4 नवंबर पंचांग: अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:42 से 12:26 बजे तक, सुबह 8 बजे तक रहेगा शुभ ब्रह्म योग
सारांश
मुख्य बातें
बुधवार, 4 नवंबर 2026 के पंचांग के अनुसार, इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:42 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक रहेगा — जो दिन का सर्वश्रेष्ठ शुभ समय माना जाता है। साथ ही, ब्रह्म योग सुबह 8:00 बजे तक विद्यमान रहेगा, जो नए कार्यों की शुरुआत और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत फलदायी है। हिंदू काल-गणना पद्धति में पंचांग का विशेष स्थान है, जो सूर्य, चंद्रमा और ग्रहों की स्थिति पर आधारित होता है।
तिथि, सूर्योदय और चंद्रोदय
कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि मंगलवार को सुबह 11:54 बजे से प्रारंभ होकर बुधवार को सुबह 11:03 बजे तक रहेगी। इसके पश्चात एकादशी तिथि आरंभ होगी, जो 5 नवंबर को सुबह 10:35 बजे तक रहेगी।
बुधवार को सूर्योदय सुबह 6:37 बजे और सूर्यास्त शाम 5:43 बजे होगा। चंद्रोदय रात 1:53 बजे और चंद्रास्त अगले दिन दोपहर 2:38 बजे होगा।
नक्षत्र और ग्रह स्थिति
पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य देव स्वाति नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र में स्वाति नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता पवन देव (वायु) हैं और इसके स्वामी राहु हैं। इस नक्षत्र में सूर्य की स्थिति लोगों में पुरानी परिस्थितियों से मुक्त होकर स्वतंत्र रूप से कार्य करने की प्रेरणा जागृत करती है।
सूर्य तुला राशि में रहेंगे। ज्योतिष के अनुसार, तुला राशि में सूर्य का होना 'नीच' स्थिति मानी जाती है, क्योंकि तुला वायु तत्व और शुक्र ग्रह के अधीन है — जो सूर्य के अग्नि स्वभाव के विपरीत है। इस स्थिति में आत्मबल थोड़ा कमज़ोर अनुभव हो सकता है और निर्णय लेने में सावधानी बरतनी चाहिए। वहीं, चंद्र देव सिंह राशि में रहेंगे, जिससे आत्मविश्वास और मनोबल ऊँचा रहने की संभावना है।
शुभ मुहूर्त और योग
ब्रह्म योग बुधवार को सुबह 8:00 बजे तक रहेगा, इसके बाद इंद्र योग प्रारंभ होगा। 27 नित्य योगों में 25वाँ माना जाने वाला ब्रह्म योग शांति कर्म, धार्मिक अनुष्ठान, नए कार्यों की शुरुआत और स्वास्थ्य संबंधी उपचार के लिए विशेष रूप से शुभ है।
अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:42 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक — अर्थात लगभग 44 मिनट — रहेगा। यह दिन का वह क्षण है जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर होता है। मान्यता है कि इस मुहूर्त में आरंभ किए गए कार्यों पर सभी प्रकार के दोषों और अशुभ प्रभावों का नाश होता है।
अमृतकाल रात 9:24 बजे से 11:00 बजे तक रहेगा। यह समय नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
अशुभ काल और दिशाशूल
राहुकाल दोपहर 12:10 बजे से 1:33 बजे तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस अवधि में कोई नया या शुभ कार्य आरंभ करना वर्जित माना जाता है। जो काम पहले से चल रहे हों, वे जारी रखे जा सकते हैं।
यमगंड काल सुबह 8:00 बजे से 9:24 बजे तक रहेगा — यह समय नए कार्यों, यात्रा और धन के लेन-देन के लिए अशुभ माना जाता है। गुलिक काल सुबह 10:47 बजे से दोपहर 12:10 बजे तक रहेगा, जिसे 'विषैला समय' भी कहा जाता है। हालाँकि, इस काल में बैंक में पैसे जमा करना, दान देना या दीर्घकालिक निवेश करना अपेक्षाकृत अनुकूल माना गया है।
बुधवार को दिशाशूल उत्तर दिशा (ईशान कोण) में रहेगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस दिन उत्तर-पूर्व दिशा में यात्रा आरंभ करने से बचना चाहिए। इस दिशा में यात्रा पर निकलने से पूर्व शास्त्र-सम्मत उपाय करने की सलाह दी जाती है।