अमेरिकी मिडटर्म चुनाव 2026: डेमोक्रेट्स ने हाउस और सीनेट जीते, ट्रंप को ऐतिहासिक हार
सारांश
मुख्य बातें
डेमोक्रेटिक पार्टी ने 4 नवंबर 2026 के अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट दोनों पर नियंत्रण हासिल कर लिया, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका देते हुए। NBC न्यूज के अनुमानों के अनुसार, 435 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स को 256 सीटें मिल सकती हैं — बहुमत से 81 सीटें अधिक — जबकि 100 सदस्यीय सीनेट में उनकी संख्या कम से कम 54 तक पहुँच सकती है।
मुख्य चुनाव परिणाम
यह नतीजे ट्रंप के लिए व्यक्तिगत रूप से भी कड़ा झटका माने जा रहे हैं, क्योंकि उनके समर्थन वाले कई प्रमुख उम्मीदवार चुनाव हार गए। टेक्सास के रिपब्लिकन अटॉर्नी जनरल केन पैक्सटन — जिन पर रिश्वतखोरी के आरोप लगे थे और महाभियोग भी चला था — को भी हार का सामना करना पड़ा।
सबसे ऐतिहासिक परिणाम दो राज्यों से आए। कंसास में एडम हैमिल्टन ने 95 साल पुराने रिपब्लिकन दबदबे को तोड़ते हुए सीनेट सीट जीती — वह वहाँ से चुने जाने वाले 95 वर्षों में पहले डेमोक्रेट बने। वहीं, टेक्सास में हीना हिनोजोसा के गवर्नर चुने जाने से राज्य में 36 साल पुराना रिपब्लिकन युग समाप्त हो गया।
ट्रंप के वादे और मतदाताओं की निराशा
2024 के चुनाव अभियान के दौरान ट्रंप ने महंगाई कम करने और आम जनता की जिंदगी सुलभ बनाने का वादा किया था। लेकिन सत्ता में लौटने के बाद उनका ध्यान टैरिफ बढ़ाने, ईरान में सत्ता परिवर्तन की कोशिशों और व्हाइट हाउस को नया रूप देने जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहा। आलोचकों का कहना है कि ये कदम उन वादों से अलग थे जो उन्होंने जनता से किए थे।
गौरतलब है कि टैरिफ नीति, ईरान विवाद और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ उनके संबंधों को लेकर पहले से ही रिपब्लिकन पार्टी के भीतर असंतोष उभर रहा था।
ट्रंप की प्रतिक्रिया
हार की खबरें आने के बीच ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, 'मैं बैलेट पर नहीं था और अगर होता तो हम भारी बहुमत से जीतते।' हालाँकि, बाद में उनका रुख कुछ नरम दिखा। उन्होंने पॉलिटिको से कहा, 'मैं अगले दो साल सिर्फ हर चीज पर वीटो लगाकर नहीं बैठना चाहता।'
मंगलवार को मतदान के दौरान दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा था कि यदि डेमोक्रेट्स कोई कानून लाते हैं तो वह 'मिस्टर वीटो' बनकर उसे रोक देंगे। लेकिन चुनाव परिणामों के बाद उन्होंने कहा, 'हम डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करेंगे ताकि देश के लिए अच्छे नतीजे मिल सकें।'
डेमोक्रेट्स की रणनीति
प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक नेता और संभावित स्पीकर हकीम जेफ्रीज ने साफ संकेत दिया कि उनकी पार्टी बड़े बदलाव लाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा, 'हमें समझ है कि हाउस डेमोक्रेट्स के तौर पर हमें बड़े बदलाव देने होंगे। कई चीजें टूटी हुई हैं। हमें ऐसी कांग्रेस चाहिए जो सबसे पहले अमेरिकी जनता के हितों को प्राथमिकता दे।'
रिपब्लिकन पार्टी के भविष्य पर सवाल
इन नतीजों के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या रिपब्लिकन नेता ट्रंप से अलग राय रखने की हिम्मत दिखाएंगे। पहले जो नेता स्वतंत्र सोच दिखाते थे, उन्हें राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ता था — टेक्सास के सीनेटर जॉन कॉर्निन इसका उदाहरण माने जाते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि अब ईरान नीति, टैरिफ युद्ध और पुतिन के साथ संबंधों पर पार्टी के भीतर खुलकर असहमति जताई जा सकती है। आने वाले महीनों में ट्रंप का ईरान को लेकर रुख ही उनकी राजनीतिक दिशा का सबसे बड़ा परीक्षण होगा।