पीएम मोदी ने अमेरिका-ईरान समझौते का स्वागत किया, पश्चिम एशिया में शांति और स्थिर व्यापार की उम्मीद जताई
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 जून 2025 को अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में संघर्ष विराम को लेकर बनी समझ का खुलकर स्वागत किया और उम्मीद जताई कि यह कदम क्षेत्र में स्थायी शांति एवं वैश्विक व्यापार की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करेगा। मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि इस संघर्ष ने दुनिया भर में गंभीर आर्थिक व्यवधान उत्पन्न किए और कई देशों में जानमाल की हानि हुई।
मोदी का बयान: शांति और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी पोस्ट में कहा, 'मैं अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने के लिए बनी समझ का स्वागत करता हूं। इस संघर्ष के कारण दुनिया भर में गंभीर आर्थिक व्यवधान पैदा हुआ और कई देशों में लोगों की जान गई है।' उन्होंने यह भी कहा कि 'नई समझ के प्रभावी क्रियान्वयन से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल होने की उम्मीद है। साथ ही यह समुद्री मार्गों पर निर्बाध आवाजाही और वैश्विक व्यापार को सुरक्षित बनाए रखने में भी मददगार साबित होगा।'
मोदी ने आगे उम्मीद जताई कि दोनों पक्षों के बीच शेष मुद्दों पर बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ेगी और अंततः एक स्थायी तथा व्यापक समझौते तक पहुंचा जाएगा।
ट्रंप का ऐलान: 'डील पूरी हो गई'
इससे पहले रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर इस समझौते की घोषणा की। उन्होंने लिखा, 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ डील अब पूरी हो गई है। सभी को बधाई!' ट्रंप ने एक अन्य पोस्ट में होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने की बात करते हुए लिखा, 'दुनिया के जहाजों, अपने इंजन चालू कर लो। तेल को बहने दो।'
ट्रंप ने इस समझौते को महीनों की लड़ाई के बाद एक बड़ी कामयाबी करार दिया और कहा कि 'यह महान समझौता पूरे इलाके में शांति और सुरक्षा लाएगा। कई राष्ट्रपतियों ने ईरान के साथ शांति बनाने की कोशिश की और मेरे सामने सभी विफल हो गए।' उन्होंने यह भी बताया कि शुक्रवार को समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए स्ट्रेट को खोला जाएगा, जिसके बाद तेल का प्रवाह दोनों दिशाओं में फिर से शुरू होगा। ईरान ने भी एमओयू को अंतिम रूप दिए जाने पर एक आधिकारिक बयान जारी किया।
वैश्विक प्रतिक्रिया: नेताओं ने किया स्वागत
इस ऐलान के बाद वैश्विक स्तर पर राहत की लहर दौड़ गई। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और विदेश मंत्री पेनी वोंग ने एक संयुक्त बयान में कहा कि ऑस्ट्रेलियाई सरकार इस बात से प्रसन्न है कि इस समझौते में होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और नेविगेशन की स्वतंत्रता बहाल करने की दिशा में ठोस कदम शामिल हैं।
भारत के लिए क्या मायने रखता है यह समझौता
यह समझौता ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पश्चिम एशिया संघर्ष का गहरा असर पड़ रहा था और एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का खतरा मंडरा रहा था। भारत पश्चिम एशिया से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है और होर्मुज स्ट्रेट उसके ऊर्जा आपूर्ति मार्ग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। गौरतलब है कि भारत ने इस संघर्ष के दौरान लगातार कूटनीतिक समाधान की वकालत की थी। प्रधानमंत्री मोदी की यह प्रतिक्रिया भारत की उस परंपरागत विदेश नीति के अनुरूप है जो संवाद और बातचीत के माध्यम से विवादों के समाधान को प्राथमिकता देती है।
आगे क्या होगा
समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट से समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है, जिसके बाद वैश्विक तेल आपूर्ति सामान्य होने का अनुमान है। प्रधानमंत्री मोदी ने उम्मीद जताई है कि दोनों देश शेष मुद्दों पर भी बातचीत जारी रखेंगे और एक व्यापक स्थायी समझौते की दिशा में आगे बढ़ेंगे।