25 अगस्त 2026
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महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण द्वादशी पर भव्य भस्म आरती, रजत चंद्र-त्रिशूल और मेवे से हुआ बाबा का दिव्य शृंगार

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महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण द्वादशी पर भव्य भस्म आरती, रजत चंद्र-त्रिशूल और मेवे से हुआ बाबा का दिव्य शृंगार

सारांश

श्रावण द्वादशी पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का अलौकिक दृश्य — रजत चंद्र-त्रिशूल, त्रिपुंड और मेवे से सजे बाबा महाकाल के दर्शन को बड़ी संख्या में श्रद्धालु रात से ही कतारबद्ध हो गए। महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरा के अनुसार संपन्न इस आरती ने मंदिर परिसर को 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गुंजायमान कर दिया।

मुख्य बातें

25 अगस्त 2026 को श्रावण शुक्ल पक्ष द्वादशी (प्रातः 6:21 बजे तक) पर महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल का रजत चंद्र-त्रिशूल , त्रिपुंड और ड्रायफ्रूट (मेवे) से भव्य शृंगार किया गया।
महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरा के अनुसार भस्म आरती अर्पित की गई; भगवान वीरभद्र की आज्ञा के बाद कपाट खोले गए।
पूजा में पंचामृत अभिषेक , कपूर आरती और मुकुट धारण का अनुक्रम संपन्न हुआ।
भस्म आरती में पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी अनिवार्य है।
बड़ी संख्या में श्रद्धालु बीती रात से ही कतारबद्ध होकर दर्शन की प्रतीक्षा में रहे।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 25 अगस्त 2026 को श्रावण शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि (प्रातः 6:21 बजे तक) के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। इस अलौकिक आयोजन में सम्मिलित होने के लिए देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुँचे और मंदिर परिसर भक्तों की आस्था से आप्लावित हो उठा।

कपाट उद्घाटन और पूजा अनुक्रम

मंगलवार तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के साथ बाबा महाकाल के पट खोले गए। मंत्रोच्चार के बीच जलाभिषेक के बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक किया गया। पूजा के प्रथम चरण में घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया, तत्पश्चात कपूर आरती के बाद बाबा ने मुकुट धारण किया।

झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद की त्रिवेणी के साथ भस्म आरती का भव्य अनुष्ठान संपन्न हुआ। महाकाल मंदिर के पुजारी ने महाआरती का संचालन किया।

बाबा महाकाल का दिव्य शृंगार

इस विशेष अवसर पर भगवान महाकाल का रजत चंद्र-त्रिशूल, त्रिपुंड और ड्रायफ्रूट (मेवे) से भव्य शृंगार किया गया। दिव्य शृंगार और भस्म आरती के पश्चात जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन प्राप्त हुए, समूचा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। घंटियों की टंकार, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार ने वातावरण को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया।

परंपरा और आस्था

परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पण के उपरांत बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं — यही विश्वास लाखों श्रद्धालुओं को उज्जैन की पावन भूमि तक खींच लाता है। भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए पुरुषों हेतु पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं हेतु साड़ी धारण करना अनिवार्य है।

श्रद्धालुओं की उपस्थिति

अपने आराध्य के दर्शन की लालसा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु बीती रात से ही मंदिर परिसर के बाहर कतारबद्ध हो गए थे। श्रावण माह में महाकालेश्वर मंदिर में भक्तों का यह उत्साह वर्ष-दर-वर्ष बढ़ता जा रहा है, जो उज्जैन को देश के प्रमुख धार्मिक केंद्रों में अग्रणी स्थान दिलाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन अर्थव्यवस्था की धुरी बन चुकी है। महाकाल लोक परियोजना के बाद से श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो स्थानीय प्रशासन के लिए भीड़ प्रबंधन और बुनियादी ढाँचे की दृष्टि से बड़ी चुनौती भी है। परंपरा और आधुनिक व्यवस्था के इस संगम में यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि आस्था का अनुभव श्रद्धालुओं के लिए सुगम और सुरक्षित बना रहे।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती क्या है?
भस्म आरती उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन तड़के होने वाला एक अनूठा अनुष्ठान है, जिसमें बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है। मान्यता है कि इस आरती के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।
भस्म आरती में शामिल होने के लिए क्या पहनना अनिवार्य है?
भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए पुरुषों को पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है। यह परंपरा मंदिर की पवित्रता और धार्मिक मर्यादा के अनुरूप है।
भस्म आरती का आयोजन कौन करता है?
परंपरा के अनुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। मंदिर के पुजारी महाआरती का संचालन करते हैं और भगवान वीरभद्र की आज्ञा के बाद ही कपाट खोले जाते हैं।
25 अगस्त 2026 को महाकाल का शृंगार कैसे किया गया?
श्रावण शुक्ल पक्ष द्वादशी पर बाबा महाकाल का रजत चंद्र-त्रिशूल, त्रिपुंड और ड्रायफ्रूट (मेवे) से भव्य शृंगार किया गया। पंचामृत अभिषेक और कपूर आरती के बाद बाबा ने मुकुट धारण किया।
श्रावण माह में महाकालेश्वर मंदिर में भीड़ क्यों बढ़ जाती है?
श्रावण माह भगवान शिव की आराधना का सर्वाधिक पवित्र समय माना जाता है, और महाकालेश्वर देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक हैं। इस दौरान भस्म आरती के दर्शन की लालसा में देशभर से श्रद्धालु उज्जैन पहुँचते हैं, जिससे मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में भक्त उमड़ते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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