5 अक्टूबर 2026
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उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती: राजा स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

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उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती: राजा स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

सारांश

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में आश्विन कृष्ण दशमी पर भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ। महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पित होते ही बाबा महाकाल ने राजा स्वरूप में दर्शन दिए। ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गूँज उठा।

मुख्य बातें

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 5 अक्टूबर 2026 को आश्विन कृष्ण पक्ष दशमी पर भस्म आरती संपन्न हुई।
महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से परंपरानुसार बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई।
दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से भगवान का अभिषेक हुआ।
भस्म आरती के बाद बाबा को राजा स्वरूप में सुसज्जित कर चंदन तिलक और आभूषण अर्पित किए गए।
बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूर्व रात्रि से ही कतारबद्ध होकर दर्शन के लिए उपस्थित रहे।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 5 अक्टूबर 2026 को आश्विन कृष्ण पक्ष दशमी के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। भगवान को भस्म अर्पित कर राजा स्वरूप में सुसज्जित किया गया, जिसके दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूर्व रात्रि से ही कतारबद्ध थे।

कपाट खुलने का दिव्य क्षण

सोमवार की भोर में भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों की गूँज के बीच बाबा महाकाल के कपाट विधिवत खोले गए। मंदिर परिसर में घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार की त्रिवेणी प्रवाहित हुई। कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं का पूरा समुद्र 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से तरंगित हो उठा।

षोडशोपचार पूजन और अभिषेक

मंत्रोच्चार के मध्य भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। तत्पश्चात दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से भव्य अभिषेक संपन्न हुआ। प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया और कपूर आरती के बाद बाबा ने मुकुट धारण किया।

भस्म आरती का पवित्र अनुष्ठान

परंपरानुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई। झांझ-मंजीरों, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के साथ भस्म आरती का पवित्र क्रम पूर्ण हुआ। मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के पश्चात बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं — यही विश्वास लाखों श्रद्धालुओं को उज्जैन की पावन धरती तक खींच लाता है।

राजा स्वरूप में भव्य शृंगार

भस्म आरती के उपरांत बाबा महाकाल को राजा स्वरूप में सुसज्जित किया गया। पंचामृत पूजन के बाद चंदन तिलक और बहुमूल्य आभूषण अर्पित किए गए। इस अलौकिक शृंगार के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं ने पूर्व रात्रि से ही मंदिर परिसर में अपना स्थान सुनिश्चित किया था।

श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र

गौरतलब है कि महाकालेश्वर मंदिर देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहाँ की भस्म आरती अपनी अनूठी परंपरा के कारण विश्वभर के हिंदू श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्त्व रखती है। आश्विन माह के कृष्ण पक्ष में यह दर्शन और भी दुर्लभ एवं फलदायी माने जाते हैं। आगामी दिनों में भी इसी प्रकार के आयोजन जारी रहेंगे और श्रद्धालुओं का आगमन बना रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान का आधारस्तंभ है — जो प्रतिवर्ष लाखों तीर्थयात्रियों को मध्य प्रदेश की ओर आकर्षित करती है। आश्विन माह की विशेष तिथियों पर श्रद्धालुओं की संख्या में असाधारण वृद्धि यह दर्शाती है कि धार्मिक पर्यटन अभी भी ग्रामीण और कस्बाई अर्थव्यवस्था की एक प्रमुख चालक शक्ति है। यह कवरेज याद दिलाती है कि मंदिर प्रशासन और राज्य सरकार के लिए भीड़ प्रबंधन और बुनियादी ढाँचे की गुणवत्ता उतनी ही आस्था की कसौटी है जितनी परंपरा का निर्वहन।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती क्या होती है?
भस्म आरती उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर की एक अद्वितीय धार्मिक परंपरा है, जिसमें महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पण के पश्चात बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।
5 अक्टूबर 2026 को महाकाल की भस्म आरती क्यों विशेष थी?
यह भस्म आरती आश्विन कृष्ण पक्ष दशमी के पावन अवसर पर संपन्न हुई, जो धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्त्व की तिथि है। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूर्व रात्रि से ही मंदिर में दर्शन के लिए कतारबद्ध थे।
बाबा महाकाल की भस्म आरती में कौन-कौन से अनुष्ठान होते हैं?
आरती में सर्वप्रथम भगवान वीरभद्र की आज्ञा ली जाती है, फिर जलाभिषेक और पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, फलरस) से अभिषेक होता है। इसके बाद कपूर आरती, मुकुट धारण, भस्म अर्पण और राजा स्वरूप में शृंगार के साथ चंदन तिलक व आभूषण चढ़ाए जाते हैं।
महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती कौन करता है?
परंपरानुसार महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से की जाती है। यह परंपरा सदियों पुरानी है और इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है।
उज्जैन में महाकाल भस्म आरती के दर्शन कैसे करें?
श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में भस्म आरती के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को ऑनलाइन या मंदिर प्रशासन के माध्यम से पूर्व अनुमति लेनी होती है। विशेष तिथियों पर भीड़ अधिक होती है, इसलिए पहले से पंजीकरण कराना उचित रहता है।
राष्ट्र प्रेस
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