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अमेरिका-ईरान डील से भारत की आपूर्ति श्रृंखला और महंगाई को राहत मिलेगी: पीएचडीसीसीआई

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अमेरिका-ईरान डील से भारत की आपूर्ति श्रृंखला और महंगाई को राहत मिलेगी: पीएचडीसीसीआई

सारांश

अमेरिका-ईरान शांति समझौते ने भारत के लिए ऊर्जा राहत का रास्ता खोला है। पीएचडीसीसीआई के डॉ. रणजीत मेहता के अनुसार, हॉर्मुज स्ट्रेट के निर्बाध खुलने से वैश्विक तेल आपूर्ति सुनिश्चित होगी, महंगाई घटेगी और रुपये में स्थिरता आएगी — जिसकी झलक सेंसेक्स की 736 अंक की उछाल में पहले ही दिख चुकी है।

मुख्य बातें

पीएचडीसीसीआई के सीईओ डॉ.
रणजीत मेहता ने अमेरिका-ईरान डील को भारत के लिए सकारात्मक बताया।
भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरत का 80 प्रतिशत से अधिक आयात करता है; डील से कीमतें घटने की उम्मीद।
हॉर्मुज स्ट्रेट से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुज़रता है; निर्बाध आपूर्ति से वैश्विक राहत संभव।
कच्चे तेल की कीमतें घटने से डॉलर माँग कम होगी और रुपये में स्थिरता आने की संभावना।
सेंसेक्स 736.38 अंक की बढ़त के साथ 76,264.33 और निफ्टी 231 अंक की तेज़ी के साथ 23,853.90 पर बंद।

पीएचडीसीसीआई के सीईओ एवं महासचिव डॉ. रणजीत मेहता ने 15 जून को कहा कि अमेरिका-ईरान शांति समझौता एक सकारात्मक कदम है जो भारत की आपूर्ति श्रृंखलाओं को पुनर्स्थापित करने, राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने और महंगाई पर लगाम कसने में अहम भूमिका निभाएगा। उनके अनुसार, यह समझौता वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में स्थिरता लाने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।

भारत पर कच्चे तेल का असर

डॉ. मेहता ने कहा कि भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरत का 80 प्रतिशत से अधिक आयात पर निर्भर है। उनके अनुसार, इस डील से अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आएगी, जिसका सीधा लाभ भारत को होगा। इससे न केवल ईंधन की लागत घटेगी, बल्कि उर्वरकों की कीमतों पर भी नियंत्रण रखना आसान होगा।

हॉर्मुज स्ट्रेट की भूमिका

डॉ. मेहता ने बताया कि इस समझौते के तहत हॉर्मुज स्ट्रेट को निर्बाध रूप से खोलने की बात कही गई है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक कच्चे तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत वहन करता है। यदि यह मार्ग बिना किसी व्यवधान के चालू रहता है, तो दीर्घकालिक आधार पर पूरी दुनिया के लिए ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।

सरकार के आपूर्ति प्रबंधन की सराहना

पीएचडीसीसीआई प्रमुख ने यह भी रेखांकित किया कि संकट के दौरान भारत सरकार ने आपूर्ति श्रृंखलाओं का प्रभावी प्रबंधन किया। इसी कारण भारत में ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि वैश्विक औसत की तुलना में अपेक्षाकृत कम रही।

रुपये और शेयर बाज़ार पर प्रभाव

डॉ. मेहता के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतें घटने से डॉलर की माँग में कमी आएगी, जिससे रुपये में स्थिरता आने की संभावना है। वैश्विक स्थिरता के इन संकेतों का असर भारतीय शेयर बाज़ार पर भी दिखा — सेंसेक्स 736.38 अंक यानी 0.97 प्रतिशत की तेज़ी के साथ 76,264.33 पर और निफ्टी 231 अंक यानी 0.98 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,853.90 पर बंद हुआ। यह तेज़ी इस बात का संकेत है कि बाज़ार ने इस समझौते को सकारात्मक रूप से लिया है। आगे यदि यह डील पूरी तरह लागू होती है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए यह एक दीर्घकालिक राहत बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह याद रखना ज़रूरी है कि इस तरह के भूराजनीतिक समझौते अक्सर क्रियान्वयन की पेचीदगियों में उलझ जाते हैं। हॉर्मुज स्ट्रेट की निर्बाध उपलब्धता एक दीर्घकालिक प्रतिबद्धता माँगती है, जो अभी कथित तौर पर प्रारंभिक चरण में है। भारत की ऊर्जा आयात निर्भरता को देखते हुए सरकार को इस अवसर का उपयोग घरेलू ऊर्जा विविधीकरण को तेज़ करने में भी करना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी एकल भूराजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भरता न रहे।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिका-ईरान डील का भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा?
पीएचडीसीसीआई के अनुसार, इस डील से कच्चे तेल की कीमतें घटेंगी, जिससे भारत में महंगाई और राजकोषीय घाटे पर नियंत्रण आसान होगा। साथ ही डॉलर की माँग कम होने से रुपये में स्थिरता आने की उम्मीद है।
हॉर्मुज स्ट्रेट इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
हॉर्मुज स्ट्रेट से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुज़रता है। इस मार्ग के निर्बाध खुले रहने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति दीर्घकालिक रूप से सुनिश्चित हो सकती है।
इस डील का भारतीय शेयर बाज़ार पर क्या प्रभाव पड़ा?
15 जून को सेंसेक्स 736.38 अंक यानी 0.97 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,264.33 और निफ्टी 231 अंक यानी 0.98 प्रतिशत की तेज़ी के साथ 23,853.90 पर बंद हुआ। वैश्विक स्थिरता के संकेतों ने बाज़ार की धारणा को मज़बूत किया।
भारत कच्चे तेल के मामले में कितना आयात-निर्भर है?
भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरत का 80 प्रतिशत से अधिक आयात के ज़रिए पूरा करता है। इसीलिए वैश्विक तेल कीमतों में कोई भी बदलाव भारत की अर्थव्यवस्था, उर्वरक लागत और महंगाई को सीधे प्रभावित करता है।
पीएचडीसीसीआई ने सरकार के आपूर्ति प्रबंधन पर क्या कहा?
डॉ. रणजीत मेहता ने कहा कि संकट के दौरान भारत सरकार ने आपूर्ति श्रृंखलाओं का प्रभावी प्रबंधन किया, जिसके कारण भारत में ऊर्जा कीमतों की वृद्धि वैश्विक औसत की तुलना में अपेक्षाकृत कम रही।
राष्ट्र प्रेस
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