18 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण षष्ठी पर भव्य भस्म आरती, हज़ारों श्रद्धालुओं ने लिया बाबा महाकाल का आशीर्वाद

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण षष्ठी पर भव्य भस्म आरती, हज़ारों श्रद्धालुओं ने लिया बाबा महाकाल का आशीर्वाद

सारांश

श्रावण शुक्ल षष्ठी पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का दिव्य आयोजन हुआ। पंचामृत अभिषेक, मुकुट शृंगार और शंखनाद के बीच हज़ारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन किए। 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल यह मंदिर श्रावण में आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन जाता है।

मुख्य बातें

18 अगस्त 2026 को श्रावण शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि पर महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में भव्य भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल का पंचामृत अभिषेक — दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से — किया गया।
बाबा ने मस्तक पर चंद्रमा और कपूर आरती के बाद मुकुट धारण किया।
बड़ी संख्या में श्रद्धालु सोमवार की रात से ही दर्शन के लिए कतारबद्ध रहे।
भस्म आरती में पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 18 अगस्त 2026 को श्रावण शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि पर बाबा महाकाल की परंपरागत भस्म आरती संपन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु रात से ही कतारबद्ध होकर दर्शन के लिए आए। ढोल-नगाड़ों की गूँज और मंत्रोच्चार के बीच यह आलौकिक अनुष्ठान मंदिर परिसर को आस्था के रंग में रंग गया।

मुख्य घटनाक्रम

मंगलवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों के साथ बाबा महाकाल के कपाट विधिवत खोले गए। मंत्रोच्चार के बीच जलाभिषेक किया गया और तत्पश्चात दूध, दही, घी, शहद तथा फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। इस दौरान बाबा महाकाल ने मस्तक पर चंद्रमा धारण किया।

पूजा के प्रथम चरण में घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद बाबा ने मुकुट धारण किया, और तत्पश्चात झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े एवं शंखनाद की दिव्य ध्वनि के साथ भस्म आरती संपन्न की गई। मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई।

श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

अपने आराध्य देव के दर्शन की चाह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु सोमवार की रात से ही मंदिर परिसर के बाहर कतारबद्ध हो गए थे। जैसे ही भस्म आरती के बाद दर्शन का अवसर मिला, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। घंटियों की टनटनाहट, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार ने वातावरण को अलौकिक बना दिया।

परंपरागत वेशभूषा की अनिवार्यता

गौरतलब है कि महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती में परंपरागत वेशभूषा का पालन अनिवार्य है। पुरुष श्रद्धालुओं के लिए धोती-सोला और महिला श्रद्धालुओं के लिए साड़ी पहनना आवश्यक होता है। यह नियम मंदिर की धार्मिक मर्यादा और सदियों पुरानी परंपरा को जीवित रखने के लिए लागू है।

श्रावण माह का महत्व

श्रावण मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है, और इस महीने महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है। उज्जैन स्थित यह मंदिर देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसकी भस्म आरती विश्व भर में अपनी दिव्यता के लिए प्रसिद्ध है। श्रावण के प्रत्येक सोमवार और विशेष तिथियों पर यहाँ विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान का आधार भी है — श्रावण में लाखों श्रद्धालुओं के आगमन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा मिलता है। यह ध्यान देने योग्य है कि मंदिर प्रशासन द्वारा परंपरागत वेशभूषा की अनिवार्यता जैसे नियम धार्मिक मर्यादा को बनाए रखने के साथ-साथ अनुशासित भीड़ प्रबंधन में भी सहायक हैं। श्रावण के प्रत्येक विशेष अवसर पर बढ़ती श्रद्धालु संख्या यह दर्शाती है कि आधुनिकता के बावजूद जन-आस्था और तीर्थाटन की परंपरा और मज़बूत हो रही है।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती क्या है?
भस्म आरती उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन तड़के होने वाला एक विशेष अनुष्ठान है, जिसमें भगवान महाकाल को पंचामृत से अभिषेक के बाद भस्म अर्पित की जाती है। यह 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक इस मंदिर की सबसे प्रतिष्ठित परंपरा मानी जाती है।
18 अगस्त 2026 को महाकाल मंदिर में कौन-सी तिथि थी?
18 अगस्त 2026 को श्रावण शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि थी, जो शिव उपासना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस विशेष तिथि पर मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक रही।
भस्म आरती में शामिल होने के लिए क्या नियम हैं?
भस्म आरती में पुरुष श्रद्धालुओं के लिए धोती-सोला और महिला श्रद्धालुओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। यह परंपरागत वेशभूषा नियम मंदिर की धार्मिक मर्यादा और सदियों पुरानी परंपरा के संरक्षण के लिए लागू किया गया है।
बाबा महाकाल के अभिषेक में क्या-क्या उपयोग होता है?
बाबा महाकाल का अभिषेक जल से करने के बाद पंचामृत — दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस — से किया जाता है। इसके बाद कपूर आरती और भस्म आरती संपन्न होती है तथा बाबा को मुकुट एवं विशेष शृंगार से सुसज्जित किया जाता है।
श्रावण मास में महाकालेश्वर मंदिर क्यों विशेष होता है?
श्रावण मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है, इसलिए इस दौरान महाकालेश्वर मंदिर में देशभर से लाखों श्रद्धालु आते हैं। उज्जैन स्थित यह मंदिर देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और श्रावण की प्रत्येक विशेष तिथि पर यहाँ भव्य अनुष्ठान आयोजित होते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 दिन पहले
  2. 4 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 4 महीने पहले