मोहम्मद बिन सलमान और मैक्रों की फोन पर बातचीत, अमेरिका-ईरान MOU और होर्मुज तनाव पर मंथन
सारांश
मुख्य बातें
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान बिन अब्दुलअजीज अल सऊद और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने 29 जून 2026 को टेलीफोन पर विस्तृत बातचीत की, जिसमें मध्य-पूर्व के बदलते हालात और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा परिदृश्य पर केंद्रित चर्चा हुई। सऊदी प्रेस एजेंसी (SPA) के अनुसार, यह कॉल मैक्रों की ओर से की गई थी।
मुख्य घटनाक्रम
SPA के अनुसार, दोनों नेताओं ने अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (MOU) के ताज़ा घटनाक्रम की समीक्षा की। इस MOU का उद्देश्य महीनों से जारी दोनों देशों के बीच तनाव को कम करना था। हालाँकि, हस्ताक्षर के बाद भी दोनों पक्षों के बीच산발적 झड़पें जारी रहने की खबरें हैं।
बातचीत में होर्मुज स्ट्रेट में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने और इस रणनीतिक जलमार्ग पर बढ़ते तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों को समर्थन देने की आवश्यकता पर विशेष ज़ोर दिया गया।
दोहा में वार्ता का स्थानांतरण
अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान परस्पर हमले रोकने और होर्मुज स्ट्रेट विवाद सुलझाने के लिए कतर की राजधानी दोहा में वार्ता करने पर सहमत हुए हैं। मूल रूप से यह बातचीत स्विट्जरलैंड में होनी थी और इसका प्राथमिक एजेंडा ईरान का परमाणु कार्यक्रम था, किंतु होर्मुज स्ट्रेट में नए तनाव के कारण इसे दोहा स्थानांतरित कर दिया गया।
एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा गया कि 'दोनों पक्ष अभी के लिए पीछे हटेंगे और जहाज़ आसानी से आ-जा सकते हैं, क्योंकि तकनीकी बातचीत जारी रहेगी।' यह ऐसे समय में आया है जब होर्मुज स्ट्रेट से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता है, जिससे इस जलमार्ग की सुरक्षा वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों के लिए अत्यंत संवेदनशील मुद्दा बन जाती है।
क्षेत्रीय स्थिरता पर ज़ोर
गौरतलब है कि सऊदी अरब और फ्रांस दोनों ही मध्य-पूर्व में स्थिरता के प्रमुख पैरोकार रहे हैं। दोनों नेताओं ने इस क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता बढ़ाने वाले व्यापक समाधान तलाशने की चल रही कोशिशों पर विचार-विमर्श किया। इसके अतिरिक्त, द्विपक्षीय सहयोग और आपसी हित के अन्य क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
विश्लेषकों के अनुसार, सऊदी-फ्रांस संपर्क इस बात का संकेत है कि पश्चिमी और खाड़ी देश अमेरिका-ईरान वार्ता की प्रगति पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं। होर्मुज स्ट्रेट पर तनाव का सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति और शिपिंग बीमा दरों पर पड़ सकता है, जिससे यह मुद्दा केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक महत्व का बन जाता है।
आगे क्या
दोहा में होने वाली अमेरिका-ईरान वार्ता के नतीजे होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति और व्यापक परमाणु समझौते की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएँगे। सऊदी-फ्रांस वार्ता यह भी दर्शाती है कि क्षेत्रीय शक्तियाँ किसी भी कूटनीतिक सफलता या विफलता के लिए पहले से तैयार रहना चाहती हैं।