29 अक्टूबर 2026 का पंचांग: अमृतकाल सुबह 8:17–9:44 बजे, दक्षिण दिशा में यात्रा वर्जित
सारांश
मुख्य बातें
हिंदू पंचांग के अनुसार 29 अक्टूबर 2026 (गुरुवार) को कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि रात 10:10 बजे तक रहेगी, इसके पश्चात पंचमी तिथि प्रारंभ होगी जो 30 अक्टूबर की रात 7:25 बजे तक चलेगी। इस दिन सूर्योदय सुबह 6:34 बजे और सूर्यास्त शाम 5:46 बजे होगा, जबकि चंद्रोदय रात 8:33 बजे और चंद्रास्त अगले दिन सुबह 10:52 बजे होगा। शुभ कार्यों, पूजा-पाठ, यात्रा और निवेश की योजना बनाने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह पंचांग विशेष मार्गदर्शन प्रस्तुत करता है।
अमृतकाल और अभिजीत मुहूर्त
इस दिन का सर्वाधिक शुभ समय अमृतकाल सुबह 8:17 बजे से 9:44 बजे तक रहेगा। पंचांग शास्त्र के अनुसार अमृतकाल अत्यंत मंगलकारी और सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण होता है — नए व्यापार आरंभ, निवेश, महत्वपूर्ण यात्रा और पूजा-पाठ के लिए यह समयावधि सर्वोत्तम मानी गई है।
इसके अतिरिक्त अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा। यह दिनभर का सबसे शुभ और फलदायी मुहूर्त माना जाता है — जब सूर्य ठीक मस्तक के ऊपर होते हैं। मान्यता है कि इस बेला में किए गए कार्यों से समस्त अशुभ प्रभाव स्वतः निष्प्रभावी हो जाते हैं।
नक्षत्र, राशि और ग्रह स्थिति
पंचांग के अनुसार गुरुवार को सूर्य देव स्वाति नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। ज्योतिष मान्यता के अनुसार स्वाति नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता पवन देव (वायु) हैं और इसके स्वामी राहु हैं। इस नक्षत्र में सूर्य की स्थिति व्यक्ति में पुरानी बाधाओं से मुक्त होकर स्वतंत्र रूप से कार्य करने की प्रेरणा जागृत करती है।
सूर्य तुला राशि में रहेंगे, जिसे ज्योतिष शास्त्र में सूर्य का नीचस्थ होना कहा जाता है। अग्नि तत्व के कारक सूर्य और वायु तत्व की तुला राशि के इस संयोग से आत्मबल थोड़ा शिथिल अनुभव हो सकता है और निर्णय लेने में सावधानी अपेक्षित है। दूसरी ओर, चंद्र देव वृषभ राशि में संचार करेंगे — ज्योतिष में यह चंद्रमा की उच्च स्थिति मानी जाती है। इस योग से मन स्थिर, शांत और संयमित रहता है तथा भावनात्मक उतार-चढ़ाव से राहत मिलती है।
अशुभ काल: राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल
नए अथवा शुभ कार्यों की शुरुआत से पहले निम्नलिखित अशुभ कालों का ध्यान रखना आवश्यक है —
राहुकाल दोपहर 1:34 बजे से 2:58 बजे तक रहेगा। यह दिन का वह प्रहर है जिसमें कोई नया कार्य आरंभ करना वर्जित माना जाता है; हालाँकि पूर्व से चल रहे कार्य जारी रखे जा सकते हैं।
यमगंड काल सुबह 6:34 बजे से 7:58 बजे तक रहेगा। यह समय यमराज से संबद्ध माना जाता है और इस दौरान नई यात्रा, नया व्यापार तथा आर्थिक लेन-देन से परहेज की सलाह दी जाती है।
गुलिक काल सुबह 9:22 बजे से दोपहर 10:46 बजे तक रहेगा। इसे 'विषैला समय' भी कहा जाता है और नए कार्यों के लिए अनुपयुक्त माना गया है, यद्यपि बैंक में जमा, दान-पुण्य और नियमित कार्य इस काल में स्वीकार्य हैं।
योग और दिशाशूल
गुरुवार को रात 12:05 बजे तक परिघ योग रहेगा। यह पंचांग के 27 नित्य योगों में 19वाँ योग है और इसे मुहूर्त शास्त्र में सामान्यतः बाधाकारक माना गया है। इसके अधिष्ठाता देवता भगवान विश्वकर्मा (त्वष्टा) और संचालक ग्रह शनि देव हैं। मध्यरात्रि के पश्चात शिव योग प्रारंभ होगा, जो अत्यंत शुभ माना जाता है।
इस दिन दिशाशूल दक्षिण दिशा में रहेगा। ज्योतिष एवं वास्तु शास्त्र के अनुसार दिशाशूल उस दिशा को इंगित करता है जिसमें उस दिन विशेष यात्रा करना अशुभ माना गया है। अतः गुरुवार को दक्षिण दिशा की ओर यात्रा यथासंभव टाली जानी चाहिए।
संक्षेप में, 29 अक्टूबर 2026 का पंचांग उन जातकों के लिए सुबह के अमृतकाल और अभिजीत मुहूर्त का सदुपयोग करने का संदेश देता है जो कोई महत्वपूर्ण कार्य आरंभ करना चाहते हैं, साथ ही राहुकाल, यमगंड और दक्षिण दिशा की यात्रा से सावधानी बरतने की सलाह देता है।