मैक्रों ने ट्रंप के ईरान समझौता प्रयासों की सराहना की, होर्मुज़ सुरक्षा मिशन का दिया प्रस्ताव
सारांश
मुख्य बातें
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने 1 जून 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मध्य पूर्व की स्थिति पर विस्तृत बातचीत की और ईरान-अमेरिका समझौते को शीघ्र अंतिम रूप देने के लिए ट्रंप के प्रयासों की खुलकर सराहना की। मैक्रों ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर स्पष्ट किया कि फ्रांस इन प्रयासों में पूर्ण सहयोग और सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
मैक्रों का बयान: 'अनोखा मौका'
मैक्रों ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा, 'मैंने राष्ट्रपति ट्रंप से मध्य पूर्व की स्थिति पर बात की। मैंने उनकी उन दृढ़ कोशिशों की सराहना की, जो वे अमेरिका और ईरान के बीच जल्द से जल्द एक समझौता कराने के लिए कर रहे हैं।' उन्होंने इसे 'एक अनोखा मौका' बताया, जिसके ज़रिए सभी संबंधित पक्षों को शामिल करते हुए एक नया क्षेत्रीय सुरक्षा ढाँचा खड़ा किया जा सकता है, ताकि दीर्घकालिक स्थिरता और शांति सुनिश्चित हो सके।
होर्मुज़ स्ट्रेट के लिए अंतरराष्ट्रीय मिशन का प्रस्ताव
मैक्रों ने बताया कि फ्रांस ने ब्रिटेन और अन्य साझेदार देशों के साथ मिलकर एक अंतरराष्ट्रीय मिशन तैयार किया है, जिसे समझौता होते ही होर्मुज़ स्ट्रेट में समुद्री यातायात की सुरक्षा के लिए तैनात किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि फ्रांस समझौते के परमाणु पहलू से जुड़ी व्यापक बातचीत में अपना अनुभव और क्षमताएँ देने के लिए तत्पर है। गौरतलब है कि होर्मुज़ स्ट्रेट से दुनिया के तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता है, और इसकी सुरक्षा वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
लेबनान पर भी हुई चर्चा
बातचीत में लेबनान का मुद्दा भी उठा। मैक्रों ने राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति दिखाई गई प्रतिबद्धता की सराहना की। साथ ही उन्होंने एक मज़बूत युद्धविराम की आवश्यकता और लेबनानी अधिकारियों को सामूहिक समर्थन के महत्व पर ज़ोर दिया।
मध्य पूर्व के नेताओं से भी संपर्क
इससे पहले मैक्रों ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक, संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल-फतह अल-सीसी से भी बातचीत की। इन सभी नेताओं को एक ही संदेश दिया गया — अमेरिका और ईरान के बीच जल्द से जल्द समझौता होना बेहद ज़रूरी है। मैक्रों ने बिना किसी शर्त के और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार होर्मुज़ स्ट्रेट को पुनः खोलने का आग्रह किया।
आगे क्या होगा
यह कूटनीतिक सक्रियता ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता एक निर्णायक मोड़ पर बताई जा रही है। फ्रांस की यह पहल संकेत देती है कि यूरोपीय देश इस बार केवल पर्यवेक्षक नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदार की भूमिका में रहना चाहते हैं। अंतरराष्ट्रीय मिशन की तैनाती और परमाणु वार्ता में फ्रांस की भूमिका पर आने वाले हफ्तों में और स्पष्टता आने की संभावना है।