स्टेम सेल थेरेपी पर केंद्र सरकार की एडवाइजरी: सिर्फ मंजूरशुदा बीमारियों में ही होगा इस्तेमाल, उल्लंघन पर रजिस्ट्रेशन रद्द
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 16 सितंबर 2026 को स्टेम सेल थेरेपी के नियमन को लेकर एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि यह थेरेपी नियमित क्लिनिकल प्रैक्टिस में केवल उन्हीं बीमारियों या स्थितियों के लिए मानक उपचार के रूप में दी जा सकती है जिन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय ने अधिकृत किया है। यह एडवाइजरी उन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजी गई है जिन्होंने 'क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स (रजिस्ट्रेशन और रेगुलेशन) एक्ट, 2010' को अपनाया है।
एडवाइजरी में क्या है
एडवाइजरी के अनुसार, मंजूरशुदा स्थितियों के अलावा स्टेम सेल थेरेपी देना, प्रिस्क्राइब करना, बढ़ावा देना या उसका विज्ञापन करना प्रोफेशनल मिसकंडक्ट माना जाएगा। यह दस्तावेज़ स्टेम सेल अनुसंधान और थेरेपी से जुड़े मौजूदा नियमों को पुनः रेखांकित करता है और उनके कड़ाई से पालन पर ज़ोर देता है।
ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) के संदर्भ में एडवाइजरी में विशेष रूप से कहा गया है कि ऑटिज़्म के उपचार में किसी भी प्रकार की स्टेम सेल का उपयोग केवल 'स्टेम सेल रिसर्च के लिए नेशनल गाइडलाइंस, 2017' के अनुरूप मंजूरशुदा क्लिनिकल ट्रायल्स तक ही सीमित रहेगा।
सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश और कानूनी प्रावधान
सर्वोच्च न्यायालय ने 30 जनवरी 2026 के अपने आदेश में कहा था कि कानूनी निर्देशों का पालन न करने पर कार्रवाई की जानी चाहिए। इसमें आईएमसी रेगुलेशंस, 2002 के रेगुलेशन 7.22 के तहत पेशेवर कदाचार के लिए कार्रवाई शामिल है। इसके अलावा, 'क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स एक्ट, 2010' की धारा 32 और धारा 40 के तहत रजिस्ट्रेशन रद्द करने और जुर्माना लगाने का प्रावधान भी है।
नेशनल मेडिकल कमीशन की भूमिका
नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने अपनी पृथक एडवाइजरी में यह पुष्टि की है कि स्टेम सेल थेरेपी केवल मंजूरशुदा स्थितियों के लिए ही मानक क्लिनिकल केयर के रूप में दी जा सकती है। NMC ने राज्य मेडिकल काउंसिल्स को यह भी निर्देश दिया है कि वे अपने संज्ञान में आए कथित उल्लंघनों की जाँच करें।
एनएमसी के निर्देशानुसार, यदि उचित प्रक्रिया के बाद किसी पंजीकृत चिकित्सक द्वारा पेशेवर कदाचार सिद्ध होता है, तो लागू कानूनी और नियामक प्रावधानों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सरकार की प्रतिक्रिया
मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया: 'मिनिस्ट्री ने संबंधित राज्य और जिला नियामक प्राधिकरणों और क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स से कहा है कि वे स्टेम सेल रिसर्च और थेरेपी से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।' यह एडवाइजरी ऐसे समय में आई है जब देशभर में स्टेम सेल उपचार के अनधिकृत प्रयोग को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं।
आम जनता और चिकित्सकों पर असर
गौरतलब है कि स्टेम सेल थेरेपी को लेकर देश में कई निजी क्लीनिकों द्वारा बिना पर्याप्त वैज्ञानिक आधार के विभिन्न बीमारियों के उपचार का दावा किया जाता रहा है। यह एडवाइजरी ऐसे प्रतिष्ठानों और चिकित्सकों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है। मरीज़ों और उनके परिजनों को भी सलाह दी गई है कि वे किसी भी स्टेम सेल उपचार से पहले यह सुनिश्चित करें कि वह मंजूरशुदा सूची में शामिल है। आने वाले हफ्तों में राज्य-स्तरीय नियामक प्राधिकरणों द्वारा अनुपालन की समीक्षा अपेक्षित है।