अनिल विज ने अमेरिका-ईरान समझौते का स्वागत किया, बोले — पेट्रोल-डीजल होगा सस्ता, आम जनता को राहत मिलेगी
सारांश
मुख्य बातें
हरियाणा सरकार के मंत्री अनिल विज ने 15 जून को अंबाला में मीडिया से बातचीत के दौरान अमेरिका-ईरान समझौते का खुलकर स्वागत किया और कहा कि युद्ध के बजाय बातचीत से मुद्दों का हल निकालना हमेशा बेहतर होता है। उन्होंने कहा कि इस समझौते से भारत को भी 'बहुत फायदा' होने के संकेत मिल रहे हैं।
भारत को क्यों होगा फायदा
विज ने स्पष्ट किया कि भारत अपनी कुल क्रूड ऑयल आवश्यकता का 25 से 30 प्रतिशत इसी पश्चिम एशियाई क्षेत्र से आयात करता है। युद्ध के कारण आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो गई थी और इस संघर्ष में तीन भारतीय नाविकों की जान भी गई थी। उनके अनुसार, समुद्री मार्ग खुलने से देश में पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता सुगम होगी और आम नागरिकों को महंगाई से राहत मिलेगी।
एसआईआर पर विज का रुख
मंत्री विज ने इसी दौरान विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) अभियान का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कई वर्षों की निष्क्रियता के कारण मतदाता सूचियों में गंभीर त्रुटियाँ जमा हो गई हैं — जिनमें वर्ष 2002 में निधन हो चुके लोगों के नाम अभी तक सूची में बने हुए हैं। साथ ही, कथित तौर पर कुछ लोगों ने अनुचित तरीके से अपना नाम सूची में दर्ज करा लिया है।
विज ने कहा कि चुनाव आयोग (ECI) को संविधान प्रदत्त अधिकार है कि वह शुद्ध और सटीक मतदाता सूची के आधार पर चुनाव कराए, और इसमें हर नागरिक का सहयोग अपेक्षित है। उन्होंने बताया कि बूथ स्तरीय अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे।
पीएम मोदी ने भी किया स्वागत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिए इस समझौते की सराहना की। उन्होंने लिखा, 'मैं अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने के लिए बनी समझ का स्वागत करता हूँ। इस संघर्ष के कारण दुनिया भर में गंभीर आर्थिक व्यवधान पैदा हुआ और कई देशों में लोगों की जान गई है।'
मोदी ने आगे उम्मीद जताई कि 'नई समझ के प्रभावी क्रियान्वयन से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल होने की उम्मीद है। साथ ही यह समुद्री मार्गों पर निर्बाध आवाजाही और वैश्विक व्यापार को सुरक्षित बनाए रखने में भी मददगार साबित होगा।' उन्होंने यह भी कहा कि शेष मुद्दों पर बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़े और एक स्थायी व व्यापक समझौते तक पहुँचा जाए।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आयात लागत सीधे पश्चिम एशिया की स्थिरता पर निर्भर है। समझौते के सफल क्रियान्वयन से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने की संभावना जताई जा रही है, जिसका असर भारत में ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है।