अमेरिकी मध्यावधि चुनाव 2026: ट्रंप की साख दांव पर, 17.4 करोड़ मतदाताओं का फैसला आज
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका में मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को मध्यावधि चुनाव (मिडटर्म इलेक्शन) के लिए मतदान जारी है, और दुनियाभर की निगाहें इस चुनाव पर टिकी हैं — क्योंकि इसे व्यापक रूप से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और उनके दूसरे कार्यकाल के प्रदर्शन पर जनता के फैसले के रूप में देखा जा रहा है। वर्मोंट राज्य में स्थानीय समयानुसार सुबह पाँच बजे मतदान का आगाज़ हुआ, और अलास्का आखिरी राज्य होगा जहाँ मतदान समाप्त होगा।
मतदान का व्यापक दायरा
इस बार चुनाव में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की 435 सीटें, सीनेट की 35 सीटें, 36 गवर्नर पद और हज़ारों राज्य व स्थानीय सीटें दाँव पर हैं। कुल 17.4 करोड़ (174 मिलियन) पंजीकृत मतदाताओं में से लगभग 5.7 करोड़ (57 मिलियन) लोग सोमवार शाम तक डाक मतपत्र या अग्रिम मतदान (अर्ली वोटिंग) के ज़रिए अपना मत दे चुके थे। बाकी मतदाता मंगलवार को मतदान केंद्रों पर पहुँच रहे हैं।
मतदान के दौरान कुछ तकनीकी खामियाँ भी सामने आईं। न्यूयॉर्क सिटी के उत्तर में स्थित वेस्टचेस्टर काउंटी में वोटिंग मशीनें खराब हो गईं, जिसके बाद चुनाव अधिकारियों ने मतदाताओं को कागजी मतपत्र सौंपने को कहा।
ट्रंप ने बनाया जनमत संग्रह जैसा माहौल
हालाँकि ट्रंप का नाम सीधे तौर पर किसी मतपत्र पर नहीं है, फिर भी उन्होंने इस चुनाव को अपने नेतृत्व पर जनमत संग्रह का रूप दे दिया है। 20 राज्यों में 30 रैलियाँ करने के बाद सोमवार की अपनी अंतिम चुनावी रैली में ट्रंप ने इसे 'जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मध्यावधि चुनाव' बताया। उन्होंने प्रचार के दौरान बार-बार मतदाताओं से कहा, 'मान लीजिए कि मेरा नाम ही मतपत्र पर है।'
ट्रंप ने यह भी स्वीकार किया कि मुकाबला आसान नहीं होगा। उन्होंने कहा, 'किसी वजह से सत्ता में बैठा राष्ट्रपति आमतौर पर मिडटर्म चुनाव नहीं जीतता, लेकिन हमने पूरी ताकत लगा दी है।' उनके प्रचार अभियान का बड़ा हिस्सा परंपरागत रिपब्लिकन गढ़ों में केंद्रित रहा, जो इस बात का संकेत है कि वह अपने पारंपरिक मतदाता आधार को पक्का बनाए रखने को लेकर सतर्क हैं।
गिरती अप्रूवल रेटिंग और आर्थिक चिंताएँ
सर्वेक्षणों के अनुसार, 2024 का राष्ट्रपति चुनाव 49.8 प्रतिशत वोटों के साथ जीतने वाले ट्रंप की लोकप्रियता में उल्लेखनीय गिरावट आई है। पोल्स के औसत आँकड़े बताते हैं कि कांग्रेस चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी को लगभग 52.1 प्रतिशत समर्थन मिल सकता है। ट्रंप की जॉब अप्रूवल रेटिंग उनके दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के 50.3 प्रतिशत से घटकर अब 39.1 प्रतिशत रह गई है, जबकि अस्वीकृति दर बढ़कर 58.8 प्रतिशत हो गई है।
आर्थिक मोर्चे पर, हालिया तिमाही में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की विकास दर 3.4 प्रतिशत रही — जिसे अर्थशास्त्री अच्छा प्रदर्शन मानते हैं — लेकिन सितंबर में महंगाई दर 3.7 प्रतिशत रही, जिसका असर खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा के सामान पर साफ दिखाई दिया। खाड़ी क्षेत्र में चल रहे तनाव के कारण पेट्रोल, डीजल और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी ने भी ट्रंप की लोकप्रियता पर असर डाला है।
इजराइल सहायता पर ट्रंप का बड़ा बयान
मतदान के दिन मंगलवार सुबह ट्रंप ने एक और चौंकाने वाला बयान दिया। फॉक्स न्यूज़ से बातचीत में उन्होंने कहा कि वह इजराइल को दी जाने वाली 4 अरब डॉलर की सहायता बंद करने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'हम उन्हें सबसे ज़्यादा मदद देते हैं और अब उन्हें इसकी ज़रूरत नहीं है।' ट्रंप ने यह भी दावा किया कि इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस फैसले से सहमत हैं। इसी दौरान ईरान के केश्म द्वीप से खबरें आईं कि अमेरिका ने वहाँ सोमवार को एक 'सीमित रक्षात्मक कार्रवाई' की।
नतीजों का इंतजार और आगे की राह
चुनाव के शुरुआती रुझान वॉशिंगटन के समयानुसार आधी रात के आसपास सामने आने की उम्मीद है। हालाँकि अंतिम नतीजे आने में कई दिन या सप्ताह भी लग सकते हैं, क्योंकि कुछ क्षेत्रों में मतगणना, पुनर्गणना और कानूनी चुनौतियाँ संभव हैं। अधिकांश सर्वेक्षणों में संकेत मिल रहे हैं कि डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल कर सकती है, जबकि सीनेट में मुकाबला बेहद करीबी है।
यदि डेमोक्रेट्स प्रतिनिधि सभा पर नियंत्रण हासिल कर लेते हैं, तो वे ट्रंप के शेष दो वर्षों में उनकी नीतियों को लागू करने में अवरोध खड़े कर सकते हैं। दूसरी ओर, ट्रंप के पास कार्यकारी आदेशों (एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स) का विकल्प मौजूद रहेगा, जिससे राष्ट्रपति की शक्तियों की सीमाओं को लेकर नई संवैधानिक और राजनीतिक बहस छिड़ सकती है। यह चुनाव न केवल अमेरिकी राजनीति की दशा तय करेगा, बल्कि वैश्विक कूटनीति और भारत-अमेरिका संबंधों पर भी इसके दूरगामी असर पड़ सकते हैं।