26 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

उज्जैन: गणेश स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, भांग-चंदन से हुआ भव्य शृंगार; श्रावण त्रयोदशी पर उमड़े श्रद्धालु

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
उज्जैन: गणेश स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, भांग-चंदन से हुआ भव्य शृंगार; श्रावण त्रयोदशी पर उमड़े श्रद्धालु

सारांश

श्रावण शुक्ल त्रयोदशी पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल गणेश स्वरूप में सजे — भांग-चंदन का शृंगार, पंचामृत अभिषेक और महानिर्वाणी अखाड़े की भस्म आरती ने वातावरण को दिव्य बना दिया। हज़ारों श्रद्धालु रात से कतार में खड़े रहे।

मुख्य बातें

26 अगस्त को श्रावण शुक्ल पक्ष त्रयोदशी (सुबह 7:59 बजे तक) पर महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल को गणेश स्वरूप में सजाया गया; भांग-चंदन से विशेष शृंगार किया गया।
पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, फलों का रस) से अभिषेक और जलाभिषेक के बाद कपूर आरती व मुकुट धारण हुआ।
परंपरा के अनुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म आरती अर्पित की गई।
भस्म आरती में पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी अनिवार्य है।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 26 अगस्त को श्रावण शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि (सुबह 7:59 बजे तक) के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। इस दिव्य अनुष्ठान में बाबा को गणेश स्वरूप में सजाया गया और भांग-चंदन से उनका विशेष शृंगार किया गया। हज़ारों श्रद्धालु रात से ही कतारबद्ध होकर इस अलौकिक दर्शन की प्रतीक्षा में खड़े रहे।

कपाट खुलने से लेकर भस्म आरती तक का क्रम

बुधवार तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ बाबा महाकाल के कपाट विधिवत खोले गए। मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया, तत्पश्चात दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ।

पूजा के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के उपरांत बाबा ने मुकुट धारण किया। इसके बाद झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद की त्रिवेणी के साथ भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ।

गणेश स्वरूप शृंगार की विशेषता

इस विशेष तिथि पर बाबा महाकाल को गणेश स्वरूप में सजाया गया — भांग और चंदन से उनका शृंगार किया गया, जो श्रावण मास की परंपरागत पूजा-पद्धति का अभिन्न अंग है। जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार ने वातावरण को और अधिक दिव्य बना दिया।

महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरागत भूमिका

परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं — यही आस्था लाखों श्रद्धालुओं को उज्जैन की पावन नगरी तक खींच लाती है। महाकाल मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई।

श्रद्धालुओं के लिए आचार-संहिता

भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए पारंपरिक वेशभूषा अनिवार्य है — पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी। गौरतलब है कि श्रावण मास में महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है, और प्रशासन को विशेष व्यवस्थाएँ करनी पड़ती हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार और विशेष तिथियों पर उज्जैन में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है, और महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती देश के सबसे दुर्लभ एवं दर्शनीय धार्मिक अनुष्ठानों में गिनी जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान का केंद्र है — श्रावण मास में यहाँ उमड़ने वाली भीड़ इस बात का प्रमाण है कि आस्था और पर्यटन दोनों एक साथ चल सकते हैं। गौरतलब है कि महाकाल लोक परियोजना के बाद से मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, लेकिन भीड़ प्रबंधन और पारंपरिक अनुष्ठानों की पवित्रता बनाए रखना एक सतत चुनौती बनी हुई है। धार्मिक पर्यटन के इस उभार को व्यापक आर्थिक और सामाजिक संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती क्या होती है?
भस्म आरती महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन का सबसे पवित्र और दुर्लभ अनुष्ठान है, जिसमें बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है। मान्यता है कि इस आरती के बाद बाबा निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यह आरती महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरागत जिम्मेदारी है।
26 अगस्त को बाबा महाकाल को किस स्वरूप में सजाया गया?
26 अगस्त को श्रावण शुक्ल पक्ष त्रयोदशी पर बाबा महाकाल को गणेश स्वरूप में सजाया गया और भांग-चंदन से उनका भव्य शृंगार किया गया। पंचामृत अभिषेक के बाद कपूर आरती और मुकुट धारण का क्रम भी संपन्न हुआ।
भस्म आरती में शामिल होने के लिए क्या नियम हैं?
भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए पारंपरिक वेशभूषा अनिवार्य है — पुरुषों को धोती-सोला और महिलाओं को साड़ी पहनना आवश्यक है। श्रद्धालुओं को पूर्व में ऑनलाइन या मंदिर प्रशासन के माध्यम से अनुमति लेनी होती है।
श्रावण मास में महाकालेश्वर मंदिर का महत्व क्यों बढ़ जाता है?
श्रावण मास भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना माना जाता है, इसलिए इस दौरान महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। विशेष तिथियों — जैसे त्रयोदशी, सोमवार और प्रदोष — पर विशेष शृंगार और आरती का आयोजन होता है।
महानिर्वाणी अखाड़े की भस्म आरती में क्या भूमिका है?
परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़ा महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती अर्पित करने का अधिकार रखता है। यह सदियों पुरानी परंपरा है जो मंदिर की धार्मिक व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 दिन पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले