28 अक्टूबर 2026
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चक्रवात 'अर्नब': ओडिशा में 313 रिस्पॉन्स टीमें तैनात, मलकानगिरी समेत 8 जिले हाई-अलर्ट पर

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चक्रवात 'अर्नब': ओडिशा में 313 रिस्पॉन्स टीमें तैनात, मलकानगिरी समेत 8 जिले हाई-अलर्ट पर

सारांश

चक्रवात 'अर्नब' के काकीनाडा में लैंडफॉल के बाद ओडिशा ने अपनी पूरी आपदा मशीनरी सक्रिय कर दी है — 313 रिस्पॉन्स टीमें, 2,037 आश्रय स्थल और 1,898 हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं को अस्पताल में स्थानांतरित। मलकानगिरी सहित 8 जिले हाई-अलर्ट पर हैं।

मुख्य बातें

चक्रवात 'अर्नब' ने आंध्र प्रदेश के काकीनाडा के निकट रात लगभग 1:30 बजे लैंडफॉल की प्रक्रिया शुरू की, जो 28 अक्टूबर की सुबह तक जारी थी।
ओडिशा में 313 इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमें तैनात — जिनमें ODRAF की 60 , NDRF की 9 और अग्निशमन की 244 टीमें शामिल।
नागरिकों के लिए 2,037 आश्रय स्थल तैयार; इनमें 141 स्थायी और 1,926 अस्थायी केंद्र।
1,898 हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं को पहले ही स्वास्थ्य केंद्रों में स्थानांतरित किया गया; मंगलवार को कई ने सुरक्षित प्रसव किया।
पंजीकृत सभी 19,143 मछली पकड़ने वाली नावें किनारे पर वापस; मलकानगिरी समेत 8 जिले हाई-अलर्ट पर।
मंत्री सुरेश पुजारी के अनुसार 28 अक्टूबर की सुबह तक किसी के हताहत होने या संचार बाधित होने की कोई सूचना नहीं।

चक्रवात 'अर्नब' के आंध्र प्रदेश के काकीनाडा के निकट लैंडफॉल के बाद ओडिशा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को राज्य की आपदा-तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। अधिकारियों के अनुसार चक्रवाती सिस्टम के उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने की स्थिति में मलकानगिरी जिले पर सर्वाधिक असर पड़ने की आशंका है।

मुख्य घटनाक्रम

पुजारी ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि रात लगभग 1:30 बजे काकीनाडा के पास लैंडफॉल की प्रक्रिया शुरू हुई और 28 अक्टूबर की सुबह तक यह जारी थी। ताज़ा जानकारी के अनुसार चक्रवाती सिस्टम फिलहाल एक ही स्थान पर ठहरा हुआ है और उत्तर तथा उत्तर-पश्चिम दिशा में गति की प्रतीक्षा में है।

समीक्षा बैठक में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरबिंद पाधी, विशेष राहत आयुक्त राजेश प्रभाकर पाटिल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

प्रभावित जिले और खतरे का दायरा

अधिकारियों के अनुसार मलकानगिरी, कोरापुट, नबरंगपुर, गंजाम, गजपति और रायगड़ा जिलों पर सीधा असर पड़ने की आशंका है। इसके अतिरिक्त कंधमाल, कालाहांडी और नुआपाड़ा में भी एहतियाती इंतजाम किए गए हैं। दक्षिणी ओडिशा के पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की आशंका को देखते हुए जोखिम वाले रास्ते आवश्यकता पड़ने पर बंद करने के निर्देश दिए गए हैं।

तैनाती और राहत व्यवस्था

मंत्री पुजारी ने बताया कि संवेदनशील इलाकों में कुल 313 इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमें तैनात की गई हैं — जिनमें ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फोर्स (ODRAF) की 60 टीमें, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की 9 टीमें और अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं की 244 टीमें शामिल हैं।

विस्थापन की स्थिति में नागरिकों के लिए 2,037 आश्रय स्थल तैयार रखे गए हैं। इनमें 141 स्थायी चक्रवात आश्रय स्थल और 1,926 अस्थायी राहत केंद्र — जिनमें स्कूल व कॉलेज भी शामिल हैं — हैं।

संवेदनशील समूहों की सुरक्षा

प्रशासन ने 4,072 ऐसी गर्भवती महिलाओं की पहचान की थी जिनकी प्रसव तिथि निकट थी। इनमें से 1,898 हाई-रिस्क महिलाओं को पहले ही स्वास्थ्य केंद्रों में स्थानांतरित किया जा चुका था। मंत्री ने बताया कि मंगलवार को इनमें से कुछ महिलाओं ने सुरक्षित रूप से शिशुओं को जन्म दिया। इसके साथ ही पंजीकृत सभी 19,143 मछली पकड़ने वाली नावें पहले ही किनारे पर वापस बुला ली गई थीं।

सरकार की प्रतिक्रिया और स्थिति का जायज़ा

मंत्री पुजारी ने कहा, 'हमारी प्राथमिकता यह है कि किसी की जान न जाए। हमने लोगों की जान और संपत्ति की सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं।' उन्होंने पुष्टि की कि 28 अक्टूबर की सुबह तक किसी के हताहत होने, संचार सेवाओं में रुकावट आने या आम जनता को किसी बड़ी परेशानी की सूचना नहीं मिली है।

यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा पिछले कुछ वर्षों में अपनी आपदा-प्रबंधन क्षमता को लगातार मजबूत करता रहा है — विशेष रूप से 1999 के महाचक्रवात के बाद से राज्य ने चक्रवात-प्रतिक्रिया को एक संस्थागत ढाँचे में ढाला है। आठ संवेदनशील जिलों में मंत्रियों और अधिकारियों की जमीनी तैनाती इसी परंपरा का हिस्सा है। चक्रवात की दिशा और तीव्रता की निरंतर निगरानी जारी है और स्थिति के अनुसार अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

898 हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं को पहले ही अस्पताल पहुँचाना जैसे कदम व्यवस्था की गहराई दिखाते हैं, लेकिन मलकानगिरी और कोरापुट जैसे दुर्गम पहाड़ी जिलों में भूस्खलन का खतरा उन सीमाओं की याद दिलाता है जो सर्वश्रेष्ठ तैयारी भी नहीं पाट सकती। यह वह क्षण है जब संस्थागत योजना और जमीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई सबसे स्पष्ट होती है।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चक्रवात 'अर्नब' ओडिशा के किन जिलों को प्रभावित कर सकता है?
अधिकारियों के अनुसार मलकानगिरी जिले पर सर्वाधिक असर पड़ने की आशंका है। कोरापुट, नबरंगपुर, गंजाम, गजपति और रायगड़ा के भी प्रभावित होने की संभावना है, जबकि कंधमाल, कालाहांडी और नुआपाड़ा में एहतियाती इंतजाम किए गए हैं।
ओडिशा में चक्रवात 'अर्नब' से निपटने के लिए कितनी टीमें तैनात हैं?
राज्य में कुल 313 इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमें तैनात की गई हैं — ODRAF की 60, NDRF की 9 और अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं की 244 टीमें।
चक्रवात 'अर्नब' का लैंडफॉल कहाँ और कब हुआ?
मंत्री सुरेश पुजारी के अनुसार 28 अक्टूबर 2026 की रात लगभग 1:30 बजे आंध्र प्रदेश के काकीनाडा के निकट लैंडफॉल की प्रक्रिया शुरू हुई। 28 अक्टूबर की सुबह तक यह प्रक्रिया जारी थी और चक्रवाती सिस्टम उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने की प्रतीक्षा में था।
ओडिशा में विस्थापित लोगों के लिए क्या व्यवस्था की गई है?
राज्य में 2,037 आश्रय स्थल तैयार रखे गए हैं, जिनमें 141 स्थायी चक्रवात आश्रय स्थल और 1,926 अस्थायी राहत केंद्र — जिनमें स्कूल व कॉलेज शामिल हैं — हैं।
चक्रवात 'अर्नब' से गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए?
प्रशासन ने 4,072 गर्भवती महिलाओं की पहचान की थी, जिनमें से 1,898 हाई-रिस्क महिलाओं को पहले ही स्वास्थ्य केंद्रों में स्थानांतरित किया जा चुका था। मंत्री पुजारी ने बताया कि मंगलवार को इनमें से कुछ महिलाओं ने सुरक्षित प्रसव भी किया।
राष्ट्र प्रेस
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