महाकालेश्वर मंदिर में भव्य भस्म आरती: राम नाम के बेलपत्र और चंदन से हुआ बाबा महाकाल का दिव्य शृंगार
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में 28 अक्टूबर 2026 को कार्तिक कृष्ण पक्ष तृतीया के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। राम नाम अंकित बेलपत्र और सुगंधित चंदन से सजे बाबा के दिव्य स्वरूप के दर्शन पाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु रात से ही मंदिर परिसर में कतारबद्ध हो गए थे।
कपाट उद्घाटन और जलाभिषेक
बुधवार तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों की मंगल ध्वनि के बीच बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। मंत्रोच्चार के बीच सर्वप्रथम जलाभिषेक किया गया, तत्पश्चात दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित करने की परंपरा भी निभाई गई।
दिव्य शृंगार और भस्म आरती
चंदन और राम नाम अंकित बेलपत्रों से बाबा महाकाल का अलौकिक शृंगार किया गया। कपूर की आरती के बाद बाबा ने मुकुट धारण किया। इसके उपरांत झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद की गूंज के बीच महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से परंपरानुसार भस्म आरती अर्पित की गई। मान्यता के अनुसार भस्म अर्पित होने के पश्चात बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।
श्रद्धालुओं की भावपूर्ण उपस्थिति
बाबा महाकाल के इस अद्भुत स्वरूप को देख श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयकारों, घंटियों की टंकार और शंखध्वनि से गुंजायमान हो उठा। देशभर से आए भक्तों ने इस अलौकिक दृश्य को अपने जीवन का सौभाग्य बताया।
महाकाल भस्म आरती का महत्त्व
गौरतलब है कि महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में एकमात्र दक्षिणमुखी शिवलिंग है, जिसे विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण माना जाता है। यहाँ की भस्म आरती न केवल धार्मिक दृष्टि से अपितु सांस्कृतिक विरासत की दृष्टि से भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। प्रतिदिन तड़के होने वाली इस आरती में शामिल होने के लिए श्रद्धालु देश के कोने-कोने से उज्जैन पहुँचते हैं और दर्शन कर स्वयं को कृतार्थ अनुभव करते हैं।