अमेरिका में मध्यावधि चुनाव 2026: ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी की कांग्रेस पर पकड़ की अग्निपरीक्षा
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका में मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को मध्यावधि चुनाव के लिए मतदान हो रहा है, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सामने प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों में अपना बहुमत बनाए रखने की चुनौती है। वहीं, डेमोक्रेटिक पार्टी की कोशिश है कि वह कांग्रेस के कम से कम एक सदन पर नियंत्रण हासिल कर सके। यह चुनाव ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के पहले 20 महीनों पर जनता की पहली बड़ी राष्ट्रव्यापी प्रतिक्रिया मानी जा रही है।
मध्यावधि चुनाव क्या है और इस बार क्या दाँव पर है
अमेरिका में राष्ट्रपति के चार वर्षीय कार्यकाल के ठीक बीच में होने वाले चुनाव को मध्यावधि चुनाव कहा जाता है। इसमें राष्ट्रपति पद नहीं, बल्कि कांग्रेस के सदस्य और राज्य प्रतिनिधि चुने जाते हैं। इस बार प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 100 में से 35 सीटों पर मतदान हो रहा है। इसके अलावा 36 राज्यों में गवर्नर पद के लिए भी चुनावी मुकाबला है।
वर्तमान में रिपब्लिकन पार्टी के पास प्रतिनिधि सभा में 214 बनाम 218 सीटों का न्यूनतम बहुमत है, जबकि सीनेट में उसकी स्थिति 53-47 की मज़बूत बढ़त वाली है। इन नतीजों से तय होगा कि ट्रंप अपने शेष दो वर्षों में विधायी एजेंडा कितनी आसानी से आगे बढ़ा सकेंगे।
प्रमुख चुनावी मुद्दे
इस बार मतदाताओं के लिए महंगाई, जीवनयापन की बढ़ती लागत, स्वास्थ्य सेवाएँ, आव्रजन नीति और ईरान के साथ जारी संघर्ष प्रमुख मुद्दे बनकर उभरे हैं। ट्रंप ने इस चुनाव को अपने दूसरे प्रशासन के कामकाज पर जनमत संग्रह घोषित किया था और मतदाताओं से आह्वान किया था कि वे ऐसे मतदान करें जैसे वे स्वयं उम्मीदवार हों।
यह ऐसे समय में आया है जब ईरान संघर्ष को लेकर कांग्रेस में धन आवंटन पर सत्ता-पक्ष और विपक्ष के बीच खींचतान जारी है। गौरतलब है कि ऐतिहासिक रूप से मध्यावधि चुनाव में सत्तारूढ़ दल को नुकसान उठाना पड़ता है।
दोनों दलों के लिए दाँव और जोखिम
यदि डेमोक्रेट्स प्रतिनिधि सभा जीतते हैं, तो समिति अध्यक्षों के ज़रिए ट्रंप प्रशासन की नीतियों की जाँच-पड़ताल और सरकारी निधियों पर उनकी पकड़ बढ़ेगी। सीनेट जीतने की स्थिति में पार्टी नेता चक शूमेर की पार्टी को न्यायाधीशों और कैबिनेट उम्मीदवारों की पुष्टि पर भी नियंत्रण मिल जाएगा।
हालाँकि डेमोक्रेट्स के लिए सीनेट का चुनावी नक्शा कठिन है क्योंकि कई प्रतिस्पर्धी सीटें उन राज्यों में हैं जहाँ ट्रंप ने दो अंकों के अंतर से जीत दर्ज की थी। ऐसे में सदन जीतकर सीनेट गँवाना डेमोक्रेट्स को नियुक्तियों के नियंत्रण से वंचित कर देगा — जो आधी जीत होगी।
मतगणना का कार्यक्रम
पहले राज्यों में मतदान शाम 6 बजे ईएसटी पर समाप्त होगा। हालाँकि अलास्का की रैंक-चॉइस मतगणना प्रणाली और कैलिफोर्निया की धीमी मतगणना प्रक्रिया को देखते हुए, करीबी मुकाबलों के अंतिम नतीजे आने में कई दिन लग सकते हैं।
आगे क्या होगा
नवनिर्वाचित सांसद 3 जनवरी 2027 को शपथ लेंगे। इन चुनावों के नतीजे न केवल अमेरिकी घरेलू राजनीति की दिशा तय करेंगे, बल्कि ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति — विशेषकर ईरान, व्यापार और आव्रजन के मोर्चों पर — को भी गहराई से प्रभावित करेंगे। भारत-अमेरिका संबंधों और व्यापार समझौतों पर भी इन नतीजों की छाया पड़ना तय माना जा रहा है।