उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती: राजा स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 5 अक्टूबर 2026 को आश्विन कृष्ण पक्ष दशमी के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। भगवान को भस्म अर्पित कर राजा स्वरूप में सुसज्जित किया गया, जिसके दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूर्व रात्रि से ही कतारबद्ध थे।
कपाट खुलने का दिव्य क्षण
सोमवार की भोर में भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों की गूँज के बीच बाबा महाकाल के कपाट विधिवत खोले गए। मंदिर परिसर में घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार की त्रिवेणी प्रवाहित हुई। कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं का पूरा समुद्र 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से तरंगित हो उठा।
षोडशोपचार पूजन और अभिषेक
मंत्रोच्चार के मध्य भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। तत्पश्चात दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से भव्य अभिषेक संपन्न हुआ। प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया और कपूर आरती के बाद बाबा ने मुकुट धारण किया।
भस्म आरती का पवित्र अनुष्ठान
परंपरानुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई। झांझ-मंजीरों, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के साथ भस्म आरती का पवित्र क्रम पूर्ण हुआ। मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के पश्चात बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं — यही विश्वास लाखों श्रद्धालुओं को उज्जैन की पावन धरती तक खींच लाता है।
राजा स्वरूप में भव्य शृंगार
भस्म आरती के उपरांत बाबा महाकाल को राजा स्वरूप में सुसज्जित किया गया। पंचामृत पूजन के बाद चंदन तिलक और बहुमूल्य आभूषण अर्पित किए गए। इस अलौकिक शृंगार के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं ने पूर्व रात्रि से ही मंदिर परिसर में अपना स्थान सुनिश्चित किया था।
श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र
गौरतलब है कि महाकालेश्वर मंदिर देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहाँ की भस्म आरती अपनी अनूठी परंपरा के कारण विश्वभर के हिंदू श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्त्व रखती है। आश्विन माह के कृष्ण पक्ष में यह दर्शन और भी दुर्लभ एवं फलदायी माने जाते हैं। आगामी दिनों में भी इसी प्रकार के आयोजन जारी रहेंगे और श्रद्धालुओं का आगमन बना रहेगा।