ट्रंप का दावा: ईरान समझौते से होर्मुज स्ट्रेट 'हमेशा टोल-फ्री', परमाणु खतरा भी होगा समाप्त
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 15 जून 2026 को दावा किया कि ईरान के साथ हुए समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य 'हमेशा के लिए टोल-फ्री' रहेगा। द न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक विशेष साक्षात्कार में ट्रंप ने यह भी दावा किया कि इस समझौते से इज़राइल को परमाणु विनाश से बचाया गया है और मध्य-पूर्व में बड़े युद्ध का खतरा टल गया है।
समझौते की मुख्य बातें
ट्रंप के अनुसार, यह समझौता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक को सुरक्षित करेगा और ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकेगा। उन्होंने कहा कि पहले किए गए सैन्य हमलों और उसके बाद लगाए गए नौसैनिक अवरोध ने क्षेत्रीय शक्ति संतुलन अमेरिका के पक्ष में कर दिया, जिससे यह कूटनीतिक सफलता संभव हुई।
गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का एक अत्यंत संवेदनशील समुद्री मार्ग है। संघर्ष के दौरान इस मार्ग के बंद होने से सैकड़ों जहाज वहीं फंसे रह गए थे, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों पर गहरा असर पड़ा था।
सैन्य कार्रवाई की चेतावनी
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यदि ईरान अंतिम परमाणु समझौते तक नहीं पहुँचता, तो तेहरान पर सैन्य हमले फिर से शुरू किए जा सकते हैं। उन्होंने ईरान पर पहले की गई सैन्य कार्रवाइयों का बचाव करते हुए इन्हें समझौते की पृष्ठभूमि तैयार करने वाला कदम बताया।
यह ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में तनाव पहले से ही चरम पर है और वैश्विक ऊर्जा बाज़ार इस क्षेत्र की हर हलचल पर तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
नेतन्याहू की आलोचना, शी और पुतिन की तारीफ
साक्षात्कार में ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने कूटनीतिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद की। दूसरी ओर, उन्होंने इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को 'बहुत मुश्किल व्यक्ति' बताया और आरोप लगाया कि इज़राइली सैन्य कार्रवाइयों ने लगभग इस समझौते को बिगाड़ दिया था।
यह टिप्पणी उल्लेखनीय है क्योंकि ट्रंप और नेतन्याहू को परंपरागत रूप से करीबी सहयोगी माना जाता रहा है।
अनसुलझे सवाल और जी-7 में चर्चा
समझौते का पूरा मसौदा अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। आगे की बातचीत में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और समृद्ध यूरेनियम के भंडार जैसे जटिल मुद्दों पर चर्चा होनी बाकी है। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों पक्षों ने कुछ सबसे कठिन मुद्दों को बाद की वार्ता के लिए टाल दिया है।
फ्रांस में होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन में यह समझौता प्रमुख चर्चा का विषय बनने की उम्मीद है। सहयोगी देशों के नेताओं ने अभी तक इसका पूरा मसौदा नहीं देखा है और वे इसके क्रियान्वयन तथा निगरानी की रूपरेखा को समझना चाहते हैं।
शिपिंग उद्योग की सतर्क प्रतिक्रिया
खाड़ी क्षेत्र में सक्रिय शिपिंग कंपनियों ने होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने का स्वागत किया है, लेकिन सावधानी बरत रही हैं। कई ऑपरेटर तब तक सामान्य आवाजाही शुरू नहीं करेंगे जब तक उन्हें सुरक्षा की ठोस गारंटी नहीं मिल जाती। समझौते के दीर्घकालिक स्थायित्व पर निर्भर करेगा कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला कितनी जल्दी सामान्य हो पाती है।