उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती: मस्तक पर चंद्रमा, शीश पर पुष्पमाला से भव्य शृंगार
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में 1 नवंबर 2026 को कार्तिक कृष्ण पक्ष सप्तमी तिथि पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। मस्तक पर चंद्रमा और शीश पर पुष्पमाला अर्पित कर बाबा का अद्भुत शृंगार किया गया, जिसके दर्शन पाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु रात से ही कतारबद्ध थे।
मुख्य घटनाक्रम
रविवार तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। कपाट उद्घाटन के साथ ही मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शहद तथा फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ।
प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया। कपूर की आरती के पश्चात बाबा महाकाल ने मुकुट धारण किया। तत्पश्चात झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के मध्य भस्म आरती का आयोजन हुआ।
भव्य शृंगार का स्वरूप
बाबा महाकाल के मस्तक पर चंद्रमा और शीश पर पुष्पमाला अर्पित कर उनका भव्य शृंगार किया गया। बाबा का यह अलौकिक स्वरूप देख उपस्थित भक्त भाव-विभोर हो उठे। मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष, घंटियों की ध्वनि, शंखनाद और मंत्रोच्चार से गुंजायमान रहा।
परंपरा और मान्यता
परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यह परंपरा सदियों से अनवरत चली आ रही है और इसे ज्योतिर्लिंग उपासना की सर्वोच्च विधि माना जाता है।
आम जनता पर असर
दिव्य शृंगार और भस्म आरती संपन्न होने के बाद श्रद्धालुओं को बाबा महाकाल के दर्शन कराए गए। उज्जैन की पावन नगरी में आस्था के इस महापर्व में सम्मिलित होने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुँचे और दर्शन कर खुद को धन्य महसूस किया। गौरतलब है कि महाकालेश्वर मंदिर के भस्म आरती आयोजन में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं, तथापि विशेष तिथियों पर यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है।
आगामी कार्तिक माह की शेष तिथियों पर भी इसी भव्यता के साथ नित्य आरती और विशेष शृंगार के कार्यक्रम आयोजित होने की संभावना है।