व्हाइट हाउस में कहा कि ईरान के साथ प्रस्तावित परमाणु समझौता अंतिम रूप लेते ही वैश्विक तेल बाजार में बड़ी राहत मिल सकती है। उनके अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट के खुलने और मध्य पूर्व में स्थिरता बढ़ने से ऊर्जा बाजारों पर बना दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा।
बाज़ार की प्रतिक्रिया
ट्रंप ने कहा कि समझौते की संभावित खबर मात्र से शेयर बाजार 1,000 अंक ऊपर चला गया। उन्होंने इसे इस बात का संकेत बताया कि निवेशक और आम लोग दोनों इस डील के पक्ष में हैं। तेल की कीमतें पहले ही नीचे आना शुरू हो चुकी हैं और ट्रंप के अनुसार समझौते पर दस्तखत होने के बाद इनमें और गिरावट आ सकती है।
होर्मुज स्ट्रेट और समुद्री मार्ग
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि समझौते का एक अहम हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना है। जब उनसे पूछा गया कि क्या समुद्री नाकेबंदी से जुड़ी पाबंदियाँ समझौता लागू होते ही हटेंगी, तो उन्होंने कहा, "हाँ, यह समझौते का हिस्सा है और इससे तेल की कीमतें तेजी से गिरेंगी।" उन्होंने यह भी बताया कि तनाव के दौरान अमेरिका ने इस क्षेत्र से ऊर्जा आपूर्ति जारी रखने में मदद की और करोड़ों बैरल तेल इसी मार्ग से भेजा गया।
परमाणु हथियारों पर रोक का दावा
ट्रंप ने कहा, "हमारे पास ऐसा समझौता है जिससे ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं बना पाएगा। यह बहुत अच्छा समझौता है।" उनके अनुसार, समझौते की तैयारियाँ लगभग पूरी हो चुकी हैं और अगले कुछ दिनों में इस पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। उन्होंने इसे एक "बहुत विस्तृत समझौता-पत्र" बताया।
आम जनता और किसानों पर असर
ट्रंप ने कहा कि जब तेल सस्ता होता है तो बाकी चीजों की कीमतें भी कम होने लगती हैं। उनके अनुसार, तनाव कम होने से अमेरिकी किसानों और आम लोगों को सीधा फायदा होगा क्योंकि ईंधन और परिवहन से जुड़े खर्च घटेंगे।
भारत पर संभावित प्रभाव
यह घटनाक्रम भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है। भारत अपनी कुल कच्चे तेल की ज़रूरत का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में किसी भी बड़ी गिरावट का सीधा असर देश की महंगाई दर, सरकारी वित्तीय स्थिति और आम लोगों के ईंधन खर्च पर पड़ता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत लगातार ऊर्जा आयात बिल को कम करने के रास्ते तलाश रहा है।