मणिपुर में 135वां पैट्रियट्स डे: 1891 के एंग्लो-मणिपुर युद्ध के शहीदों को इंफाल में दी गई श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर ने 13 अगस्त 2026 को 135वां पैट्रियट्स डे (देशभक्त दिवस) गरिमापूर्ण ढंग से मनाया — यह दिन उन वीरों की स्मृति को समर्पित है जिन्होंने 1891 के एंग्लो-मणिपुर युद्ध में ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध संघर्ष करते हुए अपने प्राण न्यौछावर किए। इंफाल से लेकर राज्य के कोने-कोने तक आयोजित कार्यक्रमों में राजनेताओं, बुद्धिजीवियों और आम नागरिकों ने एकजुट होकर शहीदों को नमन किया।
मुख्य समारोह और श्रद्धांजलि
मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला, मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह, उपमुख्यमंत्री नेमचा किपजेन और लोसी डिखो, तथा गृह मंत्री कोंथौजम गोविंदस सिंह ने अलग-अलग संदेशों के माध्यम से शहीदों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। राज्यपाल ने अपने संदेश में उन देशभक्तों के प्रति गहरा सम्मान प्रकट किया जिन्होंने मणिपुर की संप्रभुता की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान दिया।
मुख्यमंत्री और अन्य नेताओं ने इंफाल के मोइरांगखोम स्थित हीचम याइचम पाट पर पुष्पांजलि अर्पित की — यही वह स्थल है जहाँ देशभक्त युवराज बीर टिकेंद्रजीत सिंह को फाँसी के बाद अंतिम संस्कार किया गया था।
मुख्यमंत्री का संदेश
मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने कहा, 'हम गर्व के साथ उन बहादुर शहीदों को याद करते हैं, जिन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ मणिपुर की संप्रभुता की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका साहस और देशभक्ति हमारे देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता को बनाए रखने के लिए हमेशा प्रेरणा बनी रहेगी।'
उन्होंने विशेष रूप से बीर टिकेंद्रजीत और थांगल जनरल का उल्लेख करते हुए कहा, 'उनका साहस, देशभक्ति और मातृभूमि के प्रति प्रेम पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। हमारे शहीदों और नायकों को सलाम।'
1891 के युद्ध की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
1891 का एंग्लो-मणिपुर युद्ध उस समय हुआ जब ब्रिटिश साम्राज्य ने राजनीतिक तनाव और अपने अधिकारियों की हत्या के बाद मणिपुर के विरुद्ध सैन्य अभियान छेड़ा। युद्ध में पराजय के पश्चात अंग्रेजों ने बीर टिकेंद्रजीत सिंह — जिन्हें 'मणिपुर के शेर' के रूप में जाना जाता है — और थांगल जनरल को फेइडाबुंग (वर्तमान में बीर टिकेंद्रजीत पार्क, इंफाल) में फाँसी दे दी। यह दिन तब से मणिपुर की सामूहिक स्मृति में अमिट रूप से अंकित है।
गौरतलब है कि यह स्वतंत्रता-पूर्व भारत के उन दुर्लभ संघर्षों में से एक था जिसमें किसी रियासत ने ब्रिटिश सेना का सीधा सामना किया। इस युद्ध को मणिपुर की अस्मिता और स्वाभिमान की अभिव्यक्ति के रूप में देखा जाता है।
विपक्ष की भागीदारी
विपक्षी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) ने भी स्वतंत्र रूप से 135वां देशभक्त दिवस मनाया। कांग्रेस विधायक दल के नेता केइशम मेघचंद्र सिंह ने कांग्रेस भवन में आयोजित कार्यक्रम में पार्टी का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा, 'मैं मणिपुर के बहादुर देशभक्तों, खासकर बीर टिकेंद्रजीत और थांगल जनरल, और उन सभी लोगों को दिल से श्रद्धांजलि देता हूँ, जिन्होंने हमारी मातृभूमि की आजादी, गरिमा और सम्मान के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।'
राज्यव्यापी आयोजन
राज्य सरकार और विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों ने 13 अगस्त को पूरे मणिपुर में दिनभर कार्यक्रम आयोजित किए। यह आयोजन ऐसे समय में हुआ जब 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस की तैयारियाँ भी जोरों पर हैं, जिससे राष्ट्रीय गौरव और क्षेत्रीय इतिहास का संगम और भी प्रासंगिक हो गया। आने वाले वर्षों में इस दिवस को और व्यापक स्तर पर मनाने की दिशा में प्रयास जारी रहने की उम्मीद है।