ट्रंप-मैक्रों की एवियन में मुलाकात: ईरान डील को मध्य पूर्व शांति की दिशा में बड़ा कदम बताया
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोमवार, 15 जून को फ्रांस के एवियन शहर में जी-7 शिखर सम्मेलन से इतर द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें ईरान के साथ हुए नए समझौते, होर्मुज स्ट्रेट से जहाजरानी की बहाली और वैश्विक तेल कीमतों पर केंद्रित चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने इस समझौते को मध्य पूर्व में तनाव घटाने की दिशा में एक निर्णायक कदम करार दिया।
होर्मुज स्ट्रेट की आंशिक बहाली
राष्ट्रपति ट्रंप ने बैठक में कहा कि होर्मुज स्ट्रेट आंशिक रूप से खुल चुका है और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है। उन्होंने कहा, 'समझौता पूरी तरह साइन हो चुका है, और शुक्रवार तक होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह खुल जाएगा।' गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल पारगमन मार्गों में से एक है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता है।
दोनों नेताओं के बीच संबंध और साझा रुख
व्हाइट हाउस के अनुसार, ट्रंप ने मैक्रों के साथ अपने रिश्ते को 'बहुत शानदार' बताया और कहा, 'इमैनुएल मेरे खास दोस्त रहे हैं। हमने कई समझौतों पर साथ काम किया है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच व्यापार और रक्षा नीतियों पर मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं।
मैक्रों का ईरान समझौते पर बयान
फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने बैठक की शुरुआत में कहा, 'मुझे लगता है कि ईरान के साथ एक शांति समझौता एक बहुत अहम समझौता है। यह पहले परमाणु मुद्दे को हल करेगा, और यह पूरी दुनिया के लिए शांति के लिए बहुत जरूरी है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह समझौता लेबनान में शांति प्रयासों को भी गति दे सकता है और फ्रांस अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर इसका समर्थन करने को तैयार है।
जी-7 के संदर्भ में महत्व
यह द्विपक्षीय वार्ता जी-7 शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हुई, जिससे यह संकेत मिलता है कि ईरान मुद्दा और तेल बाज़ार की स्थिरता इस बार के एजेंडे में केंद्रीय स्थान रखती है। आलोचकों का कहना है कि ईरान समझौते की दीर्घकालिक व्यवहार्यता इस बात पर निर्भर करेगी कि परमाणु निगरानी तंत्र को किस रूप में लागू किया जाता है।
आगे क्या
व्हाइट हाउस के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट के पूर्ण संचालन की उम्मीद शुक्रवार तक जताई गई है। जी-7 सम्मेलन में मध्य पूर्व स्थिरता, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और लेबनान पर आगे की बहस अपेक्षित है। तेल बाज़ार पर्यवेक्षकों की नज़र होर्मुज की पूर्ण बहाली के बाद कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी।