उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में चंदन शृंगार और भस्म आरती, कार्तिक षष्ठी पर उमड़े हजारों श्रद्धालु
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में 31 अक्टूबर 2026 को कार्तिक कृष्ण पक्ष षष्ठी तिथि पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बने। विशेष चंदन शृंगार से सजे बाबा महाकाल के दर्शन पाने के लिए भक्तगण रात से ही कतारबद्ध होकर मंदिर परिसर में उपस्थित रहे।
कपाट खुलने की परंपरा और अभिषेक
शनिवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। कपाट खुलते ही मंत्रोच्चार के साथ जलाभिषेक किया गया और उसके बाद दूध, दही, घी, शहद तथा फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। परंपरानुसार प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया।
चंदन शृंगार और भस्म आरती
पूजा-अर्चना के क्रम में बाबा महाकाल का चंदन से विशेष शृंगार किया गया। उन्हें चंद्रमा और बेलपत्र अर्पित किए गए। कपूर की आरती के बाद बाबा ने मुकुट धारण किया। तत्पश्चात झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद की मनमोहक ध्वनियों के बीच भस्म आरती की गई। बाबा का यह अद्भुत स्वरूप देख उपस्थित भक्त भाव विभोर हो उठे।
महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरा
परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं। इस आस्था के कारण ही देशभर से भक्त महाकाल की नगरी उज्जैन में खिंचे चले आते हैं।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़
भस्म आरती के पश्चात संपूर्ण मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गूंज उठा। घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार की गूंज से वातावरण भक्तिमय हो गया। दर्शन पाने के बाद श्रद्धालुओं ने स्वयं को धन्य महसूस किया। कार्तिक मास में महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की उपस्थिति सामान्य दिनों की तुलना में उल्लेखनीय रूप से अधिक रहती है, और यह सिलसिला आने वाले पर्वों तक जारी रहने की संभावना है।