ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: अंकुश पंघाल का गोल्ड, भारतीय मुक्केबाजों ने जीते 7 स्वर्ण सहित 10 पदक
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय मुक्केबाज अंकुश पंघाल ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के 10वें दिन स्वर्ण पदक अपने नाम किया और कहा कि फाइनल में 0-5 से पिछड़ने के बाद भी उन्होंने खुद पर भरोसा नहीं खोया। 2 अगस्त 2026 को मुक्केबाजी में भारत की झोली में कुल 10 पदक आए, जिनमें 7 स्वर्ण पदक शामिल रहे — यह इस खेल में भारत के सर्वश्रेष्ठ एकल-दिवसीय प्रदर्शनों में से एक है।
अंकुश पंघाल का जज़्बा
पंघाल ने बताया, 'गोल्ड मेडल जीतकर बहुत अच्छा लग रहा है, हालांकि पहले बाउट में 0-5 से पीछे हो गया था, तो दबाव आ गया था कि कैसे भी करके बाउट लेनी है। बस खुद के ऊपर विश्वास रखा और सब हो गया।' उन्होंने यह पदक अपने परिवार और कोच को समर्पित किया तथा कहा कि इस जीत से आत्मविश्वास बढ़ा है और वे एशियन गेम्स में और बेहतर प्रदर्शन करेंगे।
लवलीना का रजत और असम के बाढ़ पीड़ितों को समर्पण
महिला मुक्केबाज लवलीना को फाइनल में हार का सामना करना पड़ा और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। उन्होंने कहा, 'थोड़ी निराशा जरूर है। मैंने गोल्ड मेडल जीतने की पूरी कोशिश की, लेकिन मैं सिल्वर मेडल से भी खुश हूं, क्योंकि हमारी टीम ने गेम्स में जबरदस्त प्रदर्शन किया।' उन्होंने यह भी बताया कि यह उनका कॉमनवेल्थ गेम्स का पहला पदक है। विशेष रूप से, लवलीना ने अपना यह रजत पदक असम के बाढ़ पीड़ित लोगों को समर्पित किया — एक भावनात्मक कदम जिसने सोशल मीडिया पर सराहना बटोरी।
सचिन सिवाच की वापसी और स्वर्ण
स्वर्ण पदक विजेता सचिन सिवाच ने बताया कि पहले दो राउंड में 2-3 से पिछड़ने के बाद उनके पास तीसरे राउंड में आक्रामक खेलने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। उन्होंने कहा, 'मेरे पास सिर्फ आखिरी राउंड का चांस था। आगे बढ़ने के अलावा मेरे पास कोई विकल्प नहीं था। मुझे विश्वास था कि मैं जीत सकता हूं और वैसा ही हुआ।' यह जीत दर्शाती है कि मानसिक दृढ़ता किस तरह मैच का रुख पलट सकती है।
नरेंदर का रजत और एशियन गेम्स का संकल्प
90 प्लस कैटेगरी में नरेंदर को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। उन्होंने कहा कि प्रतिद्वंद्वी मुक्केबाज की भागकर खेलने की रणनीति को पकड़ना मुश्किल रहा और नियोजित रणनीति में थोड़ी कमी रह गई। उन्होंने एशियन गेम्स में इस कमी को पूरा करने का संकल्प जताया।
आगे क्या
गौरतलब है कि ग्लासगो में मिली इस सफलता के बाद भारतीय मुक्केबाजी दल की नज़रें अब एशियन गेम्स पर टिकी हैं। अंकुश, लवलीना और सचिन — तीनों ने एशियन गेम्स में और बेहतर प्रदर्शन का संकल्प जताया है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय मुक्केबाजी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान और मजबूत कर रही है।