अमेरिका-ईरान परमाणु समझौते में मिस्र की मध्यस्थता, सीसी ने मैक्रों को दी जानकारी
सारांश
मुख्य बातें
मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल-फतह अल-सीसी ने 1 जून 2026 को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ फोन पर बातचीत करते हुए खुलासा किया कि मिस्र सक्रिय रूप से अमेरिका और ईरान के बीच एक व्यापक परमाणु समझौता कराने में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। यह कूटनीतिक पहल ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वयं कहा है कि दोनों देश समझौते के काफी करीब पहुँच गए हैं।
मिस्र की मध्यस्थता की भूमिका
राष्ट्रपति सीसी ने मैक्रों को बताया कि मिस्र सभी संबंधित पक्षों के साथ लगातार और गहन संपर्क में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में मिस्र का रुख अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों और देशों की संप्रभुता तथा उनके संसाधनों के सम्मान पर आधारित है। यह पहली बार है जब काहिरा ने सार्वजनिक रूप से इस वार्ता में अपनी भूमिका स्वीकार की है।
फ्रांस की चिंता: होर्मुज स्ट्रेट और क्षेत्रीय स्थिरता
फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने बातचीत में कहा कि फ्रांस मध्य पूर्व में स्थायी शांति स्थापित करने और क्षेत्र को अराजकता से बचाने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि होर्मुज स्ट्रेट — जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम मार्ग है — खुला रहना चाहिए और वहाँ से जहाजों की आवाजाही पर कोई रोक नहीं लगनी चाहिए। गौरतलब है कि होर्मुज से दुनिया का लगभग 20% तेल गुज़रता है, जिससे इस जलमार्ग का सामरिक महत्व अत्यधिक है।
ट्रंप का बयान: समझौता करीब, सैन्य विकल्प भी मेज पर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में फॉक्स न्यूज़ को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके। ट्रंप ने कहा, 'हम एक बहुत अच्छे समझौते के करीब हैं। अगर यह समझौता हो जाता है तो अच्छा है, नहीं तो फिर हमें सैन्य विकल्प पर आगे बढ़ना पड़ेगा।'
उन्होंने दावा किया कि ईरान उन शर्तों पर सहमत हो गया है जिनके तहत वह परमाणु हथियार न विकसित करेगा और न ही खरीदेगा। ट्रंप ने बताया कि जब उन्होंने यह चिंता जताई कि ईरान कहीं और से परमाणु हथियार खरीद सकता है, तो वार्ता की शर्तों को और विस्तृत किया गया। ट्रंप ने कहा, 'शुरुआत में उन्होंने कहा था कि हम परमाणु हथियार विकसित नहीं करेंगे। मैंने पूछा कि अगर आप किसी और से खरीद लें तो क्या होगा? अब इसमें यह भी शामिल है कि हम न तो परमाणु हथियार बनाएंगे और न ही किसी भी तरह से खरीदेंगे।'
वार्ता की स्थिति और आगे की राह
राष्ट्रपति ट्रंप ने बातचीत को 'कठिन' बताया, लेकिन कहा कि धीरे-धीरे प्रगति हो रही है। उन्होंने कहा, 'वे बहुत सख्त बातचीत करने वाले हैं। इसमें समय लगता है। लेकिन धीरे-धीरे हमें लगता है कि हम अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे हैं।' यह ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव कम करने के लिए कई देश अपने-अपने स्तर पर कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं। मिस्र की सक्रिय भूमिका इस बात का संकेत है कि क्षेत्रीय देश भी इस वार्ता की सफलता में रुचि रखते हैं।