मैक्रों की अपील: होर्मुज स्ट्रेट बिना शर्त खुले, अमेरिका-ईरान समझौता जल्द हो
सारांश
मुख्य बातें
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने 1 जून 2026 को खाड़ी क्षेत्र के शीर्ष नेताओं से बातचीत के बाद अमेरिका और ईरान के बीच शीघ्र समझौते और होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शर्त के अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार पुनः खोलने की जोरदार अपील की है। मैक्रों ने यह संदेश सोशल मीडिया पर साझा करते हुए स्पष्ट किया कि युद्धविराम और जलमार्ग की बहाली को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
किन नेताओं से हुई बातचीत
मैक्रों ने बताया कि उन्होंने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस एवं प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान, ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक, संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल-फतह अल-सीसी से अलग-अलग बातचीत की। उन्होंने सभी को एक ही संदेश दिया — अमेरिका और ईरान के लिए जल्द से जल्द किसी ठोस समझौते पर पहुँचना अनिवार्य है।
फ्रांस की भूमिका और प्राथमिकताएँ
मैक्रों के अनुसार, पहली प्राथमिकता युद्धविराम सुनिश्चित करना और होर्मुज स्ट्रेट को बिना शर्त खोलना है। इसके बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइलों और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे जटिल मुद्दों पर व्यापक और मजबूत समझौते के लिए बातचीत जारी रहनी चाहिए। फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि फ्रांस इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने को तैयार है, जिसमें ब्रिटेन के साथ मिलकर एक बहुराष्ट्रीय पहल के ज़रिए होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री यातायात की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी शामिल है।
लेबनान पर मैक्रों का रुख
मैक्रों ने कहा कि क्षेत्रीय स्थिरता की शुरुआत लेबनान से होनी चाहिए और सभी पक्षों से हिंसा रोकने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि फ्रांस लेबनान की सरकार को राज्य की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता बहाल करने के प्रयासों में समर्थन देता रहेगा। यह ऐसे समय में आया है जब लेबनान के पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशंस सेंटर के अनुसार, रविवार को इजरायली हवाई हमले में दक्षिणी शहर टायर स्थित हिराम अस्पताल के निकट एक इलाका निशाना बना, जिसमें अस्पताल के 13 कर्मचारी घायल हो गए और अस्पताल को काफी नुकसान पहुँचा।
अमेरिका-ईरान वार्ता की स्थिति
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कथित तौर पर ईरान के साथ समझौते की शर्तों में बदलाव करने की योजना बना रहे हैं, ताकि युद्ध को समाप्त किया जा सके। ईरान भी नए प्रस्ताव लाने की तैयारी में बताया जा रहा है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह वार्ता लगातार आगे-पीछे चल रही है और इसमें कई अड़चनें आ रही हैं, जिससे प्रक्रिया बार-बार शुरुआती स्थिति में लौट सकती है। गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता है, जिससे इसकी बंदी का असर वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों पर सीधे पड़ता है।
आगे क्या होगा
फ्रांस और ब्रिटेन की बहुराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा पहल की रूपरेखा अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन मैक्रों की यह कूटनीतिक सक्रियता यूरोप की मध्यस्थ भूमिका को रेखांकित करती है। अमेरिका-ईरान वार्ता के अगले दौर की तारीख अभी तय नहीं है।