ट्रंप का दावा: अमेरिका-ईरान शांति समझौता अंतिम चरण में, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलेगा
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 24 मई को दावा किया कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक बड़े शांति समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। ट्रंप के अनुसार, मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया के प्रमुख नेताओं के साथ हुई बातचीत के बाद यह कूटनीतिक पहल निर्णायक मोड़ पर पहुँच गई है। इस कथित समझौते का सबसे अहम पहलू स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोले जाने का वादा है — एक समुद्री मार्ग जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
ट्रुथ सोशल पर ट्रंप का बयान
शनिवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में ट्रंप ने लिखा कि वे व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में क्षेत्रीय नेताओं के साथ बातचीत कर रहे थे। उनके अनुसार इस बातचीत में सऊदी अरब के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद, यूएई के मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, कतर के अमीर तमीम बिन हमद बिन खलीफा अल थानी, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय, बहरीन के राजा हमद बिन ईसा अल खलीफा और पाकिस्तान के फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर अहमद शाह शामिल थे।
ट्रंप ने बताया कि यह बातचीत ईरान और शांति से जुड़े एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर केंद्रित थी। उन्होंने कहा कि अमेरिका, ईरान और उल्लिखित देशों के बीच समझौता लगभग तय हो चुका है, केवल अंतिम मंजूरी बाकी है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बड़ा दांव
ट्रंप के बयान का सर्वाधिक चर्चित हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर था। उन्होंने लिखा, 'समझौते के कई दूसरे हिस्सों के साथ-साथ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को भी खोला जाएगा।' यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार के लिए सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक है, और ईरान इस पर नियंत्रण की स्थिति में है। इस मार्ग में किसी भी व्यवधान का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पर पड़ता है।
भारत के लिए क्या मायने रखता है
यह घटनाक्रम भारत के नज़रिये से भी महत्त्वपूर्ण है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों से बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है, और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव को हमेशा एक रणनीतिक चिंता के रूप में देखा जाता रहा है। यदि ईरान से जुड़ा भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, तो इससे तेल की कीमतों में नरमी, शिपिंग में रुकावट की आशंका में कमी और आपूर्ति शृंखला के जोखिमों में राहत मिल सकती है।
इज़रायल से भी अलग बातचीत
ट्रंप ने यह भी बताया कि उन्होंने इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से अलग से बात की और वह बातचीत भी सकारात्मक रही। यह उल्लेखनीय है, क्योंकि इज़रायल और ईरान के बीच गहरे तनाव को देखते हुए किसी भी अमेरिका-ईरान समझौते में इज़रायल की भूमिका और प्रतिक्रिया अहम होगी।
अभी भी कई सवाल अनुत्तरित
हालाँकि, ट्रंप ने इस प्रस्तावित एमओयू की पूरी शर्तें सार्वजनिक नहीं कीं और न ही यह स्पष्ट किया कि इसमें प्रत्येक देश की क्या भूमिका होगी। व्हाइट हाउस की ओर से भी फिलहाल कोई आधिकारिक विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे बहुपक्षीय समझौतों में घोषणा और क्रियान्वयन के बीच की खाई अक्सर बड़ी होती है। आने वाले दिनों में इस कूटनीतिक पहल की दिशा और स्वरूप स्पष्ट होने की उम्मीद है।