19 अक्टूबर 2026
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महाअष्टमी पर उज्जैन में बाबा महाकाल का देवी स्वरूप शृंगार, चांदी-स्वर्ण आभूषणों से भव्य दर्शन

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महाअष्टमी पर उज्जैन में बाबा महाकाल का देवी स्वरूप शृंगार, चांदी-स्वर्ण आभूषणों से भव्य दर्शन

सारांश

महाअष्टमी पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल का देवी स्वरूप में चांदी और स्वर्ण आभूषणों से भव्य शृंगार किया गया। महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म आरती अर्पित हुई और 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से पूरा परिसर गूँज उठा।

मुख्य बातें

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 19 अक्टूबर 2026 को महाअष्टमी पर बाबा महाकाल का देवी स्वरूप में शृंगार किया गया।
बाबा महाकाल को चांदी और स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत किया गया।
परंपरानुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म आरती अर्पित की गई।
जलाभिषेक और पंचामृत अभिषेक के बाद ढोल-नगाड़ों, झांझ-मंजीरे और शंखनाद के बीच भव्य आरती संपन्न हुई।
रात से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए कतारबद्ध थे और मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गूँज उठा।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 19 अक्टूबर 2026 को आश्विन शुक्ल पक्ष महाअष्टमी के पावन अवसर पर बाबा महाकाल का विशेष देवी स्वरूप में शृंगार किया गया। चांदी और स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत इस अलौकिक स्वरूप के दर्शन के लिए रात से ही हज़ारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में कतारबद्ध हो गए थे। भस्म आरती के इस दुर्लभ दृश्य ने समस्त मंदिर परिसर को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया।

कपाट उद्घाटन और पूजा विधि

सोमवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के बीच बाबा महाकाल के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। मंत्रोच्चार के बीच सर्वप्रथम जलाभिषेक किया गया, इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक हुआ। प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया, तत्पश्चात कपूर आरती के बाद बाबा ने मुकुट धारण किया।

भस्म आरती का दिव्य क्षण

परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के साथ हुई इस भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित हुए।

महाअष्टमी का विशेष देवी स्वरूप शृंगार

महाअष्टमी के विशेष अवसर पर बाबा महाकाल का देवी स्वरूप में श्रृंगार किया गया — यह परंपरा नवरात्रि की अष्टमी तिथि को विशेष रूप से निभाई जाती है। बाबा को चांदी और स्वर्ण आभूषणों से भव्य रूप से सजाया गया। दिव्य शृंगार और भस्म आरती के समापन के बाद समस्त मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गूँज उठा। घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार ने वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया।

श्रद्धालुओं की आस्था और भीड़

गौरतलब है कि उज्जैन की पावन नगरी में स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जो सदैव श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। महाअष्टमी जैसे पर्वों पर यहाँ देश के कोने-कोने से भक्त दर्शन के लिए पहुँचते हैं। रात से ही कतारबद्ध श्रद्धालुओं की यह आस्था इस मंदिर की अलौकिक महत्ता को रेखांकित करती है। आने वाले नवरात्रि पर्व के शेष दिनों में भी ऐसे ही भव्य आयोजनों की अपेक्षा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सांस्कृतिक विरासत है जो पीढ़ियों से अखंड रूप से चली आ रही है। यह आयोजन यह भी रेखांकित करता है कि नवरात्रि जैसे पर्वों पर देश भर से करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था एक साथ एक स्थान पर कैसे एकत्रित होती है — जो भारत की सांस्कृतिक एकता का जीवंत प्रमाण है।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती क्या होती है?
भस्म आरती उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर की प्रतिदिन तड़के होने वाली विशेष पूजा है, जिसमें परंपरानुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद बाबा निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।
महाअष्टमी पर महाकाल का देवी स्वरूप शृंगार क्यों किया जाता है?
नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर महाकालेश्वर मंदिर में परंपरानुसार बाबा महाकाल का देवी स्वरूप में विशेष शृंगार किया जाता है। इस अवसर पर बाबा को चांदी और स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत किया जाता है, जो शक्ति उपासना और शिव-शक्ति के अद्वैत का प्रतीक है।
महाकाल भस्म आरती में शामिल होने के लिए क्या करना होता है?
भस्म आरती के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को मंदिर प्रशासन द्वारा निर्धारित पंजीकरण प्रक्रिया का पालन करना होता है। महाअष्टमी जैसे विशेष पर्वों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु रात से ही कतारबद्ध हो जाते हैं।
महाकालेश्वर मंदिर कहाँ स्थित है और इसका क्या महत्व है?
महाकालेश्वर मंदिर मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित है और यह भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसे शिव के दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग के रूप में जाना जाता है, जो इसे देश के सर्वाधिक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक बनाता है।
19 अक्टूबर 2026 को उज्जैन में महाकाल आरती का आयोजन कैसा रहा?
19 अक्टूबर 2026 को आश्विन शुक्ल पक्ष महाअष्टमी के अवसर पर तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेकर कपाट खोले गए, पंचामृत अभिषेक और भस्म आरती हुई तथा बाबा का देवी स्वरूप में चांदी-स्वर्ण आभूषणों से शृंगार किया गया। मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गूँज उठा।
राष्ट्र प्रेस
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