28 अक्टूबर 2026
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महाकालेश्वर मंदिर में भव्य भस्म आरती: राम नाम के बेलपत्र और चंदन से हुआ बाबा महाकाल का दिव्य शृंगार

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महाकालेश्वर मंदिर में भव्य भस्म आरती: राम नाम के बेलपत्र और चंदन से हुआ बाबा महाकाल का दिव्य शृंगार

सारांश

कार्तिक कृष्ण तृतीया पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में राम नाम के बेलपत्र और चंदन से बाबा का अलौकिक शृंगार हुआ। तड़के कपाट खुलते ही पंचामृत अभिषेक और भस्म आरती संपन्न हुई; 'जय श्री महाकाल' के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा।

मुख्य बातें

28 अक्टूबर 2026 को कार्तिक कृष्ण पक्ष तृतीया पर श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में भव्य भस्म आरती संपन्न हुई।
राम नाम अंकित बेलपत्र और चंदन से बाबा महाकाल का दिव्य शृंगार किया गया।
भगवान वीरभद्र की आज्ञा के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ कपाट खुले; पंचामृत अभिषेक किया गया।
परंपरानुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म आरती अर्पित की गई।
बड़ी संख्या में श्रद्धालु रात से ही कतारबद्ध होकर 'जय श्री महाकाल' के जयकारों के साथ दर्शन को पहुँचे।

उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में 28 अक्टूबर 2026 को कार्तिक कृष्ण पक्ष तृतीया के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। राम नाम अंकित बेलपत्र और सुगंधित चंदन से सजे बाबा के दिव्य स्वरूप के दर्शन पाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु रात से ही मंदिर परिसर में कतारबद्ध हो गए थे।

कपाट उद्घाटन और जलाभिषेक

बुधवार तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों की मंगल ध्वनि के बीच बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। मंत्रोच्चार के बीच सर्वप्रथम जलाभिषेक किया गया, तत्पश्चात दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित करने की परंपरा भी निभाई गई।

दिव्य शृंगार और भस्म आरती

चंदन और राम नाम अंकित बेलपत्रों से बाबा महाकाल का अलौकिक शृंगार किया गया। कपूर की आरती के बाद बाबा ने मुकुट धारण किया। इसके उपरांत झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद की गूंज के बीच महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से परंपरानुसार भस्म आरती अर्पित की गई। मान्यता के अनुसार भस्म अर्पित होने के पश्चात बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।

श्रद्धालुओं की भावपूर्ण उपस्थिति

बाबा महाकाल के इस अद्भुत स्वरूप को देख श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयकारों, घंटियों की टंकार और शंखध्वनि से गुंजायमान हो उठा। देशभर से आए भक्तों ने इस अलौकिक दृश्य को अपने जीवन का सौभाग्य बताया।

महाकाल भस्म आरती का महत्त्व

गौरतलब है कि महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में एकमात्र दक्षिणमुखी शिवलिंग है, जिसे विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण माना जाता है। यहाँ की भस्म आरती न केवल धार्मिक दृष्टि से अपितु सांस्कृतिक विरासत की दृष्टि से भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। प्रतिदिन तड़के होने वाली इस आरती में शामिल होने के लिए श्रद्धालु देश के कोने-कोने से उज्जैन पहुँचते हैं और दर्शन कर स्वयं को कृतार्थ अनुभव करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

परंतु कार्तिक माह की विशेष तिथियों पर श्रद्धालुओं की उपस्थिति कई गुना बढ़ जाती है — यह भारत में धार्मिक पर्यटन की बढ़ती लहर का प्रतिबिंब है। उज्जैन महाकाल लोक परियोजना के बाद से मंदिर की आवक में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो धर्म और विकास के समन्वय का व्यावहारिक उदाहरण बना है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि बड़े पर्व-पर्वों पर भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना मंदिर प्रशासन के लिए निरंतर चुनौती बनी रहती है।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती क्या है?
भस्म आरती उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन तड़के होने वाली एक अनूठी धार्मिक परंपरा है, जिसमें बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है। मान्यता है कि इस आरती के बाद बाबा निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं।
28 अक्टूबर 2026 को महाकाल का शृंगार किससे किया गया?
28 अक्टूबर 2026 को कार्तिक कृष्ण पक्ष तृतीया पर बाबा महाकाल का शृंगार राम नाम अंकित बेलपत्र और चंदन से किया गया। कपूर की आरती के बाद बाबा ने मुकुट भी धारण किया।
भस्म आरती में भस्म कौन अर्पित करता है?
परंपरा के अनुसार महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से अर्पित की जाती है। यह सदियों पुरानी परंपरा आज भी उसी विधि-विधान से निभाई जाती है।
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का क्या महत्त्व है?
महाकालेश्वर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और एकमात्र दक्षिणमुखी शिवलिंग माना जाता है। यह उज्जैन, मध्य प्रदेश में स्थित है और प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए आते हैं।
महाकाल के दर्शन के लिए भक्त कब से कतार में लगते हैं?
विशेष तिथियों और पर्वों पर श्रद्धालु रात से ही मंदिर परिसर में कतारबद्ध होने लगते हैं ताकि तड़के होने वाली भस्म आरती के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त कर सकें। 28 अक्टूबर को भी बड़ी संख्या में भक्त रात से ही उपस्थित थे।
राष्ट्र प्रेस
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