महाअष्टमी पर उज्जैन में बाबा महाकाल का देवी स्वरूप शृंगार, चांदी-स्वर्ण आभूषणों से भव्य दर्शन
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 19 अक्टूबर 2026 को आश्विन शुक्ल पक्ष महाअष्टमी के पावन अवसर पर बाबा महाकाल का विशेष देवी स्वरूप में शृंगार किया गया। चांदी और स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत इस अलौकिक स्वरूप के दर्शन के लिए रात से ही हज़ारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में कतारबद्ध हो गए थे। भस्म आरती के इस दुर्लभ दृश्य ने समस्त मंदिर परिसर को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया।
कपाट उद्घाटन और पूजा विधि
सोमवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के बीच बाबा महाकाल के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। मंत्रोच्चार के बीच सर्वप्रथम जलाभिषेक किया गया, इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक हुआ। प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया, तत्पश्चात कपूर आरती के बाद बाबा ने मुकुट धारण किया।
भस्म आरती का दिव्य क्षण
परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के साथ हुई इस भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित हुए।
महाअष्टमी का विशेष देवी स्वरूप शृंगार
महाअष्टमी के विशेष अवसर पर बाबा महाकाल का देवी स्वरूप में श्रृंगार किया गया — यह परंपरा नवरात्रि की अष्टमी तिथि को विशेष रूप से निभाई जाती है। बाबा को चांदी और स्वर्ण आभूषणों से भव्य रूप से सजाया गया। दिव्य शृंगार और भस्म आरती के समापन के बाद समस्त मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गूँज उठा। घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार ने वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया।
श्रद्धालुओं की आस्था और भीड़
गौरतलब है कि उज्जैन की पावन नगरी में स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जो सदैव श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। महाअष्टमी जैसे पर्वों पर यहाँ देश के कोने-कोने से भक्त दर्शन के लिए पहुँचते हैं। रात से ही कतारबद्ध श्रद्धालुओं की यह आस्था इस मंदिर की अलौकिक महत्ता को रेखांकित करती है। आने वाले नवरात्रि पर्व के शेष दिनों में भी ऐसे ही भव्य आयोजनों की अपेक्षा है।