उज्जैन: गणेश स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, भांग-चंदन से हुआ भव्य शृंगार; श्रावण त्रयोदशी पर उमड़े श्रद्धालु
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 26 अगस्त को श्रावण शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि (सुबह 7:59 बजे तक) के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। इस दिव्य अनुष्ठान में बाबा को गणेश स्वरूप में सजाया गया और भांग-चंदन से उनका विशेष शृंगार किया गया। हज़ारों श्रद्धालु रात से ही कतारबद्ध होकर इस अलौकिक दर्शन की प्रतीक्षा में खड़े रहे।
कपाट खुलने से लेकर भस्म आरती तक का क्रम
बुधवार तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ बाबा महाकाल के कपाट विधिवत खोले गए। मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया, तत्पश्चात दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ।
पूजा के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के उपरांत बाबा ने मुकुट धारण किया। इसके बाद झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद की त्रिवेणी के साथ भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ।
गणेश स्वरूप शृंगार की विशेषता
इस विशेष तिथि पर बाबा महाकाल को गणेश स्वरूप में सजाया गया — भांग और चंदन से उनका शृंगार किया गया, जो श्रावण मास की परंपरागत पूजा-पद्धति का अभिन्न अंग है। जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार ने वातावरण को और अधिक दिव्य बना दिया।
महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरागत भूमिका
परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं — यही आस्था लाखों श्रद्धालुओं को उज्जैन की पावन नगरी तक खींच लाती है। महाकाल मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई।
श्रद्धालुओं के लिए आचार-संहिता
भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए पारंपरिक वेशभूषा अनिवार्य है — पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी। गौरतलब है कि श्रावण मास में महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है, और प्रशासन को विशेष व्यवस्थाएँ करनी पड़ती हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार और विशेष तिथियों पर उज्जैन में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है, और महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती देश के सबसे दुर्लभ एवं दर्शनीय धार्मिक अनुष्ठानों में गिनी जाती है।