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एसिड अटैक पीड़ितों को रेल यात्रा में छूट: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को छह सप्ताह में ड्राफ्ट पॉलिसी देने का निर्देश दिया

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एसिड अटैक पीड़ितों को रेल यात्रा में छूट: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को छह सप्ताह में ड्राफ्ट पॉलिसी देने का निर्देश दिया

सारांश

एसिड अटैक से बचे लोगों को उपचार के लिए बार-बार शहर बदलने की मजबूरी होती है — और अब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को छह सप्ताह में रेल यात्रा रियायत की ड्राफ्ट पॉलिसी देने का निर्देश दिया है। रेलवे बोर्ड सैद्धांतिक रूप से सहमत है, पर इमरजेंसी कोटे और बहु-गंतव्य छूट के सवाल अभी खुले हैं।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 13 अगस्त 2026 को केंद्र सरकार को छह सप्ताह में एसिड अटैक पीड़ितों की रेल यात्रा रियायत पर ड्राफ्ट पॉलिसी पेश करने का निर्देश दिया।
रेलवे बोर्ड 'मरीज कैटेगरी' के तहत एसिड अटैक पीड़ितों को यात्रा छूट देने पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हुआ।
याचिकाकर्ता 'अतिजीवन सोसायटी' ने इमरजेंसी टिकट कोटे और बहु-गंतव्य यात्रा छूट की माँग की।
केंद्र ने दिव्यांग कैटेगरी के तहत छूट देने पर आपत्ति जताई।
पॉलिसी न्यायालय में पेश करने से पहले 'अतिजीवन सोसायटी' के साथ साझा की जाएगी।
पीठ की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने की; जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी.

सर्वोच्च न्यायालय ने 13 अगस्त 2026 को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह एसिड अटैक पीड़ितों को रियायती रेल यात्रा सुविधा देने संबंधी ड्राफ्ट पॉलिसी छह सप्ताह के भीतर रिकॉर्ड पर रखे। केंद्र ने सैद्धांतिक रूप से इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है, जिसके तहत रेलवे बोर्ड 'मरीज कैटेगरी' के अंतर्गत ऐसे पीड़ितों को यात्रा में छूट देने पर सहमत हुआ है।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता संगठन 'अतिजीवन सोसायटी' ने यह याचिका दायर की थी, जिसमें तर्क दिया गया कि एसिड अटैक से बचे लोगों को उपचार के लिए बार-बार विभिन्न शहरों के अस्पतालों में जाना पड़ता है। वर्तमान में 'मरीज कैटेगरी' के तहत मिलने वाली छूट किसी निश्चित स्टेशन से निश्चित गंतव्य तक सीमित है, जो ऐसे पीड़ितों की बहु-शहरीय चिकित्सा आवश्यकताओं के लिए अपर्याप्त है।

एक वकील ने न्यायालय को बताया कि यह पॉलिसी उन बचे लोगों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जिन्हें बड़े शहरों के विशेषज्ञ अस्पतालों में नियमित रूप से जाना पड़ता है।

केंद्र सरकार का पक्ष

केंद्र की ओर से पेश हुईं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे ने न्यायालय को बताया कि रेलवे बोर्ड 'मरीज कैटेगरी' के तहत एसिड अटैक पीड़ितों को यात्रा छूट देने पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पॉलिसी अभी तैयार की जा रही है और इसमें छूट की प्रक्रिया तथा अवधि जैसे विवरण अभी तय किए जाने हैं।

हालाँकि, केंद्र ने दिव्यांग कैटेगरी के तहत छूट देने पर आपत्ति जताई, यह कहते हुए कि इससे दिव्यांगता की विभिन्न उपश्रेणियों के बीच जटिल विभाजन करना पड़ेगा।

याचिकाकर्ता की प्रमुख माँगें

'अतिजीवन सोसायटी' ने दो प्रमुख समस्याओं की ओर न्यायालय का ध्यान खींचा। पहली, बार-बार अलग-अलग अस्पतालों से छूट प्रमाणपत्र लेने की बाध्यता — विशेषकर हमले के शुरुआती महीनों में जब उपचार अत्यावश्यक होता है। दूसरी, इमरजेंसी टिकट कोटे की माँग, क्योंकि पीड़ितों को अक्सर बहुत कम समय की सूचना पर यात्रा करनी पड़ती है।

याचिकाकर्ता ने कहा, "इमरजेंसी कोटे की जरूरत इसलिए है क्योंकि पीड़ितों को कम समय की सूचना पर यात्रा करनी पड़ सकती है। अगर उन्हें समय पर इलाज नहीं मिलता है, तो यह एक विफलता बन जाती है।"

सुप्रीम कोर्ट की बेंच और निर्देश

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ — जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे — ने केंद्र को छह सप्ताह के भीतर प्रस्तावित पॉलिसी का ड्राफ्ट रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया। केंद्र ने यह भी स्वीकार किया कि पॉलिसी को न्यायालय में प्रस्तुत करने से पहले 'अतिजीवन सोसायटी' के साथ साझा किया जाएगा, ताकि संगठन अपने सुझाव दे सके।

आगे क्या होगा

अब सभी की नजरें इस बात पर होंगी कि केंद्र सरकार छह सप्ताह की समय-सीमा के भीतर किस तरह की पॉलिसी तैयार करती है — विशेषकर इमरजेंसी कोटे और बहु-गंतव्य यात्रा छूट के मुद्दों पर। यह मामला देश भर में एसिड अटैक से बचे हजारों लोगों की चिकित्सा पहुँच को सीधे प्रभावित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राज्य की जवाबदेही का है — एसिड अटैक पीड़ितों को वर्षों तक चलने वाले इलाज के दौरान जो व्यवस्थागत बाधाएँ झेलनी पड़ती हैं, उन पर यह पहली बार इतनी स्पष्टता से ध्यान गया है। 'मरीज कैटेगरी' की मौजूदा सीमाएँ यह दर्शाती हैं कि नीतियाँ अक्सर उन लोगों की जटिल वास्तविकता को नजरअंदाज करती हैं जिनके लिए बनाई जाती हैं। असली परीक्षा यह होगी कि पॉलिसी में इमरजेंसी कोटे और बहु-गंतव्य यात्रा जैसी व्यावहारिक जरूरतें शामिल होती हैं या नहीं — अन्यथा यह भी एक और अधूरे वादे की सूची में जुड़ जाएगी।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने एसिड अटैक पीड़ितों की रेल यात्रा पर क्या निर्देश दिया?
सर्वोच्च न्यायालय ने 13 अगस्त 2026 को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह एसिड अटैक पीड़ितों को रियायती रेल यात्रा देने संबंधी ड्राफ्ट पॉलिसी छह सप्ताह के भीतर रिकॉर्ड पर रखे। रेलवे बोर्ड 'मरीज कैटेगरी' के तहत इस छूट को देने पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गया है।
'अतिजीवन सोसायटी' ने इस मामले में क्या माँगें रखी हैं?
याचिकाकर्ता 'अतिजीवन सोसायटी' ने बहु-गंतव्य यात्रा छूट, बार-बार प्रमाणपत्र लेने की बाध्यता समाप्त करने और एसिड अटैक पीड़ितों के लिए इमरजेंसी टिकट कोटे की माँग की है। संगठन का तर्क है कि पीड़ितों को अक्सर बहुत कम समय की सूचना पर अलग-अलग शहरों में इलाज के लिए जाना पड़ता है।
केंद्र सरकार ने दिव्यांग कैटेगरी के तहत छूट देने पर आपत्ति क्यों जताई?
केंद्र का कहना है कि दिव्यांग कैटेगरी के तहत छूट देने से दिव्यांगता की विभिन्न उपश्रेणियों के बीच जटिल विभाजन करना पड़ेगा, जो प्रशासनिक दृष्टि से कठिन होगा। इसीलिए सरकार 'मरीज कैटेगरी' को अधिक उपयुक्त मानती है।
मौजूदा 'मरीज कैटेगरी' की सीमाएँ क्या हैं?
वर्तमान में 'मरीज कैटेगरी' की छूट किसी निश्चित स्टेशन से किसी निश्चित गंतव्य तक की यात्रा तक सीमित है। एसिड अटैक पीड़ितों को अलग-अलग शहरों के अस्पतालों में जाना पड़ता है और हर बार नया प्रमाणपत्र लेना पड़ता है, जो उनके लिए अतिरिक्त बोझ है।
यह पॉलिसी कब तक लागू हो सकती है?
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को छह सप्ताह में ड्राफ्ट पॉलिसी पेश करने का निर्देश दिया है। इससे पहले केंद्र 'अतिजीवन सोसायटी' के साथ पॉलिसी साझा करेगा ताकि संगठन सुझाव दे सके; अंतिम पॉलिसी की समय-सीमा न्यायालय की अगली सुनवाई पर निर्भर करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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