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ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: अंकुश पंघाल का गोल्ड, भारतीय मुक्केबाजों ने जीते 7 स्वर्ण सहित 10 पदक

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ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: अंकुश पंघाल का गोल्ड, भारतीय मुक्केबाजों ने जीते 7 स्वर्ण सहित 10 पदक

सारांश

0-5 से पिछड़कर स्वर्ण — अंकुश पंघाल की यह वापसी ग्लासगो में भारतीय मुक्केबाजी के सबसे यादगार पलों में से एक बन गई। 10वें दिन 7 गोल्ड सहित 10 पदक के साथ भारत ने साबित किया कि मानसिक दृढ़ता ही असली 'गोल्डन पंच' है।

मुख्य बातें

अंकुश पंघाल ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीता, फाइनल में 0-5 से पिछड़ने के बाद शानदार वापसी की।
भारतीय मुक्केबाजों ने 10वें दिन कुल 10 पदक जीते, जिनमें 7 स्वर्ण पदक शामिल हैं।
महिला मुक्केबाज लवलीना को फाइनल में हार के बाद रजत पदक मिला; यह उनका कॉमनवेल्थ गेम्स का पहला पदक है; उन्होंने इसे असम के बाढ़ पीड़ितों को समर्पित किया।
सचिन सिवाच ने पहले दो राउंड में 2-3 से पिछड़ने के बाद आक्रामक खेल से स्वर्ण पदक हासिल किया।
90 प्लस कैटेगरी में नरेंदर ने रजत पदक जीता; एशियन गेम्स में बेहतर प्रदर्शन का संकल्प जताया।

भारतीय मुक्केबाज अंकुश पंघाल ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के 10वें दिन स्वर्ण पदक अपने नाम किया और कहा कि फाइनल में 0-5 से पिछड़ने के बाद भी उन्होंने खुद पर भरोसा नहीं खोया। 2 अगस्त 2026 को मुक्केबाजी में भारत की झोली में कुल 10 पदक आए, जिनमें 7 स्वर्ण पदक शामिल रहे — यह इस खेल में भारत के सर्वश्रेष्ठ एकल-दिवसीय प्रदर्शनों में से एक है।

अंकुश पंघाल का जज़्बा

पंघाल ने बताया, 'गोल्ड मेडल जीतकर बहुत अच्छा लग रहा है, हालांकि पहले बाउट में 0-5 से पीछे हो गया था, तो दबाव आ गया था कि कैसे भी करके बाउट लेनी है। बस खुद के ऊपर विश्वास रखा और सब हो गया।' उन्होंने यह पदक अपने परिवार और कोच को समर्पित किया तथा कहा कि इस जीत से आत्मविश्वास बढ़ा है और वे एशियन गेम्स में और बेहतर प्रदर्शन करेंगे।

लवलीना का रजत और असम के बाढ़ पीड़ितों को समर्पण

महिला मुक्केबाज लवलीना को फाइनल में हार का सामना करना पड़ा और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। उन्होंने कहा, 'थोड़ी निराशा जरूर है। मैंने गोल्ड मेडल जीतने की पूरी कोशिश की, लेकिन मैं सिल्वर मेडल से भी खुश हूं, क्योंकि हमारी टीम ने गेम्स में जबरदस्त प्रदर्शन किया।' उन्होंने यह भी बताया कि यह उनका कॉमनवेल्थ गेम्स का पहला पदक है। विशेष रूप से, लवलीना ने अपना यह रजत पदक असम के बाढ़ पीड़ित लोगों को समर्पित किया — एक भावनात्मक कदम जिसने सोशल मीडिया पर सराहना बटोरी।

सचिन सिवाच की वापसी और स्वर्ण

स्वर्ण पदक विजेता सचिन सिवाच ने बताया कि पहले दो राउंड में 2-3 से पिछड़ने के बाद उनके पास तीसरे राउंड में आक्रामक खेलने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। उन्होंने कहा, 'मेरे पास सिर्फ आखिरी राउंड का चांस था। आगे बढ़ने के अलावा मेरे पास कोई विकल्प नहीं था। मुझे विश्वास था कि मैं जीत सकता हूं और वैसा ही हुआ।' यह जीत दर्शाती है कि मानसिक दृढ़ता किस तरह मैच का रुख पलट सकती है।

नरेंदर का रजत और एशियन गेम्स का संकल्प

90 प्लस कैटेगरी में नरेंदर को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। उन्होंने कहा कि प्रतिद्वंद्वी मुक्केबाज की भागकर खेलने की रणनीति को पकड़ना मुश्किल रहा और नियोजित रणनीति में थोड़ी कमी रह गई। उन्होंने एशियन गेम्स में इस कमी को पूरा करने का संकल्प जताया।

आगे क्या

गौरतलब है कि ग्लासगो में मिली इस सफलता के बाद भारतीय मुक्केबाजी दल की नज़रें अब एशियन गेम्स पर टिकी हैं। अंकुश, लवलीना और सचिन — तीनों ने एशियन गेम्स में और बेहतर प्रदर्शन का संकल्प जताया है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय मुक्केबाजी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान और मजबूत कर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर दब जाता है। एशियन गेम्स की तैयारी के लिहाज से यह प्रदर्शन भारतीय मुक्केबाजी के लिए आत्मविश्वास का बड़ा इंजेक्शन है, लेकिन असली परीक्षा वहाँ होगी जहाँ प्रतिस्पर्धा का स्तर और ऊँचा होगा।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंकुश पंघाल ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में गोल्ड कैसे जीता?
अंकुश पंघाल फाइनल के पहले बाउट में 0-5 से पिछड़ गए थे, लेकिन उन्होंने खुद पर विश्वास बनाए रखा और शानदार वापसी करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उन्होंने यह पदक अपने परिवार और कोच को समर्पित किया।
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के 10वें दिन भारत ने मुक्केबाजी में कितने पदक जीते?
भारतीय मुक्केबाजों ने 2 अगस्त 2026 को 10वें दिन कुल 10 पदक जीते, जिनमें 7 स्वर्ण पदक शामिल हैं। यह इस खेल में भारत के सर्वश्रेष्ठ एकल-दिवसीय प्रदर्शनों में से एक माना जा रहा है।
लवलीना ने अपना रजत पदक किसे समर्पित किया?
लवलीना ने अपना कॉमनवेल्थ गेम्स का पहला पदक — रजत — असम के बाढ़ पीड़ित लोगों को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि टीम के प्रदर्शन से उन्हें अधिक खुशी है और वे एशियन गेम्स में स्वर्ण जीतने का प्रयास करेंगी।
सचिन सिवाच ने फाइनल में पिछड़ने के बाद कैसे जीत हासिल की?
सचिन सिवाच पहले दो राउंड में 2-3 से पिछड़ रहे थे। तीसरे और अंतिम राउंड में उनके पास आगे बढ़कर आक्रामक खेलने के अलावा कोई विकल्प नहीं था, और इसी रणनीति से उन्होंने स्वर्ण पदक जीता।
भारतीय मुक्केबाजों का अगला बड़ा लक्ष्य क्या है?
ग्लासगो में सफलता के बाद अंकुश पंघाल, लवलीना और नरेंदर सहित सभी प्रमुख मुक्केबाजों ने एशियन गेम्स में और बेहतर प्रदर्शन करने का संकल्प जताया है। लवलीना ने विशेष रूप से एशियन गेम्स में स्वर्ण जीतने का लक्ष्य रखा है।
राष्ट्र प्रेस
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